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Wheat Flour Bhature Recipe: गेहूं के आटे, सूजी और दही के मिश्रण से बिना मैदा के भी फूले-फूले भटूरे बनाए जा सकते हैं. सही गूंथने और तलने की तकनीक अपनाने पर स्वाद और टेक्सचर लगभग बाजार जैसे ही मिलते हैं.
बिना मैदा के गेहूं के आटे से फूले-फूले भटूरे बनाने का आसान तरीका
Wheat Flour Bhature Recipe: “भटूरे खाने हैं, लेकिन मैदा नहीं”-आजकल कई घरों में यही दुविधा सुनने को मिलती है. स्वाद और सेहत के बीच फंसे लोग अक्सर भटूरे से दूरी बना लेते हैं, लेकिन अब सोशल मीडिया पर एक ऐसा तरीका वायरल हो रहा है, जिसने इस सोच को बदल दिया है. होम कुक रश्मि कौशिक ने दिखाया कि गेहूं के आटे से भी वही गुब्बारे जैसे फूले भटूरे बन सकते हैं, जिन्हें देखकर किसी को फर्क ही न लगे. खास बात यह है कि इसमें मैदा की चुटकी भर भी जरूरत नहीं पड़ती. इस आसान रेसिपी में दही, सूजी और सही गूंथने की तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है. जो लोग मैदा से बचते हैं या हल्का विकल्प चाहते हैं, उनके लिए यह तरीका तेजी से लोकप्रिय हो रहा है.
बिना मैदा के भटूरे का ट्रेंड क्यों बढ़ रहा है
घर के खाने को थोड़ा हेल्दी बनाने की कोशिश अब हर किचन में दिखती है. पहले जहां भटूरे का मतलब मैदा माना जाता था, वहीं अब लोग गेहूं के आटे वाले विकल्प खोज रहे हैं. वजह साफ है-मैदा से बने खाने को भारी और कम पौष्टिक माना जाता है. खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए कई परिवार इसे सीमित रखते हैं. ऐसे में गेहूं के आटे से बना भटूरा लोगों को स्वाद भी देता है और मन को संतोष भी कि खाना थोड़ा हल्का है. रश्मि कौशिक का तरीका इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसमें कोई जटिल सामग्री नहीं, बल्कि वही चीजें हैं जो हर घर में आसानी से मिल जाती हैं.
दही और सूजी से तैयार होता है बेस
खमीर जैसा असर देता है दही-सोडा मिश्रण
इस रेसिपी की शुरुआत दही से होती है. हल्का ताजा दही लेकर उसमें थोड़ा नमक, चीनी और बेकिंग सोडा मिलाया जाता है. यह मिश्रण भटूरे के आटे में हल्की फर्मेंटेशन जैसा असर लाता है. यही वजह है कि गेहूं का आटा भी तलने पर फूला हुआ दिखता है.
सूजी देती है कुरकुरापन
दही के मिश्रण में बारीक सूजी मिलाकर उसे कुछ मिनट छोड़ दिया जाता है. सूजी पानी सोखकर फूलती है और बाद में भटूरे को हल्का क्रिस्पी टेक्सचर देती है. यही वह छोटा सा बदलाव है, जिससे बिना मैदा के भटूरे सख्त नहीं लगते.
गेहूं के आटे को लचीला बनाने की तकनीक
पटक-पटक कर गूंथना क्यों जरूरी
गेहूं के आटे से भटूरे बनाने में सबसे बड़ी चुनौती उसका कम लचीलापन होता है. रश्मि कौशिक बताती हैं कि आटा गूंथने के बाद उसे बार-बार परात या काउंटर पर पटकना चाहिए. इससे आटे में मौजूद ग्लूटेन सक्रिय होता है और वह मैदा जैसा स्ट्रेची बन जाता है. यह वही तकनीक है, जो कई हलवाई इस्तेमाल करते हैं. फर्क सिर्फ इतना है कि यहां मैदा की जगह गेहूं का आटा होता है.
थोड़ा आराम देना भी जरूरी
गूंथे आटे को तुरंत बेलने के बजाय गीले कपड़े से ढककर कुछ देर रखा जाता है. इससे आटा सेट हो जाता है और लोई बनाते समय दरार नहीं आती. यह छोटा सा स्टेप भटूरों के फुलने में बड़ा फर्क डालता है.
तलने की सही प्रक्रिया से मिलती है असली फुलावट
भटूरे की लोई सामान्य तरीके से बेलकर गर्म तेल में डाली जाती है. तेल का तापमान यहां अहम होता है-कम गर्म तेल में भटूरे फूलते नहीं. जैसे ही लोई तेल में जाती है, हल्का दबाव देने से वह गुब्बारे की तरह फूल जाती है. घर पर ट्राय करने वाले कई लोगों का अनुभव भी यही रहा कि गेहूं के आटे वाले भटूरे दिखने और खाने में लगभग वही लगते हैं, जो मैदा से बनते हैं.
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