यहां है एशिया का सबसे बड़ा ठोकर, भीषण लहरों से दर्जनों गांवों को बचाता, खूबसूरती देख आप भी कहेंगे- वाह!

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Maharajganj Tourist Spot: एशिया का सबसे बड़ा ठोकर वीरभार महराजगंज और कुशीनगर के पास स्थित है, जो तेजी से लोकप्रिय टूरिस्ट स्पॉट बन रहा है. बरसात से पहले इसकी मजबूती को लेकर चिंता भी बढ़ी है, क्योंकि कई हिस्सों में कटान और जर्जर स्थिति देखी गई है.

महराजगंज: यूपी का महराजगंज जिला पड़ोसी देश नेपाल से निकलने वाली नदियों और प्राकृतिक सौंदर्य से सजा हुआ है. नेपाल की पहाड़ों से होकर आने वाली गंडक नदी महराजगंज से होते हुए कुशीनगर के रास्ते बिहार चली जाती है. गंडक नदी पर ही महराजगंज और कुशीनगर के बॉर्डर के नजदीक एशिया का सबसे बड़ा ठोकर मौजूद है. इस ठोकर को एशिया का सबसे बड़ा ठोकर बताया जाता है, जिसे वीरभार ठोकर के नाम से जानते हैं.

इसकी प्राकृतिक सौंदर्य और यहां की खूबसूरती लोगों को खूब आकर्षित कर रही है. साल 1968 से 1973 के बीच बने इस ठोकर ने कई दशकों तक बाढ़ नियंत्रण में बड़ी भूमिका निभाई है. नदी का कटाव हर साल आसपास के गांव के लोगों के लिए चुनौती बनकर सामने आता है, लेकिन इस ठोकर ने इनको सुरक्षा प्रदान की है.

प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है वीरभार ठोकर

एक स्थानीय निवासी विवेक ने लोकल 18 को बताया कि वीरभार ठोकर अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है. एशिया का सबसे बड़ा ठोकर होने की वजह से यह एक टूरिस्ट स्पॉट के रूप में भी जाना जाता है और यहां पर लोग घूमने और इसे देखने के लिए भी आते हैं. देखने पर ही इस ठोकर को ऐसा लगता है कि यह बहुत ही लंबा है और पानी के एक बड़े बहाव को दूसरी दिशा में मोड़ता है.

आसपास के गांव के लिए यह सुरक्षा का एक साधन है, तो वहीं इसके साथ ही एक बड़े पर्यटन स्थल के रूप में भी प्रसिद्ध है. नेपाल से आने वाली नदी गंडक को इस ठोकर से देखने पर एक अद्भुत नजारा दिखता है, जो अपने आप में बेहद खास है.

वीरभार ठोकर के किनारे मछली पकड़ते हैं लोग

वीरभार ठोकर के आसपास स्थानीय लोग मछली भी निकालते हैं. एक बड़ी संख्या में लोग यहां पर आते हैं. इसके किनारों पर जो लोग नाव से मछलियों को पकड़ते हैं, वह दृश्य अपने आप में बेहद खास होता है, जो खूब पसन्द भी किया जाता है. प्रतिदिन यहां आने वाले लोग यहां का फोटो-वीडियो शूट करते हैं और अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट भी करते हैं, जिन्हें खूब पसंद किया जाता है. वीरभार ठोकर के किनारे से सूर्यास्त का नजारा देखने लोग खासतौर पर आते हैं.

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आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.



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