Career Tips: पलायट बनने का है सपना? मैथ्स और फिजिक्स में है पकड़, छात्र जरूर आजमाए किस्मत, यह रहा पूरा प्रोसेस

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Aviation Career India: एयरलाइंस सेक्टर को अक्सर लग्जरी लाइफस्टाइल से जोड़ा जाता है, क्योंकि पायलटों को उच्च स्तरीय सुविधाएं, यात्रा अवसर और सम्मान मिलता है लेकिन इसके पीछे कठोर ट्रेनिंग, अनुशासन और जिम्मेदारी की बड़ी भूमिका होती है. सहरसा आए एयर इंडिया के पायलट कैप्टन चंदन कुमार ने बताया कि पायलट बनने का सफर आसान नहीं होता लेकिन सही जानकारी अनुशासन और मेहनत से यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है.

सहरसा: अगर आपका सपना आसमान की ऊंचाइयों को छूना है और आप पायलट बनना चाहते हैं तो इसकी तैयारी 12वीं के बाद सही दिशा में शुरू करना बेहद जरूरी है. एयरलाइन सेक्टर में करियर बनाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण विषय मैथ्स और फिजिक्स माने जाते हैं यदि इन दोनों विषयों पर आपकी मजबूत पकड़ है तो आप पायलट बनने की दिशा में पहला कदम बढ़ा सकते हैं.

मामले की जानकारी देते हुए सहरसा आए एयर इंडिया के पायलट कैप्टन चंदन कुमार ने बताया कि पायलट बनने का सफर आसान नहीं होता लेकिन सही जानकारी अनुशासन और मेहनत से यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है. 12वीं पास करने के बाद पायलट ट्रेनिंग के लिए छात्रों को मैथ्स और फिजिक्स के साथ-साथ कई अन्य महत्वपूर्ण विषयों की भी समझ विकसित करनी होती है.

इन विषयों पर होनी चाहिए पकड़
इनमें मौसम विज्ञान (Meteorology), नेविगेशन, कम्युनिकेशन और एयरक्राफ्ट सिस्टम की बेसिक जानकारी शामिल है. एयरलाइंस सेक्टर में सफल होने के लिए सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि स्किल भी जरूरी होती है. अच्छी इंग्लिश कम्युनिकेशन, त्वरित निर्णय क्षमता, मानसिक संतुलन और मेडिकल फिटनेस पायलट के लिए अनिवार्य गुण हैं. उड़ान के दौरान मौसम, तकनीकी और नेविगेशन से जुड़े कई निर्णय तुरंत लेने पड़ते हैं, इसलिए मानसिक रूप से मजबूत होना भी जरूरी है.

पायलट ट्रेनिंग के दौरान पांच मुख्य विषयों को पास करना होता है, जिनका एयरलाइन करियर में बहुत महत्व होता है. एविएशन रेगुलेशन-विमानन नियम और सुरक्षा मानक. मेट्रोलॉजी–मौसम और उड़ान पर उसका प्रभाव. नेविगेशन–विमान की दिशा और मार्ग निर्धारण. टेक्निकल (एयरक्राफ्ट सिस्टम)–विमान की तकनीकी संरचना. RTR (रेडियो टेलीफोनी)–एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संवाद.

क्या है लाइसेंस की प्रक्रिया
इन विषयों को पास करने के बाद ही आगे की लाइसेंस प्रक्रिया शुरू होती है. पायलट बनने के लिए स्टूडेंट पायलट लाइसेंस (SPL), प्राइवेट पायलट लाइसेंस (PPL) और कमर्शियल पायलट लाइसेंस (CPL) जैसी चरणबद्ध ट्रेनिंग पूरी करनी होती है. करियर विशेषज्ञ और अनुभवी पायलटों के अनुसार सफलता की कुंजी नियमित पढ़ाई, फ्लाइट सिम्युलेटर प्रैक्टिस और सही फ्लाइंग स्कूल का चयन है फ्लाइंग ट्रेनिंग महंगी और चुनौतीपूर्ण होती है, इसलिए धैर्य और वित्तीय योजना दोनों जरूरी है.

12वीं के बाद पायलट बनने की न्यूनतम आयु लगभग 17 साल मानी जाती है, जिसके बाद छात्र लाइसेंस ट्रेनिंग शुरू कर सकते हैं. पूरी ट्रेनिंग और अनुभव हासिल करने में कई साल लगते हैं, लेकिन एक बार कमर्शियल पायलट बनने के बाद यह करियर प्रतिष्ठा, उच्च वेतन और अंतरराष्ट्रीय अवसर प्रदान करता है.

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Mohd Majid

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