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इन दिनों आयुर्वेद का हाल बलिया जनपद में बदहाल है. कहीं कहीं तो सिर्फ कंपाउंडर बैठे रहते हैं, कोई डॉक्टर नजर नहीं आता हैं. कई आयुर्वेद चिकित्सालय में तो दवा ही नहीं है. सरोज पांडेय ने कहा कि, सही व्यवस्था नहीं रहेगी, तो परेशानी बढ़ेगी. अस्पताल में जो दवाइयां उपलब्ध हैं, उन्हीं से डॉक्टर सभी मरीजों का उपचार करने की कोशिश कर रहे हैं. चिकित्सक भी अंदर मौजूद स्टॉक को ध्यान में रखते हुए ही पर्ची लिख रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक लोगों को राहत मिल सके.
बलिया: राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया में इन दिनों औषधियों यानी दवाइयों की कमी देखी जा रही है. आपको बताते चलें कि जिला मुख्यालय पर स्थित यह प्रमुख आयुर्वेदिक अस्पताल दूर-दराज के गांवों से आने वाले सैकड़ों मरीजों की भी उम्मीदों है, लेकिन सीमित दवा आपूर्ति के कारण कहीं न कहीं व्यवस्थाएं दबाव में हैं. हालांकि, जो है उसी में किसी तरह काम चलाया जा रहा है.
कंपाउंडर के भरोसे अस्पताल
रतसड़ से आए बुजुर्ग जवाहर पांडेय ने कहा कि, इन दिनों आयुर्वेद का हाल बलिया जनपद में बदहाल है. कहीं कहीं तो सिर्फ कंपाउंडर बैठे रहते हैं, कोई डॉक्टर नजर नहीं आता हैं. कई आयुर्वेद चिकित्सालय में तो दवा ही नहीं है. सरोज पांडेय ने कहा कि, सही व्यवस्था नहीं रहेगी, तो परेशानी बढ़ेगी. अस्पताल में जो दवाइयां उपलब्ध हैं, उन्हीं से डॉक्टर सभी मरीजों का उपचार करने की कोशिश कर रहे हैं. चिकित्सक भी अंदर मौजूद स्टॉक को ध्यान में रखते हुए ही पर्ची लिख रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक लोगों को राहत मिल सके.
नहीं मिल जरूरत की दवा
थम्हनपुरा निवासी आमोद कुमार ने कहा कि, डॉक्टर अच्छा इलाज कर रहे हैं, लेकिन दवा कम पड़ रही है. यही नहीं, बल्कि जिले में कई आयुर्वेद केंद्र पर भी दवाओं की कमी मरीजों की परेशानी बढ़ा रही हैं. यहां जो दवा है वह आसानी से मरीजों को मिल रहा है. राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया में कुछ महत्वपूर्ण दवा नहीं है, जो है वो भी कम है. इसके बावजूद मरीज डॉक्टरों के व्यवहार और परामर्श से संतुष्ट नजर आते हैं. उनका मानना है कि चिकित्सा सेवा में समर्पण की कमी नहीं है, बस दवाओं की आपूर्ति मजबूत होने की जरूरत है.
समस्या का जल्द ही होगा खात्मा
इस संबंध में फोन से वार्ता की गई, तो आयुर्वेदिक यूनानी अधिकारी बलिया अनिल कुमार ने कहा कि, वह अभी छुट्टी पर चल रहे हैं. हालांकि, उन्होंने कहा की, दवाइयों की कमी जरूर है. लेकिन मार्च तक यह समस्या बिल्कुल खत्म हो जाएगी. चूंकि यह जिला का मुख्य आयुर्वेदिक केंद्र है, इसलिए यहां संसाधनों की उपलब्धता बेहतर होनी ही चाहिए. मरीजों की मांग है कि राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल की व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाए और दवाइयों की नियमित व पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित कर मरीजों को राहत दिया जाए.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें


