NCERT Controversies: हाल ही में NCERT की कक्षा 8वीं की नई सोशल साइंस की किताब पर विवाद खड़ा हो गया है. किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ और ‘लंबित मामले’ जैसे टॉपिक शामिल किए गए, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त आपत्ति जताई. मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका की छवि को धूमिल होने नहीं दिया जाएगा और इस विवाद के बाद NCERT ने माफी मांगते हुए उस चैप्टर को हटाने का निर्णय लिया है. सरकार ने इन किताबों में से बिक चुकी 38 कॉपियों को वापस लेने का आदेश भी दिया है, जिनमें से 16 किताबें पहले ही वापस मिल चुकी हैं.
क्या था विवादित चैप्टर और क्यों हुआ विवाद?
दरअसल, कक्षा 8वीं की नई सोशल साइंस की किताब में चैप्टर ‘The Role of Judiciary in Our Society’ (हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका) के तहत कुछ ऐसे हिस्से थे, जिनमें भारत की न्यायपालिका के सामने आने वाली चुनौतियों को बताया गया था, जैसे न्यायपालिका में भ्रष्टाचार और वकीलों के अनुसार लंबित मामलों की संख्या. इस कंटेंट को सुप्रीम कोर्ट और कुछ सीनियर एडवोकेट ने ‘अनुपयुक्त’ बताते हुए आलोचना की और कहा कि इससे न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंच सकती है.
हालांकि, यह पहला मौका नहीं है जब NCERT की किताबों को लेकर बहस छिड़ी हो. पिछले कुछ वर्षों में इतिहास, राजनीति और सामाजिक विषयों को लेकर भी कई बड़े विवाद सामने आए हैं. आइए इन्हें एक-एक करके समझते हैं.
1. मुगल और दिल्ली सल्तनत के चैप्टर हटाने का विवाद
साल 2023-24 में कक्षा 7वीं और 12वीं की इतिहास की किताबों से मुगल साम्राज्य और दिल्ली सल्तनत से जुड़े कई हिस्से हटाए गए. आलोचकों का कहना था कि यह भारत के इतिहास के एक महत्वपूर्ण दौर को कम करके दिखाने जैसा है. कुछ इतिहासकारों ने इसे ‘इतिहास को बदलने’ की कोशिश बताया. वहीं, NCERT का कहना था कि यह बदलाव ‘सिलेबस कम करने’ की प्रक्रिया का हिस्सा था, ताकि कोविड के बाद छात्रों पर पढ़ाई का बोझ कम किया जा सके.
2. मराठा बनाम राजपूत कंटेंट पर बहस
एक और विवाद तब हुआ जब नई किताबों में मराठा इतिहास को ज्यादा पेज दिए गए, जबकि राजपूत शासकों को कम जगह मिली. कुछ संगठनों और नेताओं ने इसे असंतुलित प्रस्तुति बताया. उनका कहना था कि अलग-अलग ऐतिहासिक शासकों को बराबर महत्व मिलना चाहिए. NCERT ने जवाब दिया कि किताबें नए करिकुलम फ्रेमवर्क के आधार पर तैयार की गई हैं और टॉपिक का चयन विशेषज्ञ समितियों द्वारा किया जाता है.
3. टीपू सुल्तान को लेकर विवाद
इतिहास की किताबों से टीपू सुल्तान से जुड़े कुछ हिस्से हटाने या कम करने को लेकर भी विवाद हुआ. कुछ लोगों ने कहा कि टीपू सुल्तान को स्वतंत्रता संग्राम के शुरुआती योद्धा के रूप में दिखाया जाता रहा है, इसलिए उनके योगदान को कम नहीं आंका जाना चाहिए. दूसरी ओर, कुछ समूहों का मत था कि इतिहास को नए सिरे से और संतुलित तरीके से पेश किया जाना चाहिए. इस मुद्दे पर भी लंबी बहस चली.
4. महात्मा गांधी की हत्या से जुड़े संदर्भ में बदलाव
कुछ कक्षाओं की राजनीतिक विज्ञान की किताबों में महात्मा गांधी की हत्या और उससे जुड़े संगठनों के संदर्भ में बदलाव किए गए. इस पर विपक्षी दलों और कुछ शिक्षाविदों ने आपत्ति जताई और कहा कि इससे ऐतिहासिक तथ्यों की प्रस्तुति प्रभावित हो सकती है. NCERT ने स्पष्ट किया कि बदलाव तथ्यों को हटाने के लिए नहीं, बल्कि भाषा को सरल और संक्षिप्त करने के लिए किए गए हैं.
5. कोविड के दौरान सिलेबस कम करने पर विवाद
कोविड-19 महामारी के दौरान NCERT ने कई विषयों के चैप्टर हटाए या छोटे किए. इसमें लोकतंत्र, नागरिकता आंदोलन, कृषि आंदोलन और पर्यावरण से जुड़े हिस्से शामिल थे. कुछ लोगों ने इसे जरूरी कदम बताया, जबकि अन्य ने आरोप लगाया कि संवेदनशील मुद्दों को जानबूझकर हटाया गया. NCERT ने कहा कि यह अस्थायी कदम था और उद्देश्य सिर्फ छात्रों का शैक्षणिक बोझ कम करना था.
6. अब न्यायपालिका पर कंटेंट को लेकर नया विवाद
ताजा विवाद में कक्षा 8वीं की किताब में न्यायपालिका से जुड़े मुद्दों को शामिल किया गया था. इसमें लंबित मामलों और भ्रष्टाचार जैसे विषयों का उल्लेख था. सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद NCERT ने माफी मांगते हुए चैप्टर हटाने की बात कही. इस कदम से यह साफ हुआ कि संवैधानिक संस्थाओं से जुड़े विषयों पर विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है.


