Success Story Organic Farmer | Nurse Became Organic Kisan | Corona Pandemic Inspiration Story

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Success Story: कोरोना काल के कठिन दौर ने एक नर्सिंगकर्मी की जिंदगी बदल दी. अस्पताल में लगातार तनाव और हालातों से जूझने के बाद उन्होंने नई राह चुनने का फैसला किया. नौकरी छोड़कर ऑर्गेनिक खेती की शुरुआत की और प्राकृतिक तरीके से फसल उगानी शुरू की. शुरुआती चुनौतियों के बावजूद मेहनत और लगन से आज वे एक सफल ऑर्गेनिक किसान बन चुके हैं. उनकी यह यात्रा न केवल आत्मनिर्भरता की मिसाल है, बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन गई है.

पाली. जिंदगी कब, कौन सा मोड़ ले ले, कोई नहीं जानता. पाली के फालना में एक नर्सिंगकर्मी की कहानी कुछ ऐसी ही है. कभी अस्पताल की दीवारों के बीच मरीजों की सेवा करने वाले रामकिशोर आज खेतों में पसीना बहाकर ‘सेहत’ उगा रहे हैं. कोरोना काल में अपने आंखों के सामने डॉक्टर दंपती को दम तोड़ते देख रामकिशोर का मन ऐसा बदला कि उन्होंने इंजेक्शन छोड़ हल थाम लिया. आज वे फालना के पहले ऐसे किसान बन गए हैं जो ‘काले गेहूं’ की ऑर्गेनिक खेती कर लाखों की कमाई कर रहे हैं. रामकिशोर फालना के प्रसिद्ध व्यास हॉस्पिटल में नर्सिंगकर्मी के तौर पर कार्यरत थे. कोरोना की दूसरी लहर के दौरान अस्पताल के संचालक डॉ. व्यास और उनकी पत्नी की संक्रमण से मौत हो गई.

इस घटना ने रामकिशोर को भीतर तक झकझोर दिया. अस्पताल बंद हुआ तो उन्होंने तय किया कि अब वे बीमारियों के इलाज के बजाय ऐसी खेती करेंगे जो लोगों की इम्यूनिटी बढ़ाए. इसी संकल्प के साथ उन्होंने फालना के खुडाला गांव में 12 बीघा जमीन खरीदी और खेती की शुरुआत की और आज लाखो रूपए भी कमा रहे है.

दोस्त की सलाह और किया ऐसा नवाचार 
खेती की शुरुआत में रामकिशोर की मुलाकात प्रगतिशील किसान राकेश ठकराल से हुई. राकेश ने उन्हें पारंपरिक खेती के बजाय कुछ नया करने का सुझाव दिया. राकेश की मदद से रामकिशोर ने महाराष्ट्र से 96 रुपये प्रति किलो के भाव पर 101 किलो काले गेहूं का बीज मंगवाया. रबी के सीजन में उन्होंने 5 बीघा में इसकी बुआई की. उसी शुरूआत के बाद आज यह किसान अच्छी खेती कर न केवल अच्छा मुनाफा भी कमा रहे है बल्कि लोगो के सेहत का भी ध्यान रख रहे है.

पूरी तरह ऑर्गेनिक: ‘हम जहर क्यों खिलाएं?
नर्सिंग बैकग्राउंड होने के कारण रामकिशोर सेहत के प्रति बेहद सजग हैं. उन्होंने अपने खेत में डीएपी या यूरिया जैसे रसायनों का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं किया. वे बताते हैं, “मैं खुद मेडिकल लाइन से हूं, इसलिए जानता हूं कि केमिकल सेहत के लिए कितने घातक हैं. मैंने सिर्फ गाय के गोबर की खाद का उपयोग किया है. मेरी फसल पूरी तरह ऑर्गेनिक है, चाहे कोई लैब में टेस्ट करा ले.

बंपर मुनाफा: खेत पर ही लग रही खरीदारों की लाइन
काले गेहूं की खासियत यह है कि इसमें ‘एंथ्रोसाइनिन’ पिगमेंट होता है, जो इसे कैंसर, डायबिटीज और मोटापे जैसी बीमारियों से लड़ने में मददगार बनाता है. यही कारण है कि अभी फसल कटी भी नहीं है और खरीदार 8,000 रुपये प्रति क्विंटल का एडवांस भाव देने को तैयार हैं. आम गेहूं के मुकाबले इसकी कीमत तीन से चार गुना ज्यादा मिल रही है.

पूरा परिवार मेडिकल फील्ड से 
रामकिशोर व्यास किसान है मगर उनका पूरा परिवार मेडिकल फील्ड से ही जुडा हुआ है. उनकी पत्नी भतेरी देवी नर्स हैं, बेटा सौरभ एमबीबीएस कर चुका है और बेटी निकिता अजमेर में डॉक्टर हैं. इसके बावजूद रामकिशोर का मिट्टी से मोह कम नहीं हुआ. वे रोजाना आने वाले दर्जनों किसानों को काले गेहूं और जैविक खेती के गुण सिखा रहे हैं.

खेती से बचपन से रहा है रामकिशोर का जुडाव 
रामकिशोर ने बताया- जब मैं 10वीं-12वीं क्लास में था, तब मेरे माता-पिता हरियाणा के रेवाड़ी में खेती-बाड़ी करते थे. मैं पिता की मदद किया करता था. उसके बाद नौकरी करने लगा और माता-पिता परिवार समेत अलवर आकर शिफ्ट हो गए. अब मैं फालना (पाली) में पूरी तरह खुद खेती कर रहा हूं.

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Jagriti Dubey

With more than 6 years above of experience in Digital Media Journalism. Currently I am working as a Content Editor at News 18 in Rajasthan Team. Here, I am covering lifestyle, health, beauty, fashion, religion…और पढ़ें



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