छतरपुर. हाल ही में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की ओर से सिविल जज परीक्षा 2024-25 का फाइनल रिजल्ट जारी किया है. इसमें छतरपुर के आयुष चौरसिया ने तीसरा स्थान हासिल किया है. वहीं पुरुष वर्ग में पहला स्थान मिला है. आयुष ने छतरपुर जिले समेत पूरे बुंदेलखंड का नाम रोशन किया है.
आयुष लोकल 18 से बातचीत में बताते हैं कि आज सिविल जज बनकर बहुत खुशी हो रही है, क्योंकि ये सपना मेरे दादा जी का था. उन्होंने कहा था कि तुम सिविल जज बनना और बहन को कहा- तुम डॉक्टर बनना. आज दोनों सपने पूरे हो गए. आयुष बताते हैं कि जब मैं स्कूल में पढ़ता था तो दादा ने कहा था, ‘तुम सिविल जज बनना. मैंने भी कह दिया आपका सपना जरूर पूरा करूंगा.’ इसके बाद मैंने 11वीं कक्षा में साइंस स्ट्रीम चुन ली, लेकिन फिर जबलपुर के धर्मशास्त्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी से बीए-एलएलबी की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद इंदौर में शर्मा एकेडमी कोचिंग ज्वाइन कर ली और वहीं रहकर तैयारी करने लगा.
आयुष बताते है कि सिलेबस कंप्लीट कर लिया. इसके बाद खुद ही मैंने पढ़ाई की रणनीति बनाई. प्रीलिम्स से लेकर मेन्स और इंटरव्यू सभी की तैयारी मैंने अलग-अलग की. पहले प्री एग्जाम पर फोकस किया. प्री एग्जाम होने के बाद मेन्स के लिए 2 महीने मिले तो उसमें मेंस की तैयारी कर ली.
बड़ी बहन डॉक्टर
आयुष की बड़ी बहन डॉ. आयुषी चौरसिया बताती हैं कि जिस दिन मैं डॉक्टर बनी थी उस दिन दादा जी का सपना पूरा हुआ था, लेकिन आज भाई सिविल जज बन गया है तो उनका अधूरा सपना पूरा हो गया है. आयुष की माता गायत्री बताती हैं कि आयुष का सिविल जज बनना किसी सपने से कम नहीं है. हमने पूरी तरह से बेटे का साथ दिया. उस पर पढ़ाई के लिए कभी दबाव नहीं बनाया. वह खुद ही पढ़ाई करता था.
दोस्त ने दी आयुष को सिलेक्शन की जानकारी
पिता हरगोविंद बताते हैं कि मैं एक शिक्षक हूं. साल 2004 तक हम लवकुश नगर में रहते थे. इसके बाद छतरपुर शहर निकल गए वहां दोनों बच्चों की शिक्षा हुई. हालांकि, लवकुश नगर में आज भी हमारा घर है. मुझे आयुष ने बताया कि पापा मेरे दोस्त ने जानकारी दी है कि तेरा सिविल जज में सिलेक्शन हो गया है, लिस्ट में नाम भी देख लिया है. यह सुनते ही मेरा मन खुशी से झूम उठा. लेकिन जब ये पता चला कि उसने पूरे छत्तीसगढ़ में पुरुष वर्ग में टॉप किया है और ओवरऑल तीसरी रैंक है, तो विश्वास ही नहीं हुआ. आंखों से खुशी के आंसू निकल रहे थे. वो पल अद्भुत था.
इंटरव्यू के कुछ घंटों बाद ही मिली ‘बड़ी खबर’
आयुष की यह सफलता किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है. 19 फरवरी को वे रायपुर में इंटरव्यू बोर्ड के सामने पेश हुए थे. साक्षात्कार खत्म होने के बाद देर रात जैसे ही परिणाम घोषित हुए, आयुष का नाम टॉपर्स की लिस्ट में चमक रहा था. आयुष को जब दोस्त से सिलेक्शन की जानकारी मिली तो वह स्टेशन में था.
शिक्षक माता-पिता का सपना किया साकार
आयुष की सफलता के पीछे एक शिक्षित और अनुशासित परिवेश का बड़ा हाथ है. उनके पिता हरगोविंद चौरसिया ‘ललन जू की पुरवा’ स्कूल में शिक्षक हैं, वहीं माता गायत्री चौरसिया भी ‘बडेरा पुरवा’ गांव में शिक्षिका के रूप में बच्चों का भविष्य संवार रही हैं. आयुष की बड़ी बहन डॉ. आयुषी चौरसिया (MBBS) भी चिकित्सा के क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं.
नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी से शुरू हुआ सफर
आयुष ने अपनी बीए-एलएलब (ऑनर्स) की डिग्री धर्मशास्त्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (DNLU) से पूरी की है. उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय निरंतर अध्ययन, कठिन परिश्रम और माता-पिता के संस्कारों को दिया है. आयुष ने छतरपुर में रहकर ही नर्सरी से 10th क्लास तक ICSE बोर्ड से पढ़ाई की. इसके बाद 12वीं एमपी बोर्ड से की. आयुष ने अपनी पूरी पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम से की है.


