दरअसल, राउज अवेन्यू कोर्ट ने कथित आबकारी नीति घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में शुक्रवार को अपना फैसला सुनाया. सीबीआई यानी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दाखिल आरोपपत्र का संज्ञान लेने से इनकार करते हुए दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को बरी कर दिया. इस केस में फैसला देने वाले जज का नाम है जस्टिस जितेंद्र सिंह. जी हां, विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने ही सीबीआई को फटकार लगाई और अरविंद केजरीवाल को राहत दी.
स्पेशल जज जितेंद्र सिंह ने सुनाया फैसला
स्पेशल जज जितेंद्र सिंह ने कहा कि सीबीआई के आरोप पत्र में कई ऐसी कमियां हैं, जिनका सबूतों से समर्थन नहीं मिलता. उन्होंने आदेश पारित करते हुए कहा कि सीबीआई ने बिना किसी ठोस सामग्री के दोनों नेताओं को मामले में फंसाया. उन्होंने चार्जशीट में कई खामियों (lacunae) की ओर इशारा करते हुए कहा कि उसमें लगाए गए आरोप किसी गवाह या बयान से समर्थित नहीं हैं. बता दें कि सीबीआई आम आदमी पार्टी (आप) की पूर्ववर्ती सरकार द्वारा अब रद्द की जा चुकी आबकारी नीति के निर्माण और कार्यान्वयन में कथित भ्रष्टाचार की जांच कर रही है.
जांच एजेंसी CBI आरोपों को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त और ठोस सामग्री पेश करने में विफल रही. (फाइल फोटो)
कौन हैं विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह?
स्पेशल जज जितेंद्र सिंह दिल्ली कोर्ट के एक अनुभवी जज हैं. वह दिल्ली ज्यूडिशियल सर्विस के एक सीनियर न्यायिक अधिकारी हैं. वह वर्तमान में नई दिल्ली के राउज एवेन्यू डिस्ट्रिक्ट कोर्ट कॉम्प्लेक्स में स्पेशल जज (पीसी एक्ट) सीबीआई-01 के पद पर तैनात हैं. यहां पर वे भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से संबंधित मामलों. वह विशेष रूप से सीबीआई द्वारा जांचे जाने वाले केसों की सुनवाई करते हैं. उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से लॉ की डिग्री हासिल की है. अक्टूबर 2024 में उन्हें एडिशनल सेशंस जज बनाया गया था. जितेंद्र सिंह ईमानदार और सख्त जज माने जाते हैं.
दिल्ली शराब घोटाला केस के फैसले में और क्या?
- स्पेशल जज जितेंद्र सिंह की बेंच ने कहा कि मनीष सिसोदिया के खिलाफ प्रथम दृष्टया (prima facie) मामला नहीं बनता. वहीं, अरविंद केजरीवाल को बिना किसी ठोस साक्ष्य के आरोपित किया गया. अदालत ने इस मामले में सभी 23 आरोपियों को डिस्चार्ज कर दिया और किसी के खिलाफ भी आरोप तय करने से इनकार कर दिया. इसके साथ ही अदालत ने जांच में खामियों को लेकर सीबीआई को फटकार भी लगाई.
- कोर्ट ने फेयर ट्रायल पक्का करने के लिए फेयर जांच की अहमियत पर जोर दिया. कोर्ट ने यह साफ माना कि प्रॉसिक्यूशन यानी सीबीआई अपने आरोपों को साबित करने में नाकाम रही. मनीष सिसोदिया के बारे में कोर्ट ने कहा कि सीबीआई के लगाए गए आरोपों में दम नहीं था, कोई क्रिमिनल साज़िश साबित नहीं हो सकी, और प्रॉसिक्यूशन अपना केस साबित नहीं कर पाया.
12 फरवरी को फैसला सुरक्षित रहा था
यह फैसला तब आया जब कोर्ट ने 12 फरवरी को सीबीआई और बचाव पक्ष की डिटेल्ड दलीलों के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के साथ इस केस में 21 और लोगों पर भी आरोप थे. जिस समय यह मामला सामने आया, उस समय केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री और मनीष सिसोदिया उनके डिप्टी थे.
सीबीआई कोर्ट से बरी होने के बाद अरविंद केजरीवाल रो पड़े.
चलिए जानते हैं कोर्ट में क्या-क्या हुआ
- अदालत में आज यानी शुक्रवार को सुनवाई के दौरान अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया पेश हुए. के कविता, अमनदीप ढल और कई अन्य आरोपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए. इस दौरान जज ने हर वकील का धन्यवाद किया और अपना फैसला सुनाया.
- राऊज एवेन्यू कोर्ट ने अपना फैसला देते हुए कथित शराब घोटाला से जुड़े सीबीआई केस में सभी 23 आरोपियों को बरी किया. कोर्ट ने जांच में कमियों के लिए सीबीआई को कड़े शब्दों में फटकार लगाई और कहा कि आबकारी नीति में कोई बड़ी साजिश या क्रिमिनल इरादा नहीं था.
- कोर्ट ने सीबीआई की चार्जसीट पर सवाल उठाए और कहा कि इसमें कई कमियां हैं, जिनका किसी गवाह या बयान से कोई सबूत नहीं है. अदालत ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष का मामला न्यायिक जांच में टिक नहीं पाया, क्योंकि सीबीआई ने महज अनुमान के आधार पर साजिश की कहानी गढ़ने की कोशिश की.
- सीबीआई की तरफ से कंफेशनल स्टेटमेंट की कॉपी जमा नहीं किए जाने पर जज जीतेंद्र सिंह ने नाराजगी व्यक्त की. चार्जशीट में ‘साउथ लॉबी’ शब्द के इस्तेमाल पर भी अदालत ने आपत्ति जताई.
अब सीबीआई क्या करेगी?
दिल्ली सरकार की पूर्व आबकारी नीति घोटाला मामले में राउस एवेन्यू कोर्ट के फैसले के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की जा सकती है. सीबीआई सूत्र के मुताबिक, सीबीआई मुख्यालय के अधिकारी इस मामले में कानूनी सलाह ले रहे हैं. अगले दो दिनों के अंदर सीबीआई द्वारा हाईकोर्ट में अपील की जा सकती है.
क्या है यह मामला
यह मामला दिल्ली सरकार की 2021-22 की आबकारी (शराब) नीति से जुड़ा है, जिसमें भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे. दिल्ली के मुख्य सचिव रहे नरेश कुमार की रिपोर्ट के बाद उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने सीबीआई जांच की सिफारिश की थी. बाद में सीबीआई ने मुकदमा दर्ज करते हुए जांच शुरू की थी. 26 फरवरी 2023 को सीबीआई ने इस मामले में मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार किया. 21 मार्च 2024 को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने लंबी पूछताछ के बाद अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार किया था। इसके बाद 26 जून को सीबीआई ने उन्हें जेल से ही हिरासत में ले लिया.


