इस फूल की खेती से बुजुर्ग बना मालामाल, 6 महीने में ही कर ली लाखों की कमाई, संघर्षों से भरा जीवन

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इस फूल की खेती से बुजुर्ग बना मालामाल, 6 महीने में ही कर ली लाखों की कमाई

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Sultanpur News: सुल्तानपुर के प्रतापपुर के रहने वाले किसान पहले पारंपरिक खेती में धान और गेहूं की फसल तैयार करते थे, लेकिन उन्होंने उद्यान विभाग से संपर्क साधा और बाजार के हाव-भाव को समझा. उसके बाद उन्होंने फूलों की खेती शुरू की और अब वह लाखों की कमाई कर रहे हैं.

सुल्तानपुर: कई लोग यह कहते हैं कि खेती-किसानी में उतनी अधिक आय नहीं होती कि उससे लोगों का जीवन चल सके. इसी वजह से लोग महानगरों में नौकरी की चाहत में चले जाते हैं, लेकिन इससे विपरीत सुल्तानपुर के रहने वाले किसान ने ऐसा कारनामा करके दिखाया है कि सब लोग हैरान हैं.

दरअसल सुल्तानपुर के कुड़वार गांव के रहने वाले सत्यनारायण नाम के एक बुजुर्ग, जिनकी उम्र लगभग 70 साल है, वे फूलों की खेती कर रहे हैं और मात्र 6 महीने में लाखों रुपए की कमाई कर रहे हैं. उन्होंने एक बीघा में ग्लाइडोलियस फूल के पौधे लगाए हैं और इन पौधों की संख्या 10 हजार से भी अधिक है. सरकार द्वारा दी जा रही योजनाओं का लाभ लेकर उन्होंने यह बेहतरीन उदाहरण लोगों के सामने पेश किया है.

इस तरह की शुरुआत

सुल्तानपुर के प्रतापपुर के रहने वाले किसान सत्यनारायण तिवारी लोकल 18 से बताते हैं कि वह पहले पारंपरिक खेती में धान और गेहूं की ही फसल तैयार करते थे, लेकिन जब उन्होंने उद्यान विभाग से संपर्क साधा और बाजार के हाव-भाव को समझा, तो उन्हें भी लगा कि पारंपरिक खेती से कुछ अलग करना चाहिए और तभी उन्होंने उद्यान विभाग में संपर्क किया और जिला उद्यान अधिकारी रणविजय सिंह के मार्गदर्शन में उन्होंने ग्लाइडोलियस फूल की शुरुआत की. इससे हुए वैज्ञानिक तरीके से कर रहे हैं.

लगाया है इतना कंद

किसान सत्यनारायण तिवारी ने बताया कि उन्हें उद्यान विभाग द्वारा 10000 ग्लाइडोलियस फूल का कंद मिला है, जिसको उन्होंने लगभग एक बीघा एरिया में लगाया हुआ है. उनके मुताबिक, एक कंद में पांच फूल तैयार होंगे यानी सभी तैयार हो जाते हैं, तो 50 हजार फूल तैयार होंगे और एक फूल की कीमत लगभग 5 रुपए आती है, जिससे वह मात्र 7 महीने की इस खेती में लाखों रुपए की कमाई करते हैं.

इस तरह करते हैं खेती 

ग्लाइडोलियस फूल की खेती करने के लिए सबसे पहले खेतों का उपचार किया जाता है, जिसमें मिट्टी सुधार प्रथम प्रक्रिया है. इसके लिए सबसे पहले खेतों में जैविक छिड़काव करके सड़े हुए गोबर को मिलाया जाता है और उसके बाद इसमें मोटी-मोटी मिट्टी की मेड़ियां बनाई जाती हैं. इस पर कंद को रोपित कर दिया जाता है.

आपको बता दें कि सत्यनारायण तिवारी एक शिक्षित किसान हैं. 70 साल की उम्र में भी वह ग्लाइडोलियस फूल की खेती करके अच्छी कमाई कर रहे हैं. उन्होंने साल 1976 में ग्रेजुएट पास किया. उस समय ग्रेजुएशन की पढ़ाई करना काफी चुनौती पूर्ण हुआ करता था.

About the Author

आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.



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