माउंट एवरेस्ट चढ़ने में अच्छे-अच्छे के छूट जाते हैं पसीने, लेकिन ये कीड़े इससे भी ज्यादा ऊंचाई तक कैसे उड़ जाते हैं

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दुनिया की सबसे ऊंची चोटी Mount Everest पर चढ़ना बड़े-बड़े पर्वतारोहियों के लिए भी किसी सपने से कम नहीं होता. कम ऑक्सीजन, हड्डियां जमा देने वाली ठंड और तेज हवाएं यहां इंसान की असली परीक्षा लेती हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ छोटे-से कीड़े इस ऊंचाई से भी ऊपर आसमान में पाए जा चुके हैं?

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दुनिया की सबसे ऊंची चोटी Mount Everest पर चढ़ना किसी भी इंसान के लिए बेहद कठिन काम है. यहां ऑक्सीजन बहुत कम होती है, तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे चला जाता है और तेज हवाएं शरीर को तोड़ देती हैं. बड़े-बड़े पर्वतारोही भी यहां पहुंचकर थक जाते हैं. लेकिन हैरानी की बात यह है कि कुछ मधुमक्खियां इतनी ऊंचाई वाले इलाकों में भी उड़ान भर सकती हैं. आखिर यह कैसे संभव है?

वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि कुछ प्रजातियां, खासकर पहाड़ी इलाकों में रहने वाली मधुमक्खियां, कम ऑक्सीजन में भी उड़ने की क्षमता रखती हैं. उनके पंख बहुत तेजी से फड़फड़ाते हैं, जिससे उन्हें हवा में बने रहने के लिए पर्याप्त ताकत मिलती है. उनका शरीर छोटा और हल्का होता है, इसलिए उन्हें इंसानों की तुलना में बहुत कम ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है. यही वजह है कि वे पतली हवा में भी सक्रिय रह पाती हैं.

हिमालय क्षेत्र में पाई जाने वाली विशाल मधुमक्खी, जिसे Apis laboriosa कहा जाता है, ऊंचे पहाड़ों पर अपने छत्ते बनाती है. ये मधुमक्खियां खड़ी चट्टानों पर हजारों फीट की ऊंचाई पर रह सकती हैं. कई बार भोजन की तलाश में ये और भी ऊपर तक उड़ जाती हैं. शोध में पाया गया है कि प्रयोगशाला में कुछ मधुमक्खियां बेहद कम ऑक्सीजन स्तर पर भी उड़ने में सफल रहीं, जो समुद्र तल से 8,000 मीटर से ज्यादा ऊंचाई के बराबर था.

मधुमक्खियों की मांसपेशियां बहुत मजबूत और कुशल होती हैं. उनके शरीर में ऊर्जा बनाने की प्रक्रिया तेज होती है, जिससे वे ठंडे मौसम में भी उड़ान भर सकती हैं. पहाड़ी मधुमक्खियां अपने शरीर का तापमान नियंत्रित रखने में भी सक्षम होती हैं. वे अपने पंखों की गति बढ़ाकर शरीर को गर्म रखती हैं, जिससे ठंड का असर कम होता है. हालांकि यह जरूरी नहीं कि मधुमक्खियां नियमित रूप से Mount Everest की चोटी से ऊपर उड़ती हों, लेकिन उनमें इतनी क्षमता जरूर पाई गई है कि वे बेहद ऊंचे और कम ऑक्सीजन वाले वातावरण में भी उड़ सकें. यह उनकी जैविक बनावट और अनुकूलन क्षमता का कमाल है.

प्रकृति ने हर जीव को उसकी जरूरत के हिसाब से खास ताकत दी है. जहां इंसान को एवरेस्ट पर चढ़ने के लिए महीनों की तैयारी और ऑक्सीजन सिलेंडर की जरूरत पड़ती है, वहीं मधुमक्खियां अपने छोटे से शरीर और तेज पंखों के सहारे ऊंचे पहाड़ों की कठिन परिस्थितियों का सामना कर लेती हैं. यही प्रकृति का अद्भुत संतुलन है, जो हमें बार-बार चौंकाता है.

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Vividha Singh

विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें



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