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Barmer Panna Ram Success Story: बाड़मेर के पारंपरिक बाजरा लड्डू को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मन की बात में सराहे जाने के बाद स्थानीय किसानों में उत्साह की लहर है. रेगिस्तान की कठिन परिस्थितियों में उगने वाला बाजरा अब आत्मनिर्भरता और परंपरा का प्रतीक बन गया है. रामसर ऑर्गेनिक प्रोड्यूसर कम्पनी लिमिटेड से जुड़े 902 किसान बाजरे के लड्डू तैयार कर रहे हैं. प्रधानमंत्री की तारीफ के बाद बाजरा उत्पादों की मांग बढ़ी है, जिससे किसानों को बेहतर दाम और नई पहचान मिल रही है.
बाड़मेर. रेगिस्तान की तपती धरती पर उगा बाड़मेर का बाजरा अब देश के सबसे बड़े मंच तक पहुंच गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मन की बात में जब बाड़मेर के बाजरा लड्डू का जिक्र किया तो यहां के किसानों की मेहनत, परंपरा और आत्मसम्मान की पहचान भी देशभर में गूंज उठी. पीएम की इस तारीफ ने किसान का सीना चौड़ा कर दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में बाड़मेर के पारंपरिक बाजरा लड्डू की सराहना किए जाने के बाद यह देसी स्वाद अचानक राष्ट्रीय चर्चा में आ गया है.
रेगिस्तान की कठिन परिस्थितियों में उगने वाला बाजरा अब सिर्फ मोटा अनाज नहीं बल्कि किसानों की मेहनत, आत्मनिर्भरता और स्थानीय संस्कृति का प्रतीक बन गया है. रामसर ऑर्गेनिक प्रोड्यूसर कम्पनी लिमिटेड के निदेशक पन्नाराम चौधरी ने 902 किसानों को जोड़कर यह कम्पनी बनाई है जो बाजरा के लड्डू बनाती है.
किसान बोले- बाजरा की अब हुई असली कद्र
पीएम मोदी द्वारा बाड़मेर में बाजरे से बनने वाले लड्डू का जिक्र किए जाने से बाड़मेर के किसानों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है. खडीन के किसान पन्नाराम चौधरी का कहना है कि वर्षों से वे बाजरे की खेती करते आ रहे थे, लेकिन इसकी असली कद्र अब जाकर हुई है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ ने उन्हें फिर से जिंदा कर दिया है. वे बताते है कि अब बाजरे के लड्डू की वैश्विक स्तर भी डिमांड बढ़ गई है.
कम पानी व आसानी से उगता है बाजरा
कम पानी में तैयार होने वाला यह अनाज न सिर्फ किसानों की आजीविका का आधार है बल्कि सेहत के लिहाज से भी बेहद फायदेमंद माना जाता है. बाजरे से बने लड्डू अब ग्रामीण घरों तक सीमित नहीं रहे है बल्कि शुद्धता और पोषण के कारण शहरों और बड़े बाजारों में भी अपनी जगह बना रहे हैं.
अब लड्डुओं के साथ साथ खाखरा, स्नैक्स की भी तैयारी
किसान झीमो देवी के मुताबिक प्रधानमंत्री की सराहना के बाद बाजरा उत्पादों की मांग बढ़ेगी, जिससे उन्हें बेहतर दाम मिल सकेंगे. वे बताती हैं कि इससे युवाओं को भी पारंपरिक खेती और स्थानीय उत्पादों से जुड़ने की प्रेरणा मिलेगी. कई किसान अब बाजरे से जुड़े अन्य उत्पाद जैसे आटा, खाखरा और स्नैक्स बनाने की योजना भी बना रहे हैं.
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दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से News18 हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें


