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देश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में शामिल ग्रेटर नोएडा में छोटे और मझोले उद्यमी जमीन की बढ़ती कीमतों से जूझ रहे हैं. गौतमबुद्ध नगर में ई-नीलामी प्रक्रिया के कारण औद्योगिक भूखंडों की लागत इतनी बढ़ गई है कि कई उद्योगपति किराए की फैक्ट्रियों में काम करने को मजबूर हैं. अब उद्योग संगठनों ने इस व्यवस्था में बदलाव की मांग तेज कर दी है.
ग्रेटर नोएडा. गौतमबुद्ध नगर देश के प्रमुख इंडस्ट्रियल हब के रूप में अपनी पहचान बना चुका है. राजस्व के मामले में अग्रणी जिलों में शामिल होने के बावजूद यहां के छोटे और मझोले उद्यमी गंभीर आर्थिक दबाव से जूझ रहे हैं. उद्योगपतियों का कहना है कि जमीन की बढ़ती कीमतों और ई-नीलामी प्रक्रिया ने उनके लिए अपने उद्योग स्थापित करना लगभग असंभव बना दिया है. यही कारण है कि बड़ी संख्या में उद्यमी किराए की फैक्ट्रियों में काम करने को मजबूर हैं.
ई-नीलामी में बढ़ती बोली बनी बाधा
ग्रेटर नोएडा उद्योग उद्यमी संघ के अध्यक्ष संजीव शर्मा के अनुसार, जब भी औद्योगिक भूखंडों की योजना निकलती है, तो उद्यमियों को उम्मीद होती है कि वे आवेदन कर प्लॉट हासिल कर पाएंगे. लेकिन ई-नीलामी की प्रक्रिया में कीमतें इतनी बढ़ जाती हैं कि वास्तविक उद्योग लगाने वाले पीछे छूट जाते हैं. बताया गया कि उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPSIDA) का सर्किल रेट लगभग 12 से 13 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर है. हालांकि, 450 वर्ग मीटर के प्लॉट की बोली प्रक्रिया में कीमत करीब 3 करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है. इतनी ऊंची लागत छोटे और मध्यम उद्यमियों के लिए वहन करना संभव नहीं है.
किराए की फैक्ट्रियों में 30-40% उद्योग
उद्यमी बी.के. तिवारी के अनुसार, वर्तमान में लगभग 30 से 40 प्रतिशत उद्योग किराए की इमारतों में संचालित हो रहे हैं. लगातार बढ़ते किराए के कारण उत्पादन लागत बढ़ जाती है, जिससे बाजार में प्रतिस्पर्धी मूल्य पर उत्पाद बेचना कठिन हो जाता है. एच.एन. शुक्ला का कहना है कि उद्योग की कमाई का बड़ा हिस्सा किराए में चला जाता है. ऐसे में व्यवसाय को टिकाए रखना भी चुनौती बन गया है. उन्होंने कहा कि ई-बिडिंग प्रक्रिया छोटे उद्यमियों के अनुकूल नहीं है और इसमें तकनीकी व आर्थिक दोनों तरह की बाधाएं हैं.
2000 वर्ग मीटर तक के प्लॉट सर्किल रेट पर देने की मांग
उद्यमियों ने मांग की है कि 2000 वर्ग मीटर तक के प्लॉट को ई-नीलामी प्रक्रिया से बाहर रखा जाए और उन्हें सर्किल रेट पर आवंटित किया जाए. उनका तर्क है कि छोटे प्लॉट वास्तविक उद्योग लगाने वालों को दिए जाने चाहिए, ताकि स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिल सके.
आंदोलन की चेतावनी
उद्योग संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो वे विरोध प्रदर्शन करेंगे और आगामी त्योहारों के कार्यक्रमों का बहिष्कार भी कर सकते हैं. उनका कहना है कि यदि जमीन की उपलब्धता और कीमतों की समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो गौतम बुद्ध नगर की औद्योगिक प्रगति प्रभावित हो सकती है.
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पिछले 4 साल से मीडिया इंडस्ट्री में काम कर रही हूं और फिलहाल News18 में कार्यरत हूं. इससे पहले एक MNC में भी काम कर चुकी हूं. यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की बीट कवर करती हूं. खबरों के साथ-साथ मुझे…और पढ़ें


