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Madhumalti Plant Care Tips February March: मधुमालती की बेल को गर्मियों में फूलों से भरने के लिए फरवरी-मार्च में रिपॉटिंग, प्रूनिंग और खाद देना जरूरी है. सही धूप और पानी के प्रबंधन से यह पौधा पूरी गर्मियों में आपके घर की सुंदरता और खुशबू बढ़ाता रहेगा.
घर की बाउंड्री वॉल, गेट या बालकनी की सुंदरता बढ़ाने वाली मधुमालती (Rangoon Creeper) की बेल इन दिनों बागवानी प्रेमियों के बीच विशेष चर्चा का विषय बनी हुई है. गर्मियों के मौसम में यह बेल सफेद, गुलाबी और गहरे लाल रंग के गुच्छेदार फूलों से पूरी तरह लद जाती है, जो देखने में अत्यंत आकर्षक लगते हैं. बागवानी विशेषज्ञों का परामर्श है कि यदि फरवरी और मार्च के महीनों में इस बेल की सही ढंग से छंटाई और पोषण संबंधी देखभाल कर ली जाए, तो यह पूरी गर्मियों में निरंतर और भारी मात्रा में फूल देती रहती है.
मधुमालती की बेल से बेहतर परिणाम पाने के लिए सबसे पहला और महत्वपूर्ण कार्य है ‘रिपॉटिंग’. यदि आपका पौधा पिछले 2-3 वर्षों से एक ही गमले में लगा हुआ है, तो उसकी जड़ें अंदर ही अंदर पूरी तरह फैलकर ‘रूट-बाउंड’ हो जाती हैं. इस स्थिति में पौधे का विकास रुक जाता है और फूलों की संख्या में भी भारी कमी आने लगती है. फरवरी और मार्च का समय रिपॉटिंग के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है. इस दौरान पौधे को गमले से सावधानीपूर्वक बाहर निकालकर उसकी जड़ों की हल्की ट्रिमिंग (छंटाई) करनी चाहिए और फिर उसे नई, उपजाऊ मिट्टी में दोबारा लगाना चाहिए.
मधुमालती के लिए आदर्श मिट्टी तैयार करते समय 50 प्रतिशत गार्डन सॉइल, 30 प्रतिशत कंपोस्ट और 20 प्रतिशत रेत या कोकोपीट का मिश्रण सबसे प्रभावी माना जाता है. यह मिश्रण न केवल जड़ों को पर्याप्त पोषण देता है, बल्कि जल निकासी (Drainage) को भी बेहतर बनाता है. ताजी और हवादार मिट्टी मिलने से जड़ों को फैलने के लिए पर्याप्त स्थान मिलता है, जिससे पौधा तेजी से नई शाखाएं विकसित करने लगता है. बागवानी विशेषज्ञों का सुझाव है कि रिपॉटिंग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पौधे को तुरंत तेज धूप में न रखें; इसे कुछ दिनों के लिए हल्की छांव में रखना चाहिए ताकि वह नई मिट्टी में अपनी जड़ों को स्थापित कर सके और रिकवरी कर सके.
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मधुमालती की बेल में प्रूनिंग यानी कटाई-छंटाई करना अगला सबसे महत्वपूर्ण चरण है. चूंकि इस बेल में फूल हमेशा नई टहनियों पर ही आते हैं, इसलिए फरवरी के अंत या मार्च की शुरुआत में हल्की छंटाई करना बेहद जरूरी होता है. सूखी, कमजोर और ज़रूरत से ज्यादा लंबी हो चुकी बेलों को काट देने से पौधे को नई ‘साइड ब्रांच’ निकालने के लिए प्रोत्साहन मिलता है. पौधे में जितनी अधिक नई शाखाएं बनेंगी, फूलों के गुच्छे भी उतने ही ज्यादा खिलेंगे. हालांकि, विशेषज्ञों का सुझाव है कि छंटाई बहुत ज्यादा गहरी (Hard Pruning) नहीं करनी चाहिए, अन्यथा पौधे को वापस रिकवर होने में समय लग सकता है और वह कमजोर हो सकता है.
सर्दियों के दौरान मधुमालती की बेल सुप्तावस्था (Dormancy) में चली जाती है जिससे इसकी ग्रोथ धीमी पड़ जाती है, लेकिन फरवरी का महीना आते ही यह दोबारा सक्रिय होने लगती है. इस समय पौधे को नई शुरुआत के लिए अतिरिक्त पोषण की सबसे अधिक आवश्यकता होती है. बेहतर परिणाम के लिए गमले की ऊपरी 2–3 इंच मिट्टी हटाकर उसमें गोबर की सड़ी खाद या वर्मीकम्पोस्ट, नीम खली और बोनमील का मिश्रण भरना चाहिए. यह जैविक खाद न केवल जड़ों को मजबूती देती है, बल्कि फूलों की संख्या और उनके रंगों की चमक बढ़ाने में भी सहायक सिद्ध होती है.
धूप और पानी का सही संतुलन मधुमालती की बेल को स्वस्थ रखने का मुख्य आधार है. इस बेल को भरपूर फूल देने के लिए रोजाना कम से कम 5–6 घंटे की सीधी धूप की आवश्यकता होती है, इसलिए इसे घर के ऐसे स्थान पर लगाएं जहां पर्याप्त सूर्य का प्रकाश आता हो. चूंकि यह एक बेल है, इसे ऊपर चढ़ने के लिए किसी मजबूत जाली, गेट या दीवार के सहारे की जरूरत होती है ताकि यह सही दिशा में फैल सके और फूलों का भार संभाल सके. पानी देते समय सावधानी बरतें; गमले में पानी तभी डालें जब ऊपर की 1 इंच मिट्टी सूखी महसूस हो. गमले में लगातार पानी खड़ा रहने से जड़ें सड़ सकती हैं, जिससे पौधा सूखने का खतरा रहता है.
बागवानी जानकारों का यह स्पष्ट मत है कि यदि फरवरी-मार्च के इस महत्वपूर्ण समय में रिपॉटिंग, प्रूनिंग और सही पोषण जैसे ये तीन काम कर लिए जाएं, तो आने वाली गर्मियों में मधुमालती की बेल पूरी तरह से फूलों से ढक जाएगी. सही और समयबद्ध देखभाल के साथ यह पौधा न केवल आपके घर की बाहरी दीवार और बालकनी की सुंदरता में चार चांद लगाता है, बल्कि इसकी धीमी खुशबू पूरे वातावरण को खुशनुमा और ताजगी से भरपूर बना देती है.


