Israeli 6th Gen bvr Missile Sky Sting for LCA Tejas: ऑपरेशन सिंदूर में दिखी थी कमी, तेजस को F-35 की ताकत, पल भर में चीनी PL-15 बनेगा कबाड़

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ऑपरेशन सिंदूर में दिखी थी कमी, तेजस को F-35 की ताकत, चीनी PL-15 बनेगा कबाड़

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Israeli 6th Gen bvr Missile Sky Sting: ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान ने चीनी बीवीआर मिसाइल पीएल-15 का इस्तेमाल किया था. पीएल-15 एक बेहद एडवांस बीवीआर मिसाइल है. भारत के पास अपना देसी बीवीआर अस्त्र मार्क-1 और मार्क-2 मिसाइलें हैं लेकिन तकनीकी रूप से अभी वे ग्लोबल लेवल की नहीं हैं. ऐसे में वह इजरायल की 6th जेन बीवीआर मिसाइल स्काई स्टिंग खरीदना चाहता है. पीएम मोदी के इजरायल दौरे पर इस मिसाइल सिस्टम के लिए डील होने की उम्मीद है.

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भारत इजरायली बीवीआर मिसाइलों को तेजस जेट में लगाना चाहता है.

Israeli 6th Gen bvr Missile Sky Sting: बीते साल ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने पाकिस्तान को एक से बढ़कर एक गहरे जख्म दिए थे. लेकिन, 72 घंटे तक चली इस जंग में भारत को भी काफी कुछ सीखने को मिला था. भारत को अपनी कमी को परखने का मौका मिला था. इस जंग में पाकिस्तान ने जिस तरह से भारत के खिलाफ चीनी हथियारों का इस्तेमाल किया, उससे चिंता बढ़नी लाजिमी है. उसने चीनी हथियारों से भारत के सैन्य ठिकानों पर हमले की कोशिश की. हालांकि भारत के बेहद मजबूत सुरक्षा घेरे ने इन तमाम हथियारों को आसमान में ही तबाह कर दिया था.

इस जंग से भारत ने बड़ी सीख ली. सबसे बड़ी सीख यह थी कि भविष्य में पाकिस्तान और चीन को अलग-अलग कर नहीं देखा जाना चाहिए. इस वक्त पाकिस्तान चीन का पूरी तरह पिछलग्गू देश बन चुका है. चीन के लिए भी पाकिस्तान एक बड़ा बाजार बनकर उभरा है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने भारतीय इलाके पर चीनी बीवीआर मिसाइलें पीएल-15 का इस्तेमाल किया था. भारतीय क्षेत्र में इस मिसाइल के मलबे मिले थे. पीएल-15 बेहद आधुनिक बीवीआर मिसाइलें हैं, जिनकी रेंज करीब 250 किमी है. इन मिसाइलों को फाइटर जेट्स से दागा जाता है और ये नजर आने से पहले ही लक्ष्य को भेद देती है. सैन्य एक्सपर्ट मानते हैं कि पाकिस्तान ने चीनी के 4.5 जेन के फाइटर जेट जे-17 से इनको फायर किया होगा.

भारत की बीवीआर मिसाइलें

खैर, अब इस बात को नहीं विराम देते हैं. दरअसल, आज की कहानी इसी पीएल-15 मिसाइलों से जुड़ी हैं. भारत के पास पीएल-15 के मुकाबले के लिए देसी अस्त्र मार्क-1 मिसाइलें हैं. ये बीवीआर श्रेणी की शानदार मिसाइलें हैं लेकिन, मौजूदा वक्त में इनकी रेंज थोड़ी कम है. अस्त्र मार्क-1 की रेंज करीब 160 किमी है. इसके साथ ही डीआरडीओ इसको एईएसए रडार और डूअल पल्स मोटर टेक्नोलॉजी से लैस कर रहा है. साथ ही भारत अस्त्र मार्क-2 पर भी काम कर रहा है. इसके अलावा अस्त्र मार्क-3 पर भी काम चल रहा है. लेकिन, पीएम-15 के मुकाबले अभी भी ये तकनीकी रूप से थोड़ा पीछे हैं. भारत फ्रांस से खरीदे गए राफेल विमानों में मेटियोर मिसाइलों का इस्तेमाल करता है. ये भी बीवीआर मिसाइलें हैं. इनमें रैमजेट इंजल लगे होते हैं, जिससे ये मिसाइले बेहद हाईस्पीड से वार करती हैं. बावजूद इसके चीन के पीएल-15 और उसके भविष्य के और एडवांस वैरिएंट को तकनीकी रूप से थोड़ी बढ़त हासिल है. ऐसे में भारत अपने पुराने और भरोसेमंद दोस्त रूस के साथ भी आर-37एम बीवीआर मिसाइलों को लेकर बातचीत कर रहा है. ये मिसाइलें 300 किमी तक मार कर सकती हैं. ये वार-टेस्टेड मिसाइलें हैं और ये हर एक मामले में चीनी पीएल-15 और उसके एडवांस वर्जन पीएल-17 को टक्कर देने में सक्षम हैं.
तेजस भारत द्वारा निर्मित एक बेहद हल्का 4.5 जेन फाइटर जेट है.

इजरायली स्काई स्टिंग मिसाइलें

लेकिन, इतना सब होने के बावजूद भारत किसी एक पर निर्भर नहीं रहना चाहता. भारत के पास अपना देसी बीवीआर अस्त्र सीरीज की मिसाइलें हैं. उसके पास राफेल के लिए मेटियोर मिसाइलें है. रूसी आर-37एम को लेकर बातचीत चल रही है. लेकिन, वह एक और सिस्टम की तलाश में है जो और भी एडवांस हो. यह तलाश इजरायली बीवीआर मिसाइल के साथ पूरी होती है. इजरायल के ये बीवीआर मिसाइलें एआई इनेबल्ड हैं. यह 6th जेन की मिसाइलें हैं. यानी दुनिया में अभी इसके टक्कर की बीवीआर मिसाइलें नहीं हैं. ये बेहद हल्क और लंबी दूरी तक वार करने में सक्षम हैं. भारत इन मिसाइलों को अपने देसी हल्के तेजस फाइटर जेट्स में लगाना चाहता है. इसका नाम स्काई स्टिंग है. इसको इजरायल की सरकारी कंपनी राफेल एडवांस डिफेंस सिस्टम्स (Rafael Advanced Defense Systems) डेवलप कर रही है. अगर यह यह डील हो जाती है तो भारत के हल्के तेजस विमान भी बेहद घातक बन जाएंगे.

राफेल एडवांस सिस्टम ने इस स्काई स्टिंग को कुछ इस तरह से डिजाइन किया है जिससे कि वह किसी भी पश्चिमी फाइटर जेट्स के साथ आसानी से लिंक किया जा सके. इसमें अमेरिका की सबसे एडवांस फिफ्थ जेन फाइटर जेट एफ-35 भी शामिल है. हालांकि एफ-35 में इस मिसाइल को इंटीग्रेट करने के लिए जेट की निर्माता कंपनी लॉकहीड मार्टिन से अनुमति लेनी होगी. फिलहाल के लिए इसको भारतीय फाइटर जेट तेजस और सुखोई के साथ इंटीग्रेट करने की बाचतीच चल रही है.

About the Author

संतोष कुमार

न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…और पढ़ें



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