bajrang baan ka path karna chahiye ya nahi | Bajrang Baan padhne se kya hota hai | बजरंग बाण मंगलवार या किसी भी दिन पढ़ना चाहिए या नहीं? इससे आपको कैसे हो सकती है हानि, धर्म-शास्त्र के विशेषज्ञों से जानें सही बात

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Bajrang Baan Path Niyam: हनुमान जी को प्रसन्न करके अपने कार्य सफल कराने के लिए बजरंग बाण को अत्यंत ही प्रभावशाली पाठ माना जाता है. इस वजह से कुछ लोग हर मंगलवार और शनिवार को बजरंग बाण का पाठ करते हैं तो कुछ लोग इसे हर दिन पढ़ते हैं. लेकिन कुछ लोगों का मत है कि बजरंग बाण का पाठ नहीं करना चाहिए. बजरंग बाण का पाठ करने से जो उर्जा निकलती है, वह काफी उग्र होती है. यह आम व्यक्ति के वश की बात नहीं है कि उसे संभाल सके. यदि उस ऊर्जा को संभाला नहीं गया तो उससे स्वयं को हानि हो सकती है. इस बात से लोगों में कन्फ्यूजन की स्थिति बन जाती है कि बजरंग बाण का पाठ करें या न करें?

बजरंग बाण न पढ़ने की वज​ह

जब आप बजरंग बाण पढ़ते हैं तो उसके एक हिस्से में हनुमान जी के अतुलित बल और पराक्रम का वर्णन किया गया है, जबकि दूसरे हिस्से में हनुमान जी को कार्य के लिए राम जी की शपथ दी जाती है. वहीं कुछ जगह ऐसा लगता है कि बजरंगली को आदेश दिया जा रहा है. वो चौपाई नीचे दी गई हैं, जिनकी वजह से लोग बजरंग बाण पाठ न करने की बात कहते हैं.

1. जय गिरिधर जय जय सुखसागर।
सुर-समूह-समरथ भट-नागर।
ॐ हनु हनु हनु हनुमंत हठीले।
बैरिहि मारु बज्र की कीले।

2. गदा बज्र लै बैरिहि मारो।
महारज प्रभु दास उबारो।
ओंकार हुंकार महाबीर धावो।
वज्र गदा हनु बिलम्ब न लावो।

3.भूत प्रेत पिशाच निशाचर,
अग्नि बैताल काल मारीमर।
इन्हें मारु तोहिं सपथ राम की।
राखु नाथ मरजाद नाम की।

बजरंग बाण पढ़ना चाहिए या नहीं?

इस सवाल पर बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शात्री का कहना है कि बजरंग बाण का पाठ सामान्य तौर पर नहीं करना चाहिए. आप जब बजरंग बाण का पाठ करते हैं, तो उसमें हनुमान जी को उनके प्रभु श्रीराम और माता जानकी की शपथ दिलाई जाती है. उनको विवश किया जाता है कि आप हमारा काम कर दें. यदि आप किसी से प्रेम करते हैं तो उसे शपथ दिलाने की क्या जरूरत है?

आगे वे कहते हैं कि बजरंग बाण का पाठ उस स्थिति में ही करना चाहिए, जब तक पानी आपके सिरे के ऊपर न जाने लगे. जब तब अतिआवश्यक न हो, तक तक बजरंग बाण नहीं पढ़ना चाहिए. संकट ऐसा आन पड़ा है कि अब आपके जीवन पर वह भारी है. आपके पास कोई और विकल्प नहीं बचा है. ऐसी स्थिति में आप बजरंग बाण का पाठ कर सकते हैं. इसे पुरुष और महिला दोनों ही पढ़ सकते हैं.

यशगान के तौर पर करें बजरंग बाण का पाठ

बजरंग बाण के पाठ करने पर वृंदानवन के प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि यदि आप भक्ति की भावना से भगवान के यश का गान कर रहे हैं तो बजरंग बाण का पाठ करने में कोई बुराई नहीं है. आप हनुमान जी की महिमा का गान कर रहे हैं, बजरंग बाण पाठ करने का सही उद्देश्य भव रोग का नाश करना है. नाशै रोग हरै सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा.

बजरंग बाण पढ़ने के सवाल पर ही रसराज जी महाराज कहते हैं कि आप सोचते हैं कि कोई मंत्र है, उसे पढ़ दोगे तो हनुमान जी क्रोधित हो जाएंगे. कुछ लोग कहते हैं कि इसमें हनुमान जी को शपथ दी गई है, उनसे अपना काम करने को कहा गया है…अगर बजरंग बाण में ऐसा कहा गया है तो हनुमानाष्टकम् में क्या कहा गया है…बेगि हरो हनुमान महाप्रभु, जो कछु संकट होय हमारो. बेगि हरो मतलब जल्दी हरो. हनुमान जी से बाहर के संकट को ही नहीं, मन के अंदर के संकट जैसे काम, क्रोध, लोभ, मोह आदि को मारने के लिए भी कहा जाता है.

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