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झांसी में स्थित पंचकुइयां मंदिर बुंदेलखंड की कुलदेवी पंचकुइयां देवी को समर्पित एक प्राचीन और पवित्र स्थल है. इस मंदिर का नाम यहां मौजूद पांच प्राचीन कुओं से पड़ा. मंदिर का वातावरण शांत और भक्ति से परिपूर्ण है, और दूर-दूर से श्रद्धालु यहां माता के दर्शन और आशीर्वाद लेने आते हैं.
झांसी. शहर में स्थित पंचकुइयां मंदिर बहुत पुराना और पवित्र मंदिर माना जाता है, इस मंदिर में विराजमान हैं पंचकुइयां देवी जिन्हें लोग पूरे बुंदेलखंड की कुलदेवी मानते हैं, कहा जाता है कि यह स्थान प्राचीन है. यहां पांच प्राचीन कुएं थे इसी कारण इस जगह का नाम पंचकुइयां पड़ा. समय के साथ यहां मंदिर बना और देवी की पूजा शुरू हुई. आज भी दूर दूर से लोग यहां माथा टेकने आते हैं. गांव के लोग हो या शहर के लोग सभी के मन में इस देवी के लिए पूरा विश्वास है. मंदिर का वातावरण शांत और भक्ति से भरा रहता है, सुबह और शाम आरती के समय यहां विशेष भीड़ दिखाई देती है. पंचकुइयां देवी को बुंदेलखंड की कुलदेवी इसलिए कहा जाता है. क्योंकि यहां के कई परिवार उन्हें अपनी कुल माता मानते हैं. पुराने समय में जब भी कोई नया काम शुरू होता था या कोई बड़ा फैसला लिया जाता था तो लोग सबसे पहले देवी के दरबार में आते थे. माना जाता है कि देवी अपने भक्तों की रक्षा करती हैं. हर संकट से बचाती हैं. शादी विवाह हो या बच्चे का जन्म हर खुशी के मौके पर परिवार यहां आकर आशीर्वाद लेते हैं. बुजुर्ग बताते हैं कि पीढ़ियों से उनके घर में देवी की पूजा होती आई है और हर साल परिवार के लोग एक साथ मंदिर में हाजिरी लगाने जरूर आते हैं.
इस मंदिर से जुड़ी कई धार्मिक मान्यताएं भी प्रचलित
कहा जाता है कि सच्चे मन से मांगी गई मुराद यहां जरूर पूरी होती है. अगर कोई व्यक्ति मन में श्रद्धा लेकर आता है तो उसकी परेशानी दूर हो जाती है. कुछ लोग बताते हैं कि कठिन समय में देवी ने उन्हें सहारा दिया. कई भक्त यहां नारियल और चुनरी चढ़ाते हैं. कुछ लोग प्रसाद बांटते हैं और भजन गाते हैं. नवरात्रि के दिनों में यहां विशेष पूजा होती है. इन दिनों मंदिर में सुबह से रात तक भक्तों की लंबी लाइन लगती है ढोल नगाड़ों की आवाज से पूरा इलाका गूंज उठता है. पंचकुइयां मंदिर का नाम उन पांच कुओं के कारण पड़ा जो आज भी मौजूद है, लोग मानते हैं कि उन कुओं का पानी बहुत पवित्र था और उससे स्नान करने से मन शुद्ध होता था. आज भले ही समय बदल गया हो लेकिन उस आस्था में कोई कमी नहीं आई. मंदिर का निर्माण साधारण पत्थरों से हुआ है. लेकिन भक्तों के लिए यह स्थान बहुत खास है. यहां आने पर लोगों को शांति मिलती है, गांव की महिलाएं हर त्योहार पर यहां दीप जलाती हैं. परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं. आज भी बुंदेलखंड के कई जिलों से लोग पंचकुइयां देवी के दर्शन करने आते हैं. बच्चे अपने माता पिता के साथ यहां पहली बार सिर झुकाते हैं और बड़े होने पर भी इस परंपरा को निभाते हैं. यही कारण है कि पंचकुइयां देवी को बुंदेलखंड की कुलदेवी कहा जाता है. यह मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं बल्कि लोगों की आस्था का प्रतीक है. यहां आकर हर व्यक्ति खुद को देवी की छत्र छाया में सुरक्षित महसूस करता है और यही विश्वास इस मंदिर को खास बनाता है.
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