1972 की टॉप 5 फिल्में, बॉक्स ऑफिस की रही धुरंधर, धर्मेंद्र-हेमा मालिनी के लिए खूब बजी थी तालियां

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बॉलीवुड का साल 1972 सिनेमा प्रेमियों के लिए किसी सुनहरे दौर से कम नहीं था. इस साल ऐसी फिल्में रिलीज हुईं जिन्होंने न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाया, बल्कि आने वाले दशकों के लिए अपनी अमिट छाप भी छोड़ी. मीना कुमारी की आखिरी फिल्म ‘पाकीजा’ से लेकर राजेश खन्ना की सुपरहिट ‘अमर प्रेम’ और ‘दुश्मन’ तक पांच फिल्मों ने दर्शकों को सिनेमाघरों से बांधे रखा. कौन सी थीं वो फिल्में जो बॉक्स ऑफिस पर धुरंधर रहीं. चलिए बताते हैं…

नई दिल्ली. 1970 के दशक की शुरुआत में बॉलीवुड ने कई क्लासिक फिल्में दीं और 1972 का साल खास रहा. इस साल रिलीज हुईं टॉप 5 फिल्में ‘पाकीजा’, ‘सीता और गीता’, ‘दुश्मन’, ‘अमर प्रेम’ और ‘राजा जानी’ रहीं, जिन्होंने न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाया, बल्कि दर्शकों के दिलों में गहरी छाप छोड़ी. इन फिल्मों में धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की जोड़ी ने खासकर ‘सीता और गीता’ और ‘राजा जानी’ में तालियां बटोरीं, जबकि राजेश खन्ना की स्टारडम ‘दुश्मन’ और ‘अमर प्रेम’ में चमकी. आइए जानते हैं इनकी कहानियां और बॉक्स ऑफिस कलेक्शन…

4 फरवरी 1972 को रिलीज हुई फिल्म ‘पाकीजा’ कमाल खान द्वारा निर्देशित है. इस फिल्म में मीना कुमारी, राज कुमार और अशोक कुमार नजर आए. ‘पाकीजा’ लखनऊ की एक तवायफ साहिबजान (मीना कुमारी) की कहानी है, जो अपनी मां नर्गिस की तरह वेश्यावृत्ति के चक्र से निकलना चाहती है. ट्रेन में सफर के दौरान उसे एक अजनबी (राज कुमार) का खत मिलता है, जो उसकी खूबसूरती की तारीफ करता है. दोनों में प्यार होता है, लेकिन साहिबजान का पेशा बाधा बनता है. यह अजनबी बाद में वन विभाग के अधिकारी सलीम के रूप में सामने आता है. फिल्म में मीना कुमारी की डबल रोल, गजलें और संगीत (घुलाम मोहम्मद) ने कमाल किया.

बॉक्स ऑफिस और खास बातें: यह फिल्म अपनी शूटिंग के 15 साल पूरे होने के बाद 4 फरवरी 1972 को रिलीज हुई थी. 12.5 से 15 लाख रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने 6 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया था और यह 1972 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी. मीना कुमारी की फिल्म रिलीज के एक महीने बाद ही मौत हो गई थी, जिससे यह फिल्म उनकी यादगार बन गई .

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24 नवंबर 1972 को रिलीज हुई फिल्म ‘सीता और गीता’ को रमेश सिप्पी ने डायरेक्ट किया. यह कॉमेडी-ड्रामा पिल्म है, जिसमें हेमा मालिनी डबल रोल में नजर आईं. उनके साथ<br />धर्मेंद्र और संजीव कुमार भी फिल्म में लीड हीरो के तौर पर नजर आए. फिल्म की कहानी जुड़वा बहनें सीता और गीता पर है, जो जन्म पर अलग हो जाती हैं. सीता अमीर घर में अपनी क्रूर चाची कौशल्या के साथ गुलाम जैसी जिंदगी जीती है, जबकि गीता गरीब मोहल्ले में सड़क कलाकार बनकर मजबूत व्यक्तित्व वाली बनती है. एक दिन सीता आत्महत्या की कोशिश में भागती है और गीता की जगह ले लेती है, जिससे कॉमेडी ऑफ एरर्स शुरू होती है.य हेमा की डुअल परफॉर्मेंस और धर्मेंद्र के साथ केमिस्ट्री ने दर्शकों को लुभाया. इस फिल्म को सलीम-जावेद की जोड़ी ने लिखा था.

