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मोतियों सा खिलेगा गेहूं का हर दाना, सिंचाई का ये सीक्रेट तरीका दिलाएगा मुनाफा

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Genhu Ki Kheti Tips: गेहूं की फसल अब अपने सबसे नाजुक दौर में पहुंच चुकी है, जहां एक छोटी सी लापरवाही आपकी 6 महीने की मेहनत पर पानी फेर सकती है. सहारनपुर के कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी डॉ. आई.के. कुशवाहा के अनुसार, मार्च का महीना दानों की मोटाई और मजबूती के लिए सबसे महत्वपूर्ण है. इस समय खेत में नमी की कमी होने पर दाने सिकुड़ सकते हैं, जिससे पैदावार गिर सकती है. हालांकि, गलत समय पर की गई सिंचाई खड़ी फसल को गिरा भी सकती है. दानों की संख्या बढ़ाने, यहां जानिए गेहूं की फसल में सिंचाई का सही समय जिससे आपको अच्छा मुनाफा मिल सके.

सहारनपुर: गेहूं की खेती कर रहे किसानों के लिए आने वाला मार्च का महीना सबसे अहम होता है. इसी समय गेहूं में बालियां निकलती हैं और दानों के बनने की प्रक्रिया यानी दूधिया अवस्था शुरू होती है. कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि इस दौरान जरा सी लापरवाही दानों के आकार और वजन को प्रभावित कर सकती है. फसल को सिकुड़ने से बचाने और बेहतर उत्पादन के लिए सही सिंचाई प्रबंधन बेहद जरूरी है.

कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी व प्रोफेसर डॉ. आई.के. कुशवाहा ने बताया कि गेहूं की फसल (Wheat Crop Care) में इस समय फ्लावरिंग स्टेज यानी फूल आने की अवस्था चल रही है. इसके ठीक बाद मिलकिंग स्टेज यानी दानों में दूध भरने की अवस्था आएगी. यदि इस स्तर पर खेत में नमी की कमी हुई, तो गेहूं का दाना निश्चित रूप से कमजोर और छोटा रह जाएगा. नमी बरकरार रहने से फर्टिलाइजेशन की प्रक्रिया सही होती है और दानों में सुखन की समस्या नहीं आती.

सिंचाई करते समय बरतें ये सावधानियां
डॉ. कुशवाहा के अनुसार, सिंचाई के वक्त किसानों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है ताकि फसल को नुकसान से बचाया जा सके. किसानों को चाहिए कि वे खेत में पानी बहुत ज्यादा न भरें, क्योंकि केवल नमी बनाए रखने लायक हल्की सिंचाई ही पर्याप्त होती है. किसान भाई कोशिश करें कि सिंचाई दिन के समय ही करें और रात में सिंचाई करने से बचें. मार्च में अक्सर तेज हवाएं चलती हैं और यदि खेत में ज्यादा पानी भरा होगा, तो बालियों के वजन के कारण फसल गिर सकती है जिससे उत्पादन बुरी तरह प्रभावित होता है.

गेहूं का उत्पादन बढ़ाने के वैज्ञानिक टिप्स
6 महीने की कड़ी मेहनत के बाद अप्रैल में गेहूं की कटाई शुरू होती है. डॉ. कुशवाहा सलाह देते हैं कि किसान अपनी फसल की निगरानी लगातार करते रहें और दानों की मजबूती व संख्या बढ़ाने के लिए खेत में दरारें न पड़ने दें. मिट्टी को हमेशा भुरभुरी और नम रखने से दानों का भराव पूरा होता है, जिससे अनाज चमकदार और वजनदार बनता है. सही समय पर प्रबंधन करने से ही किसानों को उनकी मेहनत का पूरा फल मिल पाता है.

गलत सिंचाई से हो सकता है बड़ा नुकसान
अक्सर देखा जाता है कि किसान अधिक उपज के लालच में ज्यादा पानी लगा देते हैं. डॉ. कुशवाहा चेतावनी देते हैं कि भारी सिंचाई और तेज हवा का मेल खड़ी फसल को बिछा सकता है. गिरे हुए हे गेहूं की कटाई में भी समस्या आती है और भूसे की गुणवत्ता भी खराब हो जाती है. इसलिए मौसम के पूर्वानुमान को ध्यान में रखकर और हवा की गति को देखते हुए ही पानी का प्रबंधन करना सबसे समझदारी भरा कदम है.

About the Author

Prashant Rai

प्रशान्त राय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रहने वाले हैं. प्रशांत राय पत्रकारिता में पिछले 8 साल से एक्टिव हैं. अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए प्रशांत राय फिलहाल न्यूज18 हिंदी के साथ पिछले तीन …और पढ़ें



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