Mogra Flowering Tips: गर्मियों की हल्की सुबह हो और घर के आंगन या बालकनी में मोगरे की खुशबू तैर रही हो-यह दृश्य और एहसास किसी भी घर को सुकून से भर देता है, लेकिन सच यह भी है कि बहुत से लोग शिकायत करते हैं कि उनका मोगरा हरा-भरा तो दिखता है, पर फूल नहीं देता. पत्तियां खूब निकलती हैं, मगर कलियां गायब रहती हैं. ऐसे में लोग महंगी खाद, नर्सरी की दवाएं और नए गमले तक बदलकर देख लेते हैं, फिर भी नतीजा निराशाजनक रहता है. गार्डनिंग करने वालों के बीच अब एक बेहद सस्ता और आसान देसी तरीका चर्चा में है-सिर्फ 10 रुपये की फिटकरी और किचन के रोजमर्रा कचरे से तैयार खास घोल. अनुभवी माली बताते हैं कि यह तरीका मिट्टी का स्वभाव बदल देता है, जिससे मोगरा तेजी से कलियां बनाना शुरू कर देता है.
मोगरा क्यों नहीं देता फूल? असली वजह समझिए
ज्यादातर लोगों को लगता है कि मोगरे में फूल न आने का कारण पानी या धूप की कमी है, लेकिन असल कारण अक्सर मिट्टी का pH और पोषण असंतुलन होता है. मोगरा हल्की अम्लीय यानी एसिडिक मिट्टी पसंद करता है. जब गमले की मिट्टी क्षारीय या सख्त हो जाती है, तो पौधा सिर्फ पत्तियां बनाता रहता है. यही वजह है कि देखने में स्वस्थ पौधा भी फूल देने में कमजोर पड़ जाता है.
फिटकरी का घोल: मिट्टी का स्वभाव बदलने का आसान तरीका
माली बताते हैं कि फिटकरी मिट्टी की क्षारीयता कम करके उसे हल्का अम्लीय बनाती है. इसका तरीका बेहद सरल है-एक मग साफ पानी लें और उसमें फिटकरी का छोटा टुकड़ा डालकर 4-5 बार घुमाएं. फिटकरी को पूरी तरह घोलना नहीं है, बस उसका हल्का अंश पानी में मिलना चाहिए. यही हल्का घोल मिट्टी के लवणीयपन को कम करता है और जड़ों को सक्रिय बनाता है.
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नींबू के छिलके: प्राकृतिक एसिड बूस्टर
नींबू के छिलकों में मौजूद सिट्रिक एसिड मिट्टी को और अधिक अम्लीय बनाता है. जब इन्हें फिटकरी वाले पानी में मिलाया जाता है, तो मिश्रण फूल बनने की प्रक्रिया को तेज करता है. माली कहते हैं कि इससे कलियों की संख्या में साफ बढ़ोतरी दिखती है.
इस्तेमाल की चायपत्ती: हरा-भरा विकास
धोकर सुखाई गई चायपत्ती में नाइट्रोजन भरपूर होता है. एक चम्मच चायपत्ती इस घोल में मिलाने से पौधे की नई टहनियां निकलती हैं और पत्तियां गहरी हरी बनती हैं. स्वस्थ पत्तियां ही आगे चलकर ज्यादा फूलों का आधार बनती हैं.
प्याज के छिलके: बड़े और खुशबूदार फूल
सूखे प्याज छिलकों का चूरा पोटैशियम और सल्फर देता है. ये दोनों तत्व सीधे फूलों के आकार, रंग और खुशबू पर असर डालते हैं. नियमित इस्तेमाल से कलियां गिरना भी कम हो जाता है.
खाद डालने से पहले मिट्टी की तैयारी क्यों जरूरी
अक्सर लोग सीधे खाद डाल देते हैं, जबकि माली कहते हैं कि यह सबसे बड़ी गलती है. पहले गमले की मिट्टी हल्के हाथ से खोदकर ढीली करनी चाहिए. इससे जड़ों तक हवा पहुंचती है और पोषक घोल तेजी से अवशोषित होता है. सख्त मिट्टी में डाली खाद अक्सर सतह पर ही रह जाती है.
सही समय और तरीका: असर दोगुना करने का नियम
इस देसी फर्टिलाइजर का असर तभी दिखता है जब इसे सूखी मिट्टी में डाला जाए. गीली मिट्टी में डालने से पोषक तत्व फैल जाते हैं और जड़ों तक सही मात्रा में नहीं पहुंचते. घोल डालने के बाद मोगरे को भरपूर धूप में रखना भी जरूरी है, क्योंकि यह धूप-प्रिय पौधा है. माली सलाह देते हैं कि हर 15 दिन में यह मिश्रण देने से गमला फूलों से भर सकता है.
असली अनुभव: गार्डनिंग शौकीनों ने क्या देखा
घर पर बागवानी करने वालों का कहना है कि इस घोल के इस्तेमाल के 3-4 हफ्तों में मोगरे में नई कलियां दिखने लगती हैं. कई लोगों ने बताया कि जो पौधा महीनों से नहीं खिला था, उसमें भी छोटे-छोटे फूल आने लगे. खास बात यह कि पत्तियां भी ज्यादा चमकदार और घनी दिखती हैं, जिससे पूरा पौधा स्वस्थ नजर आता है.
मोगरे में फूल न आना अक्सर देखभाल की कमी नहीं, बल्कि मिट्टी के स्वभाव की समस्या होती है. 10 रुपये की फिटकरी और किचन के साधारण अवशेषों से बना यह देसी घोल मिट्टी का संतुलन सुधारकर पौधे को फूल देने के लिए प्रेरित करता है. सही तरीके और नियमितता से इस्तेमाल किया जाए तो साधारण गमला भी खुशबूदार मोगरे से भर सकता है.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)


