Chemical wala Color: रंगों का त्योहार होली 4 मार्च को देश भर में खेली जाएगी. कई जगहों पर एक हफ्ते पहले से ही होली का त्योहार शुरू हो जाता है. इस खुशी के मौके पर बुरा न मानों होली है… कहकर आप किसी पर भी रंग डाल सकते हैं. लेकिन ऐसा करने से पहले ये एक बार जरूर चेक कर लें कि आपके पिचकारी में भरा रंग असली हर्बल कलर है.
जीं, हां मार्केट में केमिकल वाले रंगों पर भी हर्बल का लेबल लगाकर खूब बेचा जाता है. केमिकल वाले रंग कलर तो पक्का छोड़ते हैं, लेकिन इससे स्किन और हेयर के डैमेज का खतरा होता है. अगर आखों में चला जाए तो रोशनी भी जा सकती है या रेटिना में चोट आ सकता है. इसलिए रंग खरीदते समय थोड़ी समझदारी जरूरी है. खासकर बच्चों की स्किन बहुत नाजुक होती है, इसलिए उनके लिए सुरक्षित रंग चुनना और भी जरूरी हो जाता है.
ऐसे पहचानें नकली हर्बल गुलाल
रंग की चमक और बनावट देखें- बहुत ज्यादा चमकीला और तेज चमक वाला गुलाल अक्सर केमिकल मिला होता है. अगर उसमें छोटे-छोटे चमकीले कण दिखें, तो सावधान हो जाएं. प्राकृतिक गुलाल हल्का, मैट फिनिश वाला और छूने में मुलायम होता है.
खुशबू से समझें सच्चाई- रंग को सूंघकर भी काफी हद तक पहचान की जा सकती है. अगर उसमें पेट्रोल, केरोसिन या तेज एसिड जैसी गंध आए, तो उसे न खरीदें. हर्बल रंगों में हल्की, प्राकृतिक खुशबू होती है या फिर बिल्कुल गंध नहीं होती.
पानी वाला आसान टेस्ट- घर लाने के बाद आप थोड़ा सा रंग पानी में डालकर देख सकती हैं. अच्छा रंग पानी में आसानी से घुल जाता है और नीचे कोई गंदगी नहीं छोड़ता. केमिकल वाला रंग या तो ऊपर तैरता रहता है या नीचे जम जाता है.
रगड़कर करें जांच- थोड़ा सा गुलाल कागज या पॉलिथीन पर रगड़ें. अगर कागज फट जाए या खुरदुरापन महसूस हो, तो समझ लें कि उसमें मिलावट हो सकती है.
पैकेट पर क्या देखें?
रंग खरीदते समय पैकेट की जानकारी जरूर पढ़ें. उस पर 100% Natural, Organic या Eco-friendly लिखा होना चाहिए. सामग्री में हल्दी, मक्का स्टार्च, मेहंदी या फूलों के अर्क जैसे प्राकृतिक तत्वों का जिक्र हो. बहुत ज्यादा गहरे और पक्के रंगों से बचें, क्योंकि इनमें केमिकल ज्यादा हो सकते हैं.


