बेटा बहराइच में, बेटी अमेरिका में, कृषि में लहरा रहा परिवार का परचम, जानें डॉ. डीपी सिंह की कहानी

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बहराइच : कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले डॉ डी.पी सिंह का जीवन किसानों के लिए प्रेरणा है. रामपुर में जन्मे इस वैज्ञानिक ने दलहन की कई उन्नत प्रजातियां विकसित कीं. सेवानिवृत्ति के बाद भी वे किसानों को मार्गदर्शन दे रहे हैं और नई पीढ़ी को कृषि नवाचार की राह दिखा रहे हैं.

रामपुर से शोध निदेशक तक का सफर
उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में जन्मे डॉ डी.पी सिंह बचपन से ही कृषि के प्रति समर्पित रहे. किसान परिवार में पले-बढ़े होने के कारण उन्होंने कृषि शिक्षा को अपना लक्ष्य बनाया. कठिन परिश्रम और शोध के बल पर वे निदेशक शोध के पद तक पहुंचे. अपने कार्यकाल में उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित कई क्षेत्रों में कृषि अनुसंधान को नई दिशा दी.

दलहन पर गहन शोध और 40 से अधिक प्रजातियां
डॉ सिंह ने अपने वैज्ञानिक करियर में दलहन फसलों पर विशेष कार्य किया. अरहर, मूंग, उड़द और चना सहित 40 से अधिक दलहन प्रजातियों पर शोध कर किसानों को उन्नत बीज उपलब्ध कराए. उनकी विकसित किस्मों में नरेंद्र अरहर-1 और नरेंद्र अरहर-2 प्रमुख हैं, जिनसे आज यूपी और बिहार के किसान लाभान्वित हो रहे हैं. मसूर में पंत मसूर-5, पंत मसूर-8 और पंत मसूर-9 जैसी प्रजातियां भी उनके नेतृत्व में विकसित हुईं.

फैजाबाद और पंतनगर में विकसित किस्में
उनकी कई प्रजातियां फैजाबाद और पंतनगर में विकसित की गईं. नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय में नरेंद्र मसूर-1 का विकास भी उनके निर्देशन में हुआ. चने की खेती में भी उन्होंने लगभग 30 से 35 वर्ष पूर्व महत्वपूर्ण शोध कार्य किया, जिसकी किस्में आज भी धान के खेतों में बोई जा रही हैं और किसानों को बेहतर उत्पादन दे रही हैं.

परिवार में भी कृषि की विरासत
डॉ सिंह का योगदान केवल उनके शोध तक सीमित नहीं है. उनके इकलौते पुत्र डॉ शैलेंद्र सिंह बहराइच जिले के कृषि विज्ञान केंद्र में प्रभारी अधिकारी द्वितीय के पद पर कार्यरत हैं. उनकी एक बेटी अमेरिका में कृषि क्षेत्र में आधुनिक एआई तकनीक के माध्यम से खेती को नई दिशा दे रही है. दूसरी बेटी भी पीएचडी कर कृषि अनुसंधान में योगदान दे रही है.

बहराइच के किसानों को दी महत्वपूर्ण सलाह
हाल ही में बहराइच दौरे पर आए डॉ सिंह ने स्थानीय किसानों से संवाद किया. उन्होंने कहा कि किसान केवल धान और गेहूं तक सीमित न रहें, बल्कि दलहन और मिलेट्स को भी अपनी खेती में शामिल करें. उन्होंने बताया कि कई दलहन प्रजातियां कम समय में पक जाती हैं और बाढ़ के बाद भी बोई जा सकती हैं, जिससे अतिरिक्त आय संभव है.

दलहन और मिलेट्स से बढ़ेगा मुनाफा
डॉ सिंह ने किसानों को मक्का, बाजरा जैसे मिलेट्स की खेती बढ़ाने की सलाह दी. उनके अनुसार फसल विविधीकरण से मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहती है और किसानों की आय में वृद्धि होती है. बहराइच के किसानों ने उनकी सलाह को सराहा और इसे अपनाने का संकल्प लिया.

कृषि नवाचार का प्रेरणास्रोत व्यक्तित्व
डॉ डी.पी सिंह का जीवन इस बात का उदाहरण है कि समर्पण और शोध के माध्यम से कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाए जा सकते हैं. सेवानिवृत्ति के बाद भी उनका मार्गदर्शन किसानों और युवा वैज्ञानिकों के लिए प्रेरणा बना हुआ है.



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