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Muzaffarpur news: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में नाबालिग से जुड़े मामले में जांच में देरी अब पुलिस पर भारी पड़ती दिख रही है. विशेष पॉक्सो कोर्ट ने बोचहां थाने के थानाध्यक्ष पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया है. यह राशि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कोष में जमा कराने का आदेश दिया गया है.
मुजफ्फरपुर में पॉक्सो कोर्ट ने थानाध्यक्ष पर लगाया जुर्माना, जांच में सुस्ती पर रोक (एआई जेनरेटेड)
मुजफ्फरपुर. बोचहां थाना के थानाध्यक्ष पर विशेष पॉक्सो कोर्ट-एक ने 5000 रुपये का जुर्माना लगाया है. यह आदेश न्यायाधीश धीरेंद्र मिश्र ने दिया है. कोर्ट ने यह दंड उस समय सुनाया जब थानाध्यक्ष एक नाबालिग लड़की को अगवा कर दुष्कर्म के प्रयास के मामले की जांच पूरी नहीं कर पाए. अदालत ने स्पष्ट कहा कि ऐसे मामलों में पुलिस को जल्द से जल्द कार्रवाई करनी चाहिए, लेकिन बोचहां पुलिस की सुस्ती गंभीर चिंता का विषय है. कोर्ट ने जुर्माना राशि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कोष में जमा करने का निर्देश दिया है.
पीड़ित परिवार का दर्द
सबसे पहले 26 मई 2023 को पीड़ित किशोरी के पिता ने बोचहां थाना में FIR दर्ज कराई थी. उन्होंने बताया कि 23 मई 2023 की रात सात आरोपितों ने उनकी नाबालिग बेटी को घर से अगवा करने का प्रयास किया. मो. सईद ने दुष्कर्म करने की कोशिश की, लेकिन किशोरी ने चिल्ला कर विरोध किया, जिससे आरोपी भाग गए. इसका मुख्य आरोपी मो. सईद थे. मामले में पुलिस ने FIR जरूर दर्ज की, लेकिन जांच में ढील बरती गई. तीन साल गुजरने के बावजूद मामले में ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी. इसी लापरवाही के कारण कोर्ट ने थानाध्यक्ष को जुर्माना लगाया.
पहले भी लापरवाही पर सवाल
जानकारी के अनुसार, इस केस के अलावा थानाध्यक्ष से अन्य लंबित मामलों पर भी स्पष्टीकरण मांगा गया है. 18 नवंबर 2019 को एक किशोरी ने अजय सहनी समेत 11 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी. आरोपियों को गिरफ्तार न करने और चार्जशीट दाखिल करने में देरी पर कोर्ट ने थानाध्यक्ष से जवाब मांगा. इसमें चार्जशीट 30 जुलाई 2020 को जमा कराई गई थी, जो काफी देरी थी. 6 मार्च 2024 को मीनापुर के एक गांव में एक 17 वर्षीय किशोरी को अगवा कर शादी करने के मामले में भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने पर थानाध्यक्ष से स्पष्टीकरण लिया गया. इस केस में किशोरी की मां ने अमरजीत कुमार और रामसागर राय समेत अन्य को आरोपित बताया था, लेकिन पुलिस की कार्रवाई धीमी रही. इन लंबित मामलों ने यह सन्देश दिया कि थानाध्यक्ष के नेतृत्व में जांच त्वरित नहीं हो रही है.
कोर्ट का रुख से महकमे में हलचल
विशेष पॉक्सो कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि नाबालिगों के खिलाफ अपराध की जांच में सुस्ती बर्दाश्त नहीं होगी. कोर्ट ने इस मामले में पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर चिंता जताई और कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए. जुर्माना व्यवस्था इसी त्वरित कार्रवाई को मजबूर करने का एक तरीका माना जा रहा है. इस आदेश के बाद पुलिस महकमे में हलचल बढ़ गई है. उच्च अधिकारियों ने थानाध्यक्ष सहित संबंधित पुलिस टीम को केस डिपोजल और जांच जल्दी समाप्त करने के लिए दबाव बढ़ा दिया है. संकेत मिले हैं कि अब लंबित मामलों की समीक्षा और तेजी से कार्रवाई की जाएगी.
क्या बदलाव की उम्मीद कर सकते हैं?
बिहार में नाबालिगों के खिलाफ अपराध पहले भी चिंता का विषय रहे हैं. इस मामले में कोर्ट का सख्त रवैया एक संदेश है कि बच्चों के खिलाफ मामलों में पुलिस को सक्रिय और समयबद्ध कदम उठाना है. चाहे वह अगवा-दुष्कर्म का मामला हो या किशोरी को शादी के लिए जबरन ले जाने का, पुलिस को कानून के अनुरूप तत्काल जिम्मेदारी निभानी होगी. अब सबकी निगाहें इस पर हैं कि क्या बोचहां थाना और मुजफ्फरपुर पुलिस कर्मियों की जांच त्वरित होगी और न्याय की राह प्रशस्त होगी या नहीं. अदालत ने जिन मामलों में स्पष्टीकरण मांगा है, उनमें आगे की कार्रवाई से ही बिहार में पुलिस कार्यशैली की परीक्षा तय होगी.
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