New Drug Addiction: सिगरेट-शराब, भांग, गांजा, यहां तक कि सांप के जहर का नाम अब तक आपने सुना ही होगा. लेकिन क्या आपने सुना है कि कंडोम से भी नशा हो सकता है. फिर कंडोम से नशा कैसे होता है. यह सोचकर ही दिमाग घूम जाता है. लेकिन कंडोम ही नहीं, इस तरह के 5 ऐसे नाम है जिनसे नशेड़ी आजकल नशा कर रहे हैं. आइए पहले इनके नाम जानते हैं.
5 नए तरह की चीजों से नशा
1. कंडोम: सबसे पहले हम कंडोम का ही जिक्र करते हैं. टीओआई की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में अचानक कंडोम की बिक्री तेजी से बढ़ गई. इस बात से प्रशासन हैरान रह गया था. जांच में जो सच्चाई सामने आई, वह चौंकाने वाली थी. इस जांच से पता चला कि कंडोम का नशे में किस तरह इस्तेमाल होता है. वास्तव में कुछ युवा कंडोम को गर्म पानी में उबालकर उसकी भाप लेते पाए गए. कंडोम में मौजूद एरोमैटिक कंपाउंड्स उबालने पर अलग हो जाते हैं और उनकी भाप लेने से नशा चढ़ता है. डॉक्टरों के मुताबिक यह तरीका सीधे फेफड़ों और दिमाग को नुकसान पहुंचा सकता है.
2. छिपकली की पूंछ: भारत की कुछ जेलों और झुग्गी-बस्तियों में नशे का एक चौंकाने वाला तरीका सामने आया है. कई नशेड़ी छिपकली की पूंछ काटकर उसे धूप में सुखाते हैं और फिर उसे तंबाकू में मिलाकर बीड़ी या सिगरेट की तरह पीते हैं. उनका दावा है कि छिपकली की पूंछ में मौजूद ज़हरीले तत्व गांजे से भी ज्यादा तीव्र नशा देते हैं. यह तरीका बेहद विषैला है और सीधे तौर पर तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) पर हमला करता है.
3. बिच्छू का डंक और धुआं- अफीम जैसे नशीले पदार्थों की लत छोड़ने की कोशिश कर रहे कुछ लोग हैरान कर देने वाले तरीके अपनाते हैं और बिच्छू का सहारा लेते हैं. मरे हुए बिच्छू को धूप में सुखाकर, फिर कोयले पर जलाया जाता है और उससे उठने वाले धुएँ को सांस के ज़रिए अंदर लिया जाता है. खास तौर पर बिच्छू की पूँछ में मौजूद ज़हर का इस्तेमाल नशे के लिए किया जाता है. कुछ लोगों का दावा है कि इसका नशा लगभग 10 घंटे तक रहता है. शुरुआती कुछ घंटे बेहद दर्दनाक होते हैं, लेकिन उसके बाद दिमाग पूरी तरह सुन्न हो जाता है. इससे याददाश्त हमेशा के लिए चली जाने का खतरा रहता है, फिर भी लोग इस तरह का नशा करते हैं.
4. ड्रीमफिश और धतूरा- ‘सार्पा साल्पा’ नामक मछली खाने के बाद इंसान को अजीब तरह के भ्रम (हैलुसिनेशन) होने लगते हैं. इसका असर लगभग 36 घंटे तक रह सकता है. यह एक तरह की खाद्य विषाक्तता है, लेकिन नशे के आदी लोग जानबूझकर इसे तलाशते हैं. वहीं धतूरा से नशा भी कुछ लोग करते हैं. धतूरा एक अत्यंत विषैला पौधा है, इसके बावजूद कई लोग इसका सेवन करते हैं. इससे व्यक्ति होश खो बैठता है और उसे डरावने सपने आने जैसी स्थिति महसूस होती है.
5. सांप के ज़हर – यह किसी फिल्म की कहानी जैसा लगता है, लेकिन कुछ नशेड़ी वास्तव में साँप से कटवाकर नशा करते हैं. इसके लिए खास तरह की ‘रेव पार्टियां’ आयोजित की जाती हैं, जहां सपेरों की मदद से सांप को जीभ, होंठ या कान की लौ पर डसवाया जाता है. ज़हर के खून में मिलते ही कुछ सेकंड में तेज़ नशा चढ़ जाता है. यह नशा इतना जानलेवा होता है कि ज़हर की मात्रा थोड़ी-सी भी ज्यादा हो जाए तो मौके पर ही मौत हो सकती है.
हेल्थ पर गंभीर असर
जो युवा नियमित रूप से इन रासायनिक पदार्थों का नशा करते हैं, उनमें सीने में दर्द से लेकर लगातार सिरदर्द तक गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं विकसित हो जाती हैं. सबसे चिंताजनक बात यह है कि ये लोग नशे के इतने आदी हो जाते हैं कि अंततः अपनी बीमारियों के इलाज के लिए भी इन्हीं नशीले पदार्थों का सहारा लेने लगते हैं. इससे उनकी लत और अधिक गहरी होती चली जाती है. चंडीगढ़ स्थित गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के मनोचिकित्सा विभाग और ओडिशा के कटक स्थित एससीबी मेडिकल कॉलेज के मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के मनोचिकित्सकों ने इस तरह के नशे पर एक अध्ययन किया था.
इस अध्ययन के मुताबिक आमतौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले इनहेलेंट्स में पेट्रोल, गोंद, स्प्रे पेंट, सॉल्वेंट्स, सफाई में इस्तेमाल होने वाले तरल पदार्थ और अन्य एयरोसोल शामिल हैं. इन सबको नशेड़ी सूंघते हैं, नाक से खींचते, सीधे सांस के जरिए लेते हैं या बंद थैले से सांस लेते हैं. इनहेलेंट्स के इस्तेमाल से उत्साह (यूफोरिया) की अनुभूति होती है, जो बंद थैले से दोबारा सांस लेने के कारण होने वाली हाइपरकैपनिया और हाइपोक्सिया से और तीव्र हो जाती है. जो किशोर निर्भरता या दुरुपयोग के मानकों पर खरे उतरते हैं, उनमें अक्सर अपराधी प्रवृत्तियां, कई नशीले पदार्थों का सेवन और निर्भरता देखी जाती है तथा वे अन्य भावनात्मक समस्याओं के लिए मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का भी उपयोग करते हैं.
यह आनंद नहीं, आत्महत्या का रास्ता है
नशे के ये विचित्र रूप इस बात को दर्शाते हैं कि इंसान मानसिक रूप से कितनी तेजी से खोखला होता जा रहा है. पल भर के सुख के लिए बिच्छू, सांप या प्लास्टिक जैसी चीज़ों का सहारा लेना एक गंभीर विकृति है. यह नशा न केवल शरीर को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि इंसान के सामाजिक और पारिवारिक जीवन को भी पूरी तरह बर्बाद कर देता है. इस भयावह सच्चाई के प्रति जागरूकता फैलाना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है.
मेरी सलाह
नशा किसी भी रूप में सही नहीं है. नशे की लत एक व्यक्ति ही नहीं पूरे परिवार और फिर उससे समाज का विनाश करते हैं. ऐसे में मेरी सलाह है कि किसी भी तरह का नशा न करें. अगर आपके आसपास इस तरह के नशेड़ी हो तो उसे सही रास्ते पर लाने के लिए मनोवैज्ञानिकों के पास ले जाएं. कई सरकारी योजनाएं हैं जिनमें नशे की लत को छुड़ाया जाता है. इसका सही इलाज किया जाए तो यह आसानी से छूट सकता है.


