फागुन-चैत में खाया दही तो फायदे की जगह करेगा नुकसान…इन लोगों को भूलकर नहीं करना चाहिए सेवन! आयुर्वेद के नियम

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Dahi Consumption As Per Ayurveda: समस्तीपुर स्वास्थ्य केंद्र के डॉ. रंजन कुमार के अनुसार फागुन-चैत में दही का सेवन कफ और पाचन समस्याएं बढ़ा सकता है. इस मौसम में दही का सेवन नहीं करना चाहिए, साथ ही लोगों को अपने स्वास्थ्य के मुताबिक ही दही, मट्ठा या दही के अन्य प्रकार का सेवन करना चाहिए.

समस्तीपुर. समस्तीपुर जिले के एक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत आयुर्वेदाचार्य डॉ. रंजन कुमार के अनुसार फरवरी-मार्च यानी फागुन-चैत के दौरान दही का सेवन सोच-समझकर करना चाहिए. उन्होंने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि आयुर्वेद में दही को अभिष्यंदी कहा जाता है. अभिष्यंदी का अर्थ है ऐसा आहार जो शरीर की नाड़ियों में रुकावट पैदा कर सकता है.

फागुन-चैत का समय बसंत ऋतु में आता है, जब सर्दी से गर्मी की ओर मौसम बदल रहा होता है. इस बदलाव के समय शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता और पाचन शक्ति प्रभावित होती है. ऐसे में दही का सेवन कफ को बढ़ा सकता है और सर्दी-खांसी, गले में खराश या एलर्जी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं.

किन ऋतुओं में दही वर्जित और कब लाभकारी
समस्तीपुर स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा पदाधिकारी सह आयुर्वेदाचार्य डॉ. रंजन कुमार ने बताया कि आयुर्वेदिक ग्रंथों में साफ उल्लेख है कि शरद, ग्रीष्म और बसंत ऋतु में दही का सेवन हानिकारक माना गया है. इन ऋतुओं में दही कफ और पाचन से जुड़ी समस्याओं को बढ़ा सकता है. खासकर मार्च-अप्रैल में जठराग्नि यानी पाचन शक्ति कमजोर होती है, जिससे दही पचाना कठिन हो जाता है.

इसके विपरीत हेमंत और शिशिर ऋतु में दही का सेवन लाभकारी माना गया है, क्योंकि इस समय पाचन शक्ति मजबूत रहती है. शिशिर ऋतु छठ के बाद से होली तक मानी जाती है. वर्षा ऋतु में भी सीमित मात्रा में दही लिया जा सकता है, लेकिन बसंत से जुलाई तक नियमित सेवन से बचना बेहतर है. जिन लोगों को अस्थमा, एलर्जी या बार-बार जुकाम की समस्या होती है, उन्हें इस अवधि में खास सावधानी बरतनी चाहिए.

कैसे करें दही का सही सेवन
आयुर्वेदाचार्य के अनुसार गाढ़ा और जमा हुआ दही अधिक अभिष्यंदी होता है और शरीर में रुकावट पैदा कर सकता है. यदि दही का सेवन करना हो तो उसे फेंटकर या मट्ठा के रूप में लेना ज्यादा उचित है, क्योंकि यह हल्का और आसानी से पचने वाला होता है. जिन लोगों को अर्श यानी पाइल्स की समस्या है, उनके लिए सीधा दही नुकसानदायक हो सकता है, जबकि मट्ठा पाचन शक्ति को संतुलित करने में सहायक होता है.

उन्होंने सलाह दी कि किसी भी आहार का चयन मौसम और शरीर की प्रकृति यानी वात, पित्त, कफ के अनुसार करना चाहिए. फागुन-चैत में दही का सेवन करने से पहले अपनी पाचन क्षमता और स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी है, ताकि स्वाद के साथ सेहत भी सुरक्षित रह सके.

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Raina Shukla

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें



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