नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट में एनसीईआरटी (NCERT) मामले में गुरुवार को फिर सुनवाई हुई. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने इस मामले पर सुनवाई करते एनसीईआरटी को जमकर फटकार लगाई. सूर्यकांत बहस के दौरान काफी गुस्से में दिखे. सीजेआई ने कहा कि न्यायपालिका की गरिमा को कम करने के लिए एक कैलकुलेटिव मूव है. मैं न्यायपालिका का मुखिया होने के नाते जब तक संतुष्ट नहीं हो जाता है तब तक इस मामले की सुनवाई जारी रहेगा. ‘बच्चे ये पढ़ेंगे कि न्यायपालिका करप्ट है’ 8वीं के किताब में ये बातें… वहीं NCERT ने कहा कि वो इस केस में बिना शर्त माफी मांगने को तैयार हैं. कोर्ट में सॉलसिटर जनरल ने बताया कि जो 32 किताबें बिकी थीं, उनको वापस ले लिया है. इस पर सीजेआई ने कहा कि ये 8वीं क्लास के बच्चों की बात नहीं हैं. ये कैलकुलेटिव मूव यानी सोच समझा तरीका है. मैं इसका पता लगाउंगा.
इस सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने एनसीईआरटी के रवैये पर गहरी नाराजगी जाहिर की. कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह मामला केवल कुछ किताबों या उनमें छपी गलतियों का नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाने का एक सोचा-समझा प्रयास यानी ‘कैलकुलेटिव मूव’ प्रतीत होता है.
सीजेआई सूर्यकांत ने लगाई एनसीईआरटी को फटकार
सुनवाई शुरू होते ही सीजेआई सूर्यकांत ने एनसीईआरटी के वकीलों और अधिकारियों को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा, ‘यह जो कुछ भी किया गया है, वह कोई अनजानी भूल नहीं है. यह न्यायपालिका की गरिमा को कम करने के लिए एक बेहद कैलकुलेटिव मूव है.’ सीजेआई ने आगे स्पष्ट किया कि वह इस मामले को इतनी आसानी से छोड़ने वाले नहीं हैं. उन्होंने बेहद सख्त लहजे में कहा, ‘मैं इस न्यायपालिका का मुखिया हूं और जब तक मैं व्यक्तिगत रूप से इस पूरी प्रक्रिया और सुधारों से संतुष्ट नहीं हो जाता, तब तक इस मामले की सुनवाई जारी रहेगी. हम इसे तार्किक अंत तक लेकर जाएंगे.’
बिना शर्त माफी भी NCERT के काम नहीं आया
एनसीईआरटी ने अदालत के समक्ष ‘बिना शर्त माफी’ मांगने का प्रस्ताव रखा. संस्थान ने कहा कि वे अपनी गलतियों को स्वीकार करते हैं और भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न हो, इसका पूरा ध्यान रखेंगे. वहीं, केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को सूचित किया कि विवादित सामग्री वाली जो 32 किताबें बाजार में बिक चुकी थीं, उन्हें वापस ले लिया गया है. उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि आगे भी इस तरह की किसी भी विवादित किताब को वितरण प्रक्रिया से पूरी तरह हटा दिया गया है.
बचाव पक्ष की दलील
जब बचाव पक्ष ने इसे एक सामान्य प्रक्रियात्मक चूक बताने की कोशिश की, तो सीजेआई सूर्यकांत ने उन्हें बीच में ही टोकते हुए कहा, ‘यह केवल 8वीं क्लास के बच्चों की किताबों की बात नहीं है. आप इसे छोटा मामला मत समझिए. यह पूरा घटनाक्रम एक खास पैटर्न की ओर इशारा करता है, जिसका मकसद संवैधानिक संस्थाओं की छवि को धूमिल करना है. यह पूरी तरह से सोच-समझकर अपनाया गया एक तरीका है.’
कोर्ट रूम में हुई बहस की लाइन टू लाइन मुख्य बातें:
सीजेआई सूर्यकांत: आप जो माफी मांग रहे हैं, क्या वह केवल सजा से बचने के लिए है या आपको अपनी गलती का एहसास है? यह न्यायपालिका की गरिमा पर प्रहार है.
सॉलिसिटर जनरल: लॉर्डशिप, हमने उन सभी 32 प्रतियों को ट्रैक करके वापस मंगा लिया है जो सर्कुलेशन में थीं. हम इसे लेकर बेहद गंभीर हैं.
सीजेआई सूर्यकांत: किताबें वापस लेना केवल एक हिस्सा है. बुनियादी सवाल उस मानसिकता का है जिसने ऐसी सामग्री को अनुमति दी. यह एक कैलकुलेटिव मूव है ताकि अदालती आदेशों को बेअसर किया जा सके.
एनसीईआरटी वकील: हम बिना शर्त माफी मांगते हैं और कोर्ट के हर निर्देश का पालन करने के लिए तैयार हैं.
सीजेआई सूर्यकांत: माफी स्वीकार करना कोर्ट का विशेषाधिकार है. लेकिन जब तक मैं इस संस्थान की गरिमा को सुरक्षित महसूस नहीं करता, सुनवाई बंद नहीं होगी.
क्या है पूरा विवाद?
यह विवाद एनसीईआरटी की किताबों में कुछ ऐसी सामग्री और संदर्भों को लेकर शुरू हुआ था, जो कथित तौर पर न्यायपालिका के फैसलों को गलत तरीके से पेश कर रहे थे या अदालती आदेशों की अवहेलना कर रहे थे. पिछली सुनवाइयों में भी कोर्ट ने इस पर जवाब मांगा था. आज की सुनवाई ने यह साफ कर दिया है कि सुप्रीम कोर्ट अब शिक्षा और संवैधानिक मर्यादा के बीच किसी भी तरह के खिलवाड़ को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है.


