₹50 लाख सालाना की नौकरी छोड़ मोमो बेचना उतरा युवक, 2.5 साल में बनाया ₹5 करोड़ का बिजनेस

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नई दिल्ली. कभी गुरुग्राम में ऊंची सैलरी वाली कॉरपोरेट नौकरी करने वाले साकेत सौरभ की कहानी आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है. 50 लाख रुपये सालाना पैकेज छोड़कर मोमो बेचने का फैसला आसान नहीं था, लेकिन इसी जोखिम ने उन्हें सफल उद्यमी बना दिया. साकेत ने 2023 में अपनी स्थिर नौकरी छोड़ी और ‘द मोमोज माफिया’ नाम से एक फूड ब्रांड की नींव रखी. आज यह बिजनेस फ्रेंचाइजी मॉडल पर सात राज्यों में फैल चुका है और ढाई साल में 5 करोड़ रुपये से ज्यादा का रेवेन्यू कमा चुका है.

50 लाख की नौकरी छोड़ने का बड़ा फैसला
साकेत सौरभ फैशन टेक्नोलॉजी संस्थान (NIFT) दिल्ली से पढ़ाई के बाद पहले भी स्टार्टअप की दुनिया से जुड़े रहे हैं. उन्होंने 2014 में Wowflux की सह-स्थापना की थी, जिसे बाद में FlixStock ने अधिग्रहित कर लिया. इसके बाद साकेत वहीं प्रोडक्ट मैनेजर बने और उनकी सैलरी बढ़कर करीब 52 लाख रुपये सालाना हो गई. सितंबर 2023 में उन्होंने यह आरामदायक नौकरी छोड़ दी. हाल ही में उनका इंस्टाग्राम वीडियो ‘50 लाख की नौकरी छोड़ मोमो बिजनेस’ वायरल हुआ, जिसे लाखों लोगों ने देखा और सराहा.

छोटे प्रयोग से मिली बड़ी सीख
नौकरी के दौरान ही साकेत ने अपनी बहन और जीजा के साथ गुरुग्राम में Bamboo Cafe शुरू किया था. इस कैफे में पराठे से लेकर बिरयानी तक सब कुछ बिकता था, लेकिन सबसे ज्यादा डिमांड मोमो की थी. इसी से उन्हें आइडिया आया कि क्यों न सिर्फ मोमो पर फोकस किया जाए. पहले उन्होंने कैफे के बाहर एक छोटा सा कैनोपी लगाया, फिर इन्फोटेक इलाके में एक मोमो कार्ट शुरू किया. यह कार्ट रोजाना 10 से 12 हजार रुपये की बिक्री करने लगा, जिससे उन्हें बिजनेस की असली ताकत समझ आई.

फ्रेंचाइजी मॉडल की शुरुआत
मोमो कार्ट पर आने वाले कई ऑफिस कर्मचारी साकेत से खुद का कार्ट खोलने की इच्छा जताने लगे. यहीं से फ्रेंचाइजी मॉडल का विचार जन्मा. जनवरी 2024 में ‘द मोमोज माफिया’ को आधिकारिक तौर पर रजिस्टर किया गया. इस कंपनी के पांच पार्टनर हैं और शुरुआत में तेजी से कई कार्ट खोले गए. हालांकि, साकेत के मुताबिक कार्ट बिजनेस में चुनौतियां भी कम नहीं थीं, जैसे नगर निगम की कार्रवाई, स्टाफ की कमी और मौसम से जुड़ी दिक्कतें.

स्केलेबल बिजनेस की तलाश
एक साल के अनुभव के बाद साकेत को समझ आ गया कि सिर्फ ठेलों के दम पर बड़ा ब्रांड नहीं बनाया जा सकता. उनका मानना था कि 500 करोड़ का ब्रांड कार्ट पर खड़ा नहीं हो सकता. इसके बाद उन्होंने नया मॉडल अपनाया, जिसे CSR यानी ‘कार्ट सर्विस रेस्टोरेंट’ नाम दिया गया. इसमें छोटे आउटलेट खोले गए, जिनके बाहर मोमो कार्ट लगाए गए. इससे सड़क किनारे मिलने वाला स्वाद और दुकान की स्थिरता – दोनों का फायदा मिला.

आज कैसा है ‘द मोमोज माफिया’
फिलहाल ‘द मोमोज माफिया’ के पास करीब 40 मोमो कार्ट, 20 छोटे आउटलेट और 2 फुल-फ्लेज्ड क्विक सर्विस रेस्टोरेंट हैं. यह ब्रांड अब सिर्फ गुरुग्राम तक सीमित नहीं है, बल्कि सात राज्यों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुका है. साकेत का कहना है कि उनका सपना भारत में एक पहचानने योग्य डम्पलिंग ब्रांड बनाना है, जो इंटरनेशनल लेवल पर भी मुकाबला कर सके.

कमाई के आंकड़े और युवाओं के लिए सलाह
कमाई की बात करें तो पहले साल कंपनी ने करीब 16 लाख रुपये का रेवेन्यू किया. अगले साल यह आंकड़ा 2.2 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. चालू साल में ही 2.2 करोड़ की कमाई हो चुकी है और साल के अंत तक 3 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है. यानी ढाई साल में कुल रेवेन्यू 5 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया. साकेत युवाओं को सलाह देते हैं कि अगर बड़ा बिजनेस बनाना है तो सीधे आउटलेट से शुरुआत करें. ठेला छोटे स्तर की कमाई दे सकता है, लेकिन बड़े सपनों के लिए मजबूत मॉडल जरूरी है.



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