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Kanpur latest news : कानपुर में किसानों के लिए ‘Nkosh Kisaan AI’ नाम का स्मार्ट प्लेटफॉर्म लॉन्च किया गया है. छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय और Nkosh स्टार्टअप की पहल से तैयार यह एआई सिस्टम किसानों को फसल, बीज, रोग, मौसम और बाजार भाव की सटीक जानकारी देगा. 11 भाषाओं में उपलब्ध यह तकनीक खेती को आधुनिक और आसान बनाएगी.
कानपुर : किसानों को अब खेती से जुड़ी जानकारी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा. कानपुर स्थित छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय की इनक्यूबेटर कंपनी और एग्रीटेक स्टार्टअप Nkosh ने मिलकर ‘Nkosh Kisaan AI’ प्लेटफॉर्म तैयार किया है. यह तकनीक किसानों को खेत स्तर पर सटीक और तुरंत सलाह देकर खेती को आधुनिक और आसान बनाएगी.
विश्वविद्यालय परिसर में दी गई जानकारी
कानपुर में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान इस नई तकनीक की औपचारिक जानकारी साझा की गई. अधिकारियों ने बताया कि इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य किसानों को उनकी स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार त्वरित और वैज्ञानिक सलाह उपलब्ध कराना है. छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि यह पहल तकनीक को सीधे किसानों से जोड़ने की दिशा में अहम कदम है. इससे खेती की लागत कम करने और आय बढ़ाने में मदद मिलेगी.
किसानों की समस्याओं का तुरंत समाधान
अक्सर किसानों को फसल में रोग, उर्वरक की मात्रा, सिंचाई, मौसम और बाजार भाव की सटीक जानकारी समय पर नहीं मिल पाती. इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए ‘Nkosh Kisaan AI’ तैयार किया गया है. किसान इस प्लेटफॉर्म पर अपने सवाल पूछ सकते हैं और फसल, बीज चयन, कीटनाशक, उत्पादन तकनीक और मंडी भाव जैसी जानकारी तुरंत प्राप्त कर सकते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार यह सिस्टम 90 से 95 प्रतिशत तक सटीक सलाह देने में सक्षम है. इस प्लेटफॉर्म को विकसित करने के लिए उत्तर प्रदेश के 36 जिलों के करीब 50 हजार किसानों का डाटा एकत्र किया गया है. इसी आधार पर एआई स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर सुझाव देता है.
मातृभाषा में उपलब्ध सुविधा
‘Nkosh Kisaan AI’ की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह 11 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है. किसान अपनी मातृभाषा में सवाल पूछ सकते हैं और सरल भाषा में उत्तर पा सकते हैं. इससे उन किसानों को भी फायदा होगा जो तकनीकी साधनों का ज्यादा उपयोग नहीं कर पाते. बोवाई से लेकर कटाई तक हर चरण में यह प्लेटफॉर्म मार्गदर्शन देगा. इसमें फसल चयन, उर्वरक प्रबंधन, रोग पहचान और मौसम आधारित रणनीति जैसी जानकारियां शामिल हैं.
जल्द जुड़ेंगी नई स्मार्ट सुविधाएं
परियोजना से जुड़े विशेषज्ञों ने बताया कि आने वाले समय में इस प्लेटफॉर्म में व्हाट्सएप सपोर्ट, वॉइस कमांड और फोटो अपलोड कर फसल रोग पहचान जैसी सुविधाएं जोड़ी जाएंगी. मिट्टी जांच से जुड़ी जानकारी भी जोड़ी जाएगी, जिससे किसान अपनी जमीन की उर्वरता के अनुसार सही फसल और खाद का चयन कर सकेंगे. इससे कम पढ़े-लिखे किसान भी आसानी से तकनीक का लाभ उठा सकेंगे.
उत्पादन बढ़ाने और लागत घटाने का लक्ष्य
विशेषज्ञों का मानना है कि एआई आधारित सलाह से खेती की लागत में 20 से 30 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है. वहीं उत्पादन में 15 से 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी संभव है. शुरुआती चरण में इस तकनीक को 50 हजार से अधिक किसानों तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है. किसान इस प्लेटफॉर्म का उपयोग मोबाइल ऐप और वेबसाइट के माध्यम से कर सकते हैं. विश्वविद्यालय और एफपीओ नेटवर्क के जरिए इसे गांव-गांव तक पहुंचाने की तैयारी शुरू कर दी गई है. ‘Nkosh Kisaan AI’ किसानों के लिए एक डिजिटल साथी की तरह काम करेगा, जो हर मौसम और हर फसल में उन्हें सही दिशा दिखाएगा. यह पहल आधुनिक तकनीक और कृषि को जोड़कर किसानों के भविष्य को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.


