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भारतीय सिनेमा सिर्फ बॉलीवुड की चकाचौंध तक सीमित नहीं रह गया है. पिछले कुछ सालों में क्षेत्रीय भाषाओं में बनी कई फिल्मों ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का नाम रोशन किया है. BAFTA, कान्स, वेनिस और ऑस्कर जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार समारोहों में भारतीय फिल्मों ने अपनी स्टोरीटेलिंग और संवेदनशीलता से दुनिया को प्रभावित किया है. आइए जानते हैं उन 7 फिल्मों के बारे में जिन्होंने विदेशों में खूब वाहवाही बटोरी…
बूंग (Boong): लक्ष्मीप्रिया देवी के निर्देशन में बनी मणिपुरी फिल्म ‘बूंग’ ने हाल ही में BAFTA अवॉर्ड्स 2026 में बेस्ट चिल्ड्रन एंड फैमिली फिल्म का पुरस्कार जीतकर इतिहास रच दिया. फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी के एक्सेल एंटरटेनमेंट द्वारा प्रोड्यूस इस फिल्म में एक छोटे लड़के की कहानी है, जो अपने पिता की तलाश में निकलता है. फिल्म मणिपुर में जातीय तनाव और सीमा की चुनौतियों को एक बच्चे के नजरिए से दिखाती है.
होमबाउंड (Homebound): नीरज घायवान द्वारा निर्देशित यह फिल्म इशान खट्टर, विशाल जेठवा और जान्हवी कपूर अभिनीत है. मार्टिन स्कॉर्सेसी एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर हैं. यह बचपन के दो दोस्तों (मुस्लिम और दलित समुदाय से) की दोस्ती, साहस और जाति राजनीति की कहानी है. यह भारत की आधिकारिक एंट्री थी 98वें ऑस्कर के लिए बेस्ट इंटरनेशनल फीचर में, शॉर्टलिस्ट हुई लेकिन नामांकन नहीं मिला. ये धर्मा प्रोडक्शंस द्वारा निर्मित है.
ऑल वी इमेजिन ऐज लाइट (All We Imagine As Light): पायल कपाड़िया की यह फिल्म 2024 कैन फिल्म फेस्टिवल में ग्रैंड प्रिक्स जीती. कानी कुश्रुति और दिव्या प्रभा अभिनीत, यह मुंबई की दो नर्सों की भावनात्मक यात्रा दिखाती है. गोल्डन ग्लोब में दो नामांकन (बेस्ट नॉन-इंग्लिश फिल्म और बेस्ट डायरेक्टर), गोथम अवॉर्ड्स, NYFCC, LA, शिकागो आदि से बेस्ट इंटरनेशनल फीचर अवॉर्ड्स जीते. बाराक ओबामा ने इसे 2024 की टॉप फिल्म चुना था.
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मसान (Masaan): नीरज घायवान की डेब्यू फिल्म वाराणसी में दो कहानियां देवी (रिचा चड्ढा) और दीपक (विक्की कौशल) की सामाजिक दबाव और मुक्ति की खोज है. 2015 के कान्स फिल्म फेस्टिवल में दो पुरस्कार जीते , जिसमें FIPRESCI अवॉर्ड और प्रॉमिसिंग फ्यूचर प्राइज था. वाराणसी की पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म में ऋचा चड्ढा और विक्की कौशल ने यादगार अभिनय किया. विक्की कौशल की किस्मत इसी फिल्म से चमकी थी.
ऑल दैट ब्रीद्स (All That Breathes): शौनक सेन द्वारा निर्देशित यह डॉक्यूमेंट्री 2023 में ऑस्कर के लिए नॉमिनेट हुई थी . 90 मिनट की यह फिल्म दिल्ली के वजीराबाद में दो भाइयों की कहानी है, जो घायल काली चीलों को बचाते हैं. फिल्म ने कान्स में गोल्डन आई अवॉर्ड और सनडांस में वर्ल्ड सिनेमा ग्रां जूरी प्राइज समेत 17 अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार जीते. इसे 2023 ऑस्कर में बेस्ट डॉक्यूमेंट्री फीचर नामांकन भी मिला.
कोर्ट (Court): चैतन्य ताम्हने की ही एक और फिल्म ‘कोर्ट’ ने 2014 के वेनिस फिल्म फेस्टिवल में दो पुरस्कार जीते- लायन ऑफ द फ्यूचर अवॉर्ड और ओरिजोंटी कैटेगरी में बेस्ट फिल्म. यह फिल्म भारतीय कानून व्यवस्था की विसंगतियों पर करारा व्यंग्य है, जिसमें एक लोक गायक पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगता है.
पर्च्ड (Parched): लीना यादव द्वारा निर्देशित ‘पार्च्ड’ ग्रामीण भारत में महिलाओं के दमन और उनके प्रतिरोध की कहानी कहती है. फिल्म को दुनिया भर में पसंद किया गया. इस फिल्म ने 18 अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार जीते. तनिष्ठा चटर्जी, राधिका आप्टे और सुरवीन चावला अभिनीत इस फिल्म ने ग्रामीण भारत की उन महिलाओं की कहानी बयां की जो पितृसत्ता से लड़कर आजादी की राह तलाशती हैं.
द डिसाइपल (The Disciple): चैतन्य ताम्हाणे द्वारा निर्देशित यह मराठी फिल्म हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की दुनिया पर आधारित है. फिल्म को वेनिस फिल्म फेस्टिवल में FIPRESCI अवॉर्ड मिला . अल्फोन्सो क्वारॉन (हॉलीवुड के मशहूर निर्देशक) इसके एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर थे. फिल्म एक संगीत साधक की कलात्मक पूर्णता की तलाश और आधुनिक दुनिया से टकराव की कहानी है.


