रांची के प्रभाकर ने मछली पालन से 6 लाख कमाए, जानें उनकी कहानी

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Ranchi Success Story : झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले प्रभाकर की कोरोना में नौकरी छूट गई थी. इसके बाद वह रांची में ही मछली पालन का कार्य शुरू किया. जहां सोलर पैनल और चार तालाब बनवाए. आज वह घर बैठे ही सालाना 6 लाख रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं. इसके साथ ही खुद की बुलेट गाड़ी भी खरीद लिए हैं.

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रांची : झारखंड की राजधानी रांची के समीप मांडर ब्लॉक के रहने वाले प्रभाकर पहले दिल्ली में जॉब करते थे. उनकी तैनाती सेल्स डिपार्टमेंट में थी, लेकिन कोरोना के समय उनकी नौकरी छूट गई. इसके बाद वह अपने शहर रांची आ गए. यहां की भी हालत बहुत ही खराब थी. उन्होंने बताया कि हालांकि उनका अपना 2 छोटा तालाब था, लेकिन उसमें कुछ होता नहीं था. फिर उन्होंने अपना दिमाग लगाकर उन दोनों तालाब में मछली पालन का काम शुरू कर दिया.

प्रभाकर ने आगे बताया कि इसके बाद उन्होंने उन्हीं तालाबों के बगल में 2 और दो तालाब बनवाए. अब आलम यह है कि 50 क्विंटल तक की बिक्री कर लेते हैं. यहां सबसे खास बात यह है कि सरकार के योजना के तहत सोलर पैनल भी मिला हुआ है. बिजली और पानी की कोई टेंशन नहीं है. अब 4 महीना में उनकी लगभग 6 लाख तक की आमदनी हो जाती है. प्रभाकर हंसते हुए बताते हैं कि यह अलग बात है कि 1 लाख तक का चारा भी खिलाना पड़ता है. हालांकि अब उनके पास अपना खुद का रोजगार है.

मछली का होना चाहिए गुणवत्ता वाला चारा

प्रभाकर ने आगे बताया कि मछलियों के खाने की गुणवत्ता बहुत जरूरी होती है. आप मछली को कैसा खाना खिलाते हैं. उसी प्रकार फिर मछली का स्वास्थ्य भी देखने को मिलता है. इसीलिए जितनी आमदनी होती है. हम कोशिश करते हैं कि इसी में इन्वेस्ट करते रहें. अगर क्वालिटी शानदार होगी तो फिर आपको सोचने की जरूरत नहीं पड़ेगी. लोग यहीं से आकर ले जाते हैं. जहां कुछ मार्केट में बिकता है और कुछ दूसरे जिले जैसे गुमला, लातेहार व नेतरहाट के लोग ले जाते हैं.

प्रभाकर ने बताया कि दूसरी चीज जो ध्यान रखनी पड़ती है. वह फंगल इन्फेक्शन है. क्योंकि, मछली में फंगल इन्फेक्शन बहुत जल्दी होता है. ऐसे में एंटीफंगल दवाइयां का छिड़काव करना समय-समय पर काफी जरूरी है. हम हर चौथे दिन इस पर नजर रखते हैं कि कहीं कोई इंफेक्शन तो नहीं हो रहा है. जो मछली हल्की भी पीड़ित पाई जाती है. हम उसे तुरंत तालाब से निकाल लेते हैं. इससे अन्य मछलियां को रोग नहीं हो पाता है.

आज मछली बिजनेस से खुद का है बुलेट

चेहरे पर हल्की सी स्माइल के साथ प्रभाकर बताते हैं कि पहले खाने के लिए सोचना पड़ता था. कोरोना में हालात ऐसा हो गया था कि लगता था अब क्या होगा, लेकिन आज मेरे पास लाखों रुपये वाली बुलेट है, जिसकी वह सवारी करते हैं. यह सब इस मछली पालन की वजह से ही हुआ है, लेकिन आपको इसमें समय देना होगा. आप पानी में फिल्ट्रेशन मशीन जरूर लगाएं. क्योंकि पानी अगर साफ रहेगा तो फंगल इन्फेक्शन होने का खतरा कम रहेगा और मछली की गुणवत्ता बढ़ेगी. इन सारी चीजों पर वह अधिक ध्यान देते हैं.

About the Author

Brijendra Pratap Singh

बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में लगभग 4 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटेंट राइटर…और पढ़ें



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