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Mango blossoms on a tree: आम की बागवानी किसानों के लिए नकदी फसल के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रही है. एक एकड़ में आम का सुव्यवस्थित बाग लगाकर किसान सालाना 2 से 3 लाख रुपए तक का मुनाफा कमा सकते हैं, लेकिन अधिक लाभ के लिए केवल फल की प्रतीक्षा करना पर्याप्त नहीं है. आम के बाग में समय पर पोषक तत्व प्रबंधन, जल प्रबंधन और कीट नियंत्रण करना बेहद जरूरी है. खासकर फरवरी महीने में जब पेड़ों पर मंजर आने लगते हैं. तब विशेष सतर्कता की आवश्यकता होती है. यदि इस समय सही देखभाल नहीं की गई तो पूरी फसल चौपट हो सकती है.
पलामू के कृषि विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद कुमार ने लोकल 18 को बताया कि किसान केवल एन पी के उर्वरकों का सामान्य प्रयोग करते हैं, लेकिन संतुलित पोषण प्रबंधन नहीं करते हैं. आम के पेड़ों को नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश के साथ सूक्ष्म पोषक तत्वों की भी आवश्यकता होती है.
मंजर निकलने के समय हल्की सिंचाई और उचित खाद प्रबंधन से मंजर मजबूत बनते हैं और फलधारण बेहतर होता है. जलभराव से बचाव भी जरूरी है. क्योंकि अधिक नमी से रोग और कीटों का प्रकोप बढ़ सकता है. उन्होंने आगे कहा कि फरवरी में आम के पेड़ों पर मंजर आने के साथ ही मधुआ या ब्राउन हॉपर कीट का खतरा बढ़ जाता है.
यह कीट मंजर का रस चूस लेता है, जिससे फूल झड़ने लगते हैं और फल बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है. इससे बचाव के लिए समय पर कीटनाशक का छिड़काव जरूरी है. विशेषज्ञ इमीडाक्लोरोपिड दवा का 0.5 एमएल से 1 एमएल प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करने की सलाह देते हैं. इसके अलावा लेंसर गोल्ड का भी उपयोग किया जा सकता है.
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सही मात्रा में छिड़काव करने से मधुआ कीट का प्रकोप काफी हद तक नियंत्रित हो जाता है और मंजर स्वस्थ रहते हैं. उन्होंने कहा कि ध्यान रहे कि दवा का छिड़काव मंजर खिलने से पहले ही कर लें. जब फूल पूरी तरह खिल जाएं, तब किसी भी प्रकार का कीटनाशक छिड़काव नहीं करना चाहिए. उस समय परागण की प्रक्रिया चलती है.
यदि उस दौरान दवा का प्रयोग किया गया तो परागण प्रभावित हो सकता है और फल लगने में कमी आ सकती है. इसलिए आम की बागवानी में समय पर पोषण, सिंचाई और कीट प्रबंधन ही अधिक उत्पादन और बेहतर मुनाफे की कुंजी है. सजग किसान ही भरपूर फल और अच्छा लाभ प्राप्त कर सकते हैं.


