Deoghar Dr Sudhir Singh sets example of service after defeating cancer inspiring story

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Deoghar Dr.Sudhir Kumar Singh Story: देवघर के जाने-माने फिजिशियन डॉ. सुधीर कुमार सिंह की कहानी संघर्ष और अटूट हौसले की मिसाल है. साल 2011 में गले के कैंसर ने उनसे उनकी प्राकृतिक आवाज छीन ली, लेकिन उनके सेवा के जज्बे को नहीं डिगा सकी. आज वह गले में लगी एक मशीन के सहारे बोलकर मरीजों का इलाज कर रहे हैं. इस महंगाई के दौर में भी वह गरीबों का मुफ्त इलाज कर मानवता की नई इबारत लिख रहे हैं.

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देवघर: कहते हैं कि सेवा का जज्बा अगर सच्चा हो, तो मौत को भी मात दी जा सकती है. देवघर के जाने-माने फिजिशियन डॉक्टर सुधीर कुमार सिंह इसी जज्बे का दूसरा नाम हैं. बीते करीब 40 वर्षों से वह देवघर में अपनी चिकित्सा सेवा के जरिए हजारों लोगों के जीवन में खुशियां बांट रहे हैं. उनका क्लीनिक महज एक दवाखाना नहीं, बल्कि भरोसे का वह केंद्र है, जहां मरीज इलाज के साथ-साथ अपनापन भी महसूस करते हैं.

कैंसर से जंग और हौसले की जीत
डॉक्टर सुधीर सिंह के जीवन में साल 2011 में एक ऐसा मोड़ आया, जिसने सब कुछ बदल दिया. अचानक खांसी के साथ खून आने की शिकायत हुई और जांच में गले का कैंसर होने की पुष्टि हुई. यह खबर किसी भी इंसान को मानसिक रूप से तोड़ सकती थी, लेकिन डॉक्टर सुधीर ने हिम्मत नहीं हारी. वह इलाज के लिए दिल्ली के मेदांता अस्पताल गए और कैंसर के खिलाफ एक लंबी व कठिन लड़ाई लड़ी. कई महीनों के इलाज और जटिल ऑपरेशन के बाद उन्होंने इस जानलेवा बीमारी को मात तो दे दी, लेकिन इसकी एक भारी कीमत भी चुकानी पड़ी.

छीन ली आवाज, पर नहीं कम हुआ सेवा का जज्बा
बीमारी और ऑपरेशन के कारण डॉ.सुधीर की प्राकृतिक आवाज हमेशा के लिए छिन गई. अब वह गले में लगी एक मशीन की मदद से बोल पाते हैं. आवाज भले ही पहले जैसी नहीं रही और अब उसमें एक मशीनी झंकार सुनाई देती है, लेकिन उनके हौसले और मरीजों के प्रति प्रेम में रत्ती भर भी कमी नहीं आई है. स्वस्थ होने के बाद वह फिर से उसी ऊर्जा के साथ अपनी सेवा में जुट गए.

महंगाई के दौर में मानवता की मिसाल
आज जहां देवघर जैसे शहरों में डॉक्टरों की फीस 600 से 800 रुपये तक पहुंच गई हैं. वहीं डॉ.सुधीर मात्र 250 रुपये फीस लेते हैं. इतना ही नहीं गरीब और जरूरतमंद मरीजों का इलाज वह आज भी पूरी तरह निशुल्क करते हैं. उनका मानना है कि चिकित्सा केवल कमाई का जरिया नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का सबसे बड़ा माध्यम है.

मरीज कहते हैं धरती के भगवान
मरीजों के बीच डॉ.सुधीर सिंह की छवि एक मसीहा की है. मरीज अभिनंदन प्रसाद कहते हैं कि आज के दौर में ऐसे डॉक्टर मिलना मुश्किल है जिन्हें पैसे से ज्यादा इंसानियत की फिक्र हो. वहीं साल 1975 से उनसे इलाज करा रहे विनय कुमार राय बताते हैं कि डॉ.सुधीर कभी बेवजह महंगी दवाइयां या गैर-जरूरी टेस्ट नहीं लिखते. अक्सर उनकी लिखी दवाइयों का खर्च 100 रुपये से भी कम होता है. डॉक्टर सुधीर कुमार सिंह की यह कहानी सिर्फ एक चिकित्सक की सफलता नहीं, बल्कि संघर्ष, सेवा और अटूट मानवीय संवेदनाओं की एक जीवंत मिसाल है, जो नई पीढ़ी के डॉक्टरों के लिए एक प्रेरणा पुंज है.

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Amit ranjan

मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें



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