<br />’सीता और गीता’ मात्र 40 लाख रुपये के बजट में बनी थी. इस फिल्म ने भारत में 3.5 करोड़ रुपये और सोवियत संघ में 18.21 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया था. दुनियाभर में फिल्म ने कुल 19.53 करोड़ रुपये का कारोबार किया. हेमा मालिनी को इस फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था.

7 जनवरी 1972 को फिल्म रिलीज हुई, जिसका नाम है ‘दुश्मन’. दुलाल गुहा निर्देशित यह फिल्म राजेश खन्ना, मीना कुमारी और मुमताज स्टारर है. इस फिल्म में राजेश खन्ना ने ट्रक ड्राइवर सुरजीत सिंह का किरदार निभाया. जो शराब पीकर गाड़ी चलाता है और किसान राम दीन की मौत का कारण बनता है. कोर्ट में दोषी ठहराए जाने पर जज उसे जेल की बजाय राम दीन के परिवार (विधवा मालती, बहन कमला, दो बच्चे, अपंग पिता और अंधी मां) की देखभाल की सजा देता है. यह परिवार उसे ‘दुश्मन’ कहता है, लेकिन धीरे-धीरे सुरजीत उनके दिलों में जगह बना लेता है .

यह फिल्म 1972 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में तीसरे नंबर पर शामिल रही. राजेश खन्ना को इस फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ एक्टर के फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामांकन मिला था. फिल्म का गाना ‘वादा तेरा वादा’ और ‘पैसा फेंको तमाशा’ काफी लोकप्रिय हुए थे. करीब 1 करोड़ से ज्यादा के बजट में बनी इस फिल्म ने भारत में 7 करोड़ से ज्यादा और दुनियाभर में कबीब 8.50 करोड़ रुपये कमाए थे.

28 जनवरी 1972 को शक्ति सामंत द्वारा निर्देशित अमर प्रेम रिलीज हुई. यह फिल्म बंगाली फिल्म ‘निशि पद्मा’ की रीमेक थी. इमोशनल ड्रामा फिल्म में राजेश खन्ना, शर्मिला टैगोर और विनोद मेहरा नजर आए. फिल्म में राजेश खन्ना एक बड़े व्यवसायी आनंद बाबू किरदार निभाया था, जो अपनी पत्नी परेशान होते हैं. उधर पति से दुखी होकर शर्मिला टैगोर वेश्या पुष्पा के भूमिका में आ जाती है. अमीर लेकिन अकेला आनंद बाबू (राजेश) उसका नियमित ग्राहक बनता है, लेकिन प्यार हो जाता है. विनोद मेहरा ने फिल्म में नंदू का किरदार निभाया था, जो शर्मिला के पड़ोस का बच्चा है और वह उसे मां की तरह प्यार देती है.

फिल्म के बजट और सटीक कमाई के आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन इसे 1970 के दशक की एक सुपरहिट और बेहद लोकप्रिय फिल्म माना जाता है. फिल्म का संगीत आर.डी. बर्मन ने दिया था और गाने ‘कुछ तो लोग कहेंगे’, ‘चिंगारी कोई भड़के’, ‘रैना बीती जाये’ आज भी याद किए जाते हैं. राजेश खन्ना को इस फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ एक्टर के फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामांकन मिला था.

7 अप्रैल 1972 को रिलीज हुई फिल्म ‘राजा जानी’. फिल्म में धर्मेंद्र, हेमा मालिनी और प्रेमनाथ नजर आए. इस फिल्म का निर्देशन मोहन सहगल ने किया था. यह रोमांटिक ड्रामा फिल्म है. इस फिल्म में हेमा मालिनी ने रत्ना का किरदार निभाया है, जो बचपन में ही गुम हो जाती है. राजकुमार सिंह ‘राजा’ (धर्मेंद्र) एक ठग है, जो राजमाता की गुमशुदा पोती का नकली रूप बनाने के लिए सड़क नर्तकी शन्नो को ट्रेनिंग देता है. लेकिन शन्नो असली रत्ना निकलती है. दोनों के बीच प्रेम और उसके बाद आने वाली चुनौतियों को फिल्म में दिखाया गया है. कुल मिलाकर प्यार, धोखा और रहस्य की कहानी फिल्म लोगों को बांधे रखती है.

1972 में रिलीज हुई इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन किया था. इसके सटीक बजट और कलेक्शन के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन 1972 की टॉप फिल्मों में इसकी गिनती होती है. यह 1956 की अमेरिकी फिल्म ‘अनास्तासिया’ पर आधारित है और इसे 1983 में तमिल में अदुथा वरिसु के नाम से बनाया गया था.

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