नई दिल्ली: भारत की सैन्य ताकत और आत्मनिर्भर रक्षा तकनीक का एक खास पल आज शुक्रवार को राजस्थान के आसमान में देखने को मिलेगा. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जब जैसलमेर एयर फोर्स स्टेशन से स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर ‘प्रचंड’ में उड़ान भरेंगी. भारतीय सशस्त्र बलों की सुप्रीम कमांडर के रूप में उनकी यह उड़ान उस हेलीकॉप्टर में होगी. प्रचंड को खास तौर पर दुर्गम पहाड़ी इलाकों और युद्ध परिस्थितियों के लिए तैयार किया गया है. यही वजह है कि ‘प्रचंड’ को भारत का ‘बाहुबली’ हेलिकॉप्टर भी कहा जाता है.
यह उड़ान इंडियन एयरफोर्स की ‘वायु शक्ति’ अभ्यास से पहले होगी, जहां देश अपनी एयर पावर और तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन करता है. मेक इन इंडिया के तहत विकसित यह हेलीकॉप्टर सिर्फ एक मशीन नहीं, बल्कि कारगिल युद्ध से मिले सबक का परिणाम है. उच्च ऊंचाई पर युद्ध लड़ने की जरूरत ने भारत को अपना अटैक हेलीकॉप्टर बनाने के लिए प्रेरित किया. आज वही सपना ‘प्रचंड’ के रूप में साकार हो चुका है. राष्ट्रपति की यह उड़ान स्वदेशी रक्षा उद्योग के लिए एक मजबूत संदेश भी मानी जा रही है.
उच्च ऊंचाई वाले युद्ध क्षेत्रों में भारत को सामरिक बढ़त दिलाने में ‘प्रचंड’ अहम भूमिका निभाता है. (फाइल फोटो PTI)
‘प्रचंड’ हेलिकॉप्टर की पूरी कहानी: विकास से लेकर ताकत तक
- लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर ‘प्रचंड’ का विकास हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने किया. इसकी शुरुआत 1999 के कारगिल युद्ध के बाद हुई, जब भारतीय सेना को ऊंचे पहाड़ी इलाकों में ऑपरेट करने वाले अटैक हेलीकॉप्टर की कमी महसूस हुई. साल 2006 में प्रोजेक्ट शुरू हुआ और 29 मार्च 2010 को इसकी पहली उड़ान हुई. कई कठिन परीक्षणों के बाद 2022 में इसे भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया.
- ‘प्रचंड’ दुनिया का एकमात्र अटैक हेलीकॉप्टर माना जाता है जो 15,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर प्रभावी ऑपरेशन कर सकता है. सियाचिन जैसे बेहद कठिन इलाकों में इसकी सफल लैंडिंग ने इसकी ताकत साबित कर दी. इसमें स्वदेशी तकनीक का बड़ा हिस्सा शामिल है और लगातार इसे और अधिक भारतीय बनाया जा रहा है.
- यह हेलीकॉप्टर 5.8 टन वजन का मल्टी-रोल अटैक प्लेटफॉर्म है. इसमें टैंडेम कॉकपिट डिजाइन, स्टेल्थ फीचर्स, डिजिटल एवियोनिक्स और नाइट ऑपरेशन क्षमता है. दो शक्तिशाली इंजन इसे ऊंचाई पर भी पूरी ताकत से उड़ान भरने में सक्षम बनाते हैं.
राष्ट्रपति मुर्मू किस हेलीकॉप्टर में उड़ान भरेंगी और यह क्यों खास है?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर ‘प्रचंड’ में उड़ान भरेंगी. यह भारत में विकसित पहला अटैक हेलीकॉप्टर है जिसे खास तौर पर उच्च ऊंचाई वाले युद्ध क्षेत्रों के लिए डिजाइन किया गया है. इसकी उड़ान भारत की आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता और स्वदेशी तकनीक पर भरोसे का प्रतीक मानी जा रही है.
’प्रचंड’ हेलीकॉप्टर को ‘बाहुबली’ क्यों कहा जाता है?
इसे ‘बाहुबली’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी ऑपरेट कर सकता है. सियाचिन जैसी ऊंचाई, बेहद ठंड और कम ऑक्सीजन वाले वातावरण में भी इसकी परफॉर्मेंस स्थिर रहती है. इसकी मारक क्षमता, स्टेल्थ तकनीक और बहु-भूमिका ऑपरेशन क्षमता इसे बेहद शक्तिशाली बनाती है.
इसकी तकनीकी खासियतें क्या हैं?
’प्रचंड’ में हेलमेट माउंटेड साइट, नाइट विजन सिस्टम, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर और मिसाइल डिफेंस सिस्टम मौजूद हैं. इसमें 20mm गन, रॉकेट्स और एंटी-टैंक मिसाइलें लगाई जा सकती हैं. यह 280 किमी प्रति घंटे की गति से उड़ सकता है और लगभग 700 किमी तक मिशन पूरा कर सकता है.
यह हेलीकॉप्टर किन मिशनों में इस्तेमाल होता है?
यह एंटी-टैंक ऑपरेशन, काउंटर-इंसर्जेंसी, एयर सपोर्ट, सर्च एंड रेस्क्यू और सीमावर्ती इलाकों में निगरानी जैसे मिशनों में उपयोगी है. दुश्मन के बंकर और ड्रोन को निशाना बनाने में भी यह सक्षम है.
भारत की रक्षा रणनीति में ‘प्रचंड’ कितना महत्वपूर्ण है?
उच्च ऊंचाई वाले युद्ध क्षेत्रों में भारत को सामरिक बढ़त दिलाने में ‘प्रचंड’ अहम भूमिका निभाता है. चीन सीमा और लद्दाख जैसे क्षेत्रों में इसकी तैनाती भारत की एयर कॉम्बैट क्षमता को मजबूत करती है. भविष्य में इसके निर्यात की योजना भी भारत को रक्षा उत्पादन में वैश्विक खिलाड़ी बना सकती है.


