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Success Story: देवघर के बगोहरी गांव के किसान भुनेश्वर यादव ने सूद पर पैसा लेकर भैंस खरीदी. मेहनत के दम पर आज दूध बेचकर हर महीने 1.70 कमा रहे हैं. हालांकि लाखों की कमाई के बावजूद अब तक उन्हें किसी भी सरकारी योजना या सुविधा का लाभ नहीं मिल पाया है.
देवघर: देवघर जिले के एक छोटे से गांव बगोहरी की यह कहानी आज हजारों किसानों के लिए मिसाल बन चुकी है. कभी खेती और दिहाड़ी मजदूरी कर किसी तरह परिवार का पेट पालने वाले किसान भुनेश्वर यादव ने अपने हौसले और मेहनत के दम पर आज पशुपालन को अपनी आमदनी का मजबूत जरिया बना लिया है. सीमित संसाधन, आर्थिक तंगी और संघर्ष भरे हालात के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और धीरे-धीरे अपनी किस्मत की दिशा बदल दी.
2007 से शुरु की भैंस रखने की शुरुआत
भुनेश्वर यादव पहले परंपरागत खेती किया करते थे, लेकिन खेती से होने वाली आमदनी इतनी नहीं थी कि परिवार का खर्च ठीक से चल सके. साल 2007 में उन्होंने एक बड़ा फैसला लिया. सूद पर पैसा लेकर उन्होंने तीन भैंस खरीदीं और पशुपालन की शुरुआत की. शुरुआत आसान नहीं थी, लेकिन वे रोज़ाना दूध बेचकर थोड़ा-थोड़ा मुनाफा कमाते गए. उसी कमाई से भैंसों की संख्या बढ़ाते रहे. मेहनत और धैर्य का नतीजा यह हुआ कि आज उनके पास बिना किसी सरकारी मदद के करीब 20 भैंस हैं और पशुपालन उनकी आजीविका का मुख्य आधार बन चुका है.
क्या कहते है किसान सीताराम यादव
किसान भुनेश्वर यादव के बेटे सीताराम यादव बताते हैं कि फिलहाल वे खेती के साथ-साथ पशुपालन भी कर रहे हैं. रोजाना करीब 80 से 85 लीटर दूध का उत्पादन हो जाता है. जिससे महीने की कमाई एक लाख 70 हजार रुपये से भी ज्यादा हो जाती है. यह आमदनी पूरे परिवार के लिए संबल बनी हुई है. उन्हें आत्मनिर्भर बना रही है. सीताराम का कहना है कि यदि मेहनत और सही सोच हो, तो सीमित साधनों में भी आगे बढ़ा जा सकता है.
नहीं मिली कोई सरकारी मदद
हालांकि, इस सफलता के पीछे कई परेशानियां भी छिपी हैं. सीताराम यादव बताते हैं कि सरकार की योजनाओं की जानकारी तो मिलती है, लेकिन वे योजनाएं हम जैसे गरीब किसानों तक पहुंचते-पहुंचते दम तोड़ देती हैं. न तो उन्हें सब्सिडी दर पर गाय-भैंस मिल पाई और न ही पशुओं को रखने के लिए कोई शेड. ठंड हो या बरसात, पशुओं को खुले आसमान के नीचे रखना पड़ता है, जिसकी वजह से कई बार भैंसें बीमार भी हो जाती हैं और नुकसान झेलना पड़ता है.
हौसले, मेहनत और लग्न से बदली तस्वीर
इसके बावजूद भुनेश्वर यादव और उनका परिवार हार मानने वालों में से नहीं है. सरकारी सुविधाओं के बिना भी उन्होंने अपने दम पर पशुपालन को आगे बढ़ाया और आज अच्छी कमाई कर रहे हैं. उनकी यह कहानी उन किसानों के लिए प्रेरणा है, जो संसाधनों की कमी के कारण पीछे रह जाते हैं. सही मेहनत, लगन और हौसले के साथ किसान भी अपनी जिंदगी की तस्वीर बदल सकता है.
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मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें


