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धर्मनगरी अयोध्या इन दिनों भक्ति और रंगों के अद्भुत संगम में डूबी हुई है. बसंत पंचमी से शुरू हुआ फाग उत्सव रंगभरी एकादशी के साथ और भी उल्लासपूर्ण हो गया है. राम मंदिर सहित प्रमुख मठ-मंदिरों में भगवान को अबीर-गुलाल अर्पित किए जा रहे हैं और पारंपरिक फाग गीतों के साथ होली का पर्व पूरे श्रद्धा भाव से मनाया जा रहा है.
धर्मनगरी अयोध्या इन दिनों भक्ति और रंगों में सराबोर है. रामलला के मंदिर सहित प्रमुख मठ-मंदिरों में फाग उत्सव की धूम मची हुई है. बसंत पंचमी से शुरू हुआ होली का पर्व अब रंगभरी एकादशी के साथ और भी उल्लास के साथ मनाया जा रहा है.
राम मंदिर अयोध्या में भगवान को अबीर और गुलाल अर्पित किया जा रहा है. भक्त होली के पद गाकर प्रभु को रिझा रहे हैं. मंदिर परिसर में ढोल-मंजीरे की थाप पर भक्ति और उत्साह का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है.
सिर्फ राम मंदिर ही नहीं, बल्कि कनक भवन, हनुमानगढ़ी और अन्य प्रमुख मठ-मंदिरों में भी फाग उत्सव की परंपरा निभाई जा रही है. यहां प्रतिदिन भगवान के साथ फूलों की होली और अबीर-गुलाल की होली खेली जा रही है.
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भक्त भगवान को होली के गीत सुना रहे हैं, पारंपरिक फाग गाए जा रहे हैं और अलग-अलग तरीकों से प्रभु को रिझाने का प्रयास किया जा रहा है. मंदिरों में रंग महल सजाए गए हैं और पूरा वातावरण भक्ति रस से ओतप्रोत है.
संत समाज ने बताया कि बसंत पंचमी से ही यहां होली उत्सव की शुरुआत हो जाती है. रंगभरी एकादशी से प्रतिदिन भगवान के साथ होली खेली जाती है और 4 मार्च को पूरे हर्षोल्लास के साथ होली मनाई जाएगी.
होली से पहले शुरू हुआ यह फाग उत्सव रामनगरी की अनोