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Agra Tajmahal: दुनिया के सात अजूबों में शामिल ताज महल अपनी सुंदरता के साथ-साथ कई अनसुलझे रहस्यों के लिए भी जाना जाता है. क्या वाकई ताज महल दिन में तीन बार रंग बदलता है? क्या शाहजहां ने सच में मजदूरों के हाथ कटवा दिए थे या यह महज एक सुनी-सुनाई कहानी है? मुमताज की असली कब्र से लेकर बंद पड़े 22 कमरों के विवाद तक, ताज महल से जुड़ी ऐसी कई बातें हैं जो आज भी लोगों को हैरान कर देती हैं. आइए जानते हैं संगमरमर की इस आलीशान इमारत के पीछे छिपे वो किस्से जिन्हें इतिहास की किताबों और लोक कथाओं में अलग-अलग तरह से बताया गया है.
आगरा का ताजमहल सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि दुनिया के सात अजूबों में से एक ऐसा अजूबा है जिसे देखने के लिए पूरी दुनिया उमड़ पड़ती है. यमुना के किनारे सफेद संगमरमर से बनी यह खूबसूरत रचना अपने अंदर कई ऐसे राज दबाए बैठी है, जिन्हें जानने की उत्सुकता हर किसी में होती है. कोई इसे प्यार की निशानी कहता है, तो कोई इसे वास्तुकला का करिश्मा. आइए जानते हैं ताजमहल से जुड़े उन रहस्यों और कहानियों के बारे में जो आज भी चर्चा का विषय बनी रहती हैं.
ताजमहल की सबसे बड़ी खूबी इसका रंग बदलना है. सूरज की किरणों के साथ इसके सफेद संगमरमर की आभा बदलती रहती है. सुबह के समय यह हल्का गुलाबी नजर आता है, दोपहर की तेज धूप में दूधिया सफेद और पूर्णिमा की चांदनी रात में यह सुनहरा दिखाई देता है. यह कुदरत का करिश्मा है या संगमरमर का कमाल, लेकिन इसकी यह बदलती खूबसूरती हर पर्यटक को दीवाना बना देती है.
अक्सर सुना जाता है कि ताजमहल पूरा होने के बाद शाहजहां ने कारीगरों के हाथ कटवा दिए थे ताकि वैसी दूसरी इमारत न बन सके. लेकिन इतिहास की किसी भी प्रामाणिक किताब में इसका कोई ठोस सबूत नहीं मिलता. इतिहासकारों का मानना है कि यह केवल एक मशहूर कहावत या मिथक है, जिसे कहानी को रोचक बनाने के लिए जोड़ा गया है. असल में कई कारीगरों ने ताजमहल के बाद भी दूसरी इमारतों के निर्माण में हिस्सा लिया था.
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एक प्रचलित कहानी यह भी है कि शाहजहां अपने लिए यमुना नदी के दूसरी तरफ काले संगमरमर का एक ‘काला ताजमहल’ बनवाना चाहता था. कहा जाता है कि वह सफेद और काले ताजमहल को एक पुल से जोड़ना चाहता था, लेकिन औरंगजेब द्वारा कैद किए जाने के कारण उसका यह सपना अधूरा रह गया. हालांकि, वर्तमान में आगरा में काले ताजमहल का कोई अवशेष या सबूत मौजूद नहीं है.
ताजमहल के मुख्य गुंबद के नीचे जो कब्रें हमें दिखाई देती हैं, वे असल में केवल स्मारक हैं. मुमताज महल और शाहजहां की असली कब्रें ताजमहल के ठीक नीचे एक गुप्त तहखाने में स्थित हैं. सुरक्षा और परंपरा के लिहाज से असली कब्रों को आम जनता की पहुंच से दूर रखा गया है ताकि इमारत की पवित्रता और शांति बनी रहे.
ताजमहल के नीचे बने तहखाने में कई कमरे आज भी बंद हैं, जिन्हें लेकर अक्सर विवाद और थ्योरी सामने आती रहती हैं. कुछ हिंदूवादी संगठनों का दावा है कि यह असल में ‘तेजोमहल’ शिव मंदिर था और बंद कमरों में देवी-देवताओं की मूर्तियां हैं. हालांकि, कोर्ट और पुरातत्व विभाग (ASI) की जांच में अभी तक ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला है जो इस दावे की पुष्टि कर सके.
ताजमहल का निर्माण कार्य सन 1632 में शुरू हुआ और इसे पूरी तरह तैयार होने में लगभग 22 साल का समय लगा. इसे बनाने में उस समय के 20 हजार से अधिक मजदूरों और शिल्पकारों ने अपना पसीना बहाया था. निर्माण सामग्री लाने के लिए 1000 से अधिक हाथियों का इस्तेमाल किया गया था, जो मीलों दूर से कीमती पत्थर और संगमरमर ढोकर लाते थे.
एक कहानी यह भी मशहूर है कि मुख्य गुंबद के नीचे मुमताज की कब्र पर छत से पानी की एक बूंद टपकती थी. लोग इसे मुख्य कारीगर की जानबूझकर छोड़ी गई एक कमी या शाहजहां के प्रति नाराजगी का प्रतीक मानते हैं. हालांकि, कई लोग इसे वास्तुशिल्प की एक गलती या प्रेम का संकेत भी कहते हैं. समय के साथ मरम्मत कार्यों की वजह से अब कई चीजें बदल चुकी हैं.


