दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला ब्लास्ट केस और ‘व्हाइट कॉलर टेररिज्म’ मॉड्यूल की जांच में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है. बुधवार को पटियाला हाउस स्थित NIA की विशेष अदालत में दो संदिग्धों तुफैल अहमद भट्ट और जमीर अहमद अहंगर को पेश किया गया, जिनकी गिरफ्तारी ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं. NIA सूत्रों के मुताबिक, इन दोनों आरोपियों का सीधा संबंध लाल किला ब्लास्ट की साजिश और आतंकवाद के उस नेटवर्क से है जो समाज के बीच छिपकर व्हाइट कॉलर अपराधियों की तरह काम कर रहा था. तुफैल अहमद भट्ट पेशे से एक एसी (AC) टेक्नीशियन है. उस पर आरोप है कि उसने आतंकी गतिविधियों के लिए हथियारों की सप्लाई की थी. जांच में सामने आया है कि तुफैल ही वह शख्स है जिसने वह घातक AK-47 राइफल मुहैया कराई थी जो पहले अनंतनाग के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (GMC) में एक डॉक्टर के लॉकर से बरामद हुई थी. यह गिरफ्तारी न केवल पुराने केस की कड़ियों को जोड़ती है बल्कि कश्मीर से दिल्ली तक फैले आतंक के उस अंडरग्राउंड इकोसिस्टम को भी बेनकाब करती है जो तकनीकी पेशों की आड़ में देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम दे रहा था.
एनआईए ने कोर्ट को क्या बताया?
पटियाला हाउस स्थित विशेष अदालत में NIA ने रिमांड नोट के जरिए दिल्ली रेड फोर्ट ब्लास्ट केस में गिरफ्तार तुफैल अहमद भट्ट और जमीर अहमद अहंगर को लेकर चौंकाने वाले दावे किए हैं. जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि ये दोनों आरोपी प्रतिबंधित आतंकी संगठन ‘अंसार गजवत-उल-हिंद’ के सक्रिय ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) के रूप में काम कर रहे थे. NIA के मुताबिक यह महज एक ब्लास्ट केस नहीं है बल्कि एक गहरी आतंकी साजिश का हिस्सा है.
रिमांड नोट के मुख्य प्वाइंट
· मौत के सामान की डिलीवरी: एनआईए ने कोर्ट को बताया कि मारे गए आतंकियों उमर नबी, आदिल राथर और मुफ्ती ने अहमद अहंगर को सुरक्षित रखने और हमलों को अंजाम देने के लिए एक क्रिंकोव राइफल, एक पिस्टल और भारी मात्रा में जिंदा कारतूस उपलब्ध कराए थे.
· हथियारों की साजिश: तुफैल अहमद भट्ट पर आरोप है कि उसने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने और आतंकी गतिविधियों के लिए अत्याधुनिक हथियार और गोला-बारूद जुटाने की आपराधिक साजिश रची.
· 10 दिन की रिमांड: एनआईए की दलीलों को गंभीरता से लेते हुए अदालत ने दोनों आरोपियों को 10 दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड पर भेज दिया है. अब एजेंसी इनसे इस पूरे मॉड्यूल के अन्य स्लीपर सेल्स के बारे में पूछताछ करेगी.
कौन हैं तुफैल और जमीर?
NIA और SIA (स्टेट इंवेस्टिगेशन एजेंसी) की संयुक्त जांच में इन दोनों के नाम प्रमुखता से उभरे हैं. तुफैल अहमद भट्ट श्रीनगर के दियारवानी बटमालू इलाके का रहने वाला है. वह एक कुशल एसी टेक्नीशियन है लेकिन जांच एजेंसियों का दावा है कि उसकी असली विशेषज्ञता आतंक के लिए लॉजिस्टिक्स और हथियार जुटाने में थी.
मुख्य खुलासे
· AK-47 का प्रोवाइडर: तुफैल पर शक है कि वह आतंकी मॉड्यूल के लिए हथियारों का मुख्य स्रोत था. अनंतनाग GMC के डॉक्टर अदील अहमद के लॉकर से मिली राइफल का कनेक्शन सीधे तुफैल से जुड़ रहा है.
· व्हाइट कॉलर टेररिज्म: जमीर अहमद अहंगर और तुफैल अहमद को ‘व्हाइट कॉलर टेररिस्ट’ माना जा रहा है. ये लोग आम नागरिकों की तरह जीवन जीते हैं ताकि सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बच सकें.
· पुरानी गिरफ्तारी: सूत्रों के अनुसार, इन आरोपियों को पिछले साल दिसंबर में श्रीनगर और गंदेरबल में की गई छापेमारी के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस ने भी हिरासत में लिया था. अब NIA इन्हें दिल्ली लाकर गहराई से पूछताछ कर रही है.
सवाल-जवाब
लाल किला ब्लास्ट केस में गिरफ्तार तुफैल अहमद भट्ट और जमीर अहमद की किस कोर्ट में पेश किया गया?
इन दोनों आरोपियों को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट स्थित NIA की विशेष अदालत में पेश किया गया है, जहां एजेंसी उनकी कस्टडी की मांग कर रही है.
डॉक्टर के लॉकर से मिली AK-47 का लाल किला ब्लास्ट केस में से क्या संबंध है?
जांच में पाया गया कि अनंतनाग के GMC अस्पताल में डॉ. अदील अहमद के लॉकर से जो राइफल मिली थी, उसका संभावित सप्लायर तुफैल अहमद भट्ट ही था.
लाल किला ब्लास्ट केस से जुड़ा व्हाइट कॉलर टेररिज्म मॉड्यूल क्या है?
यह उन लोगों का समूह है जो डॉक्टर, इंजीनियर या टेक्नीशियन जैसे सम्मानित पेशों में रहकर गुपचुप तरीके से आतंकी संगठनों की मदद करते हैं.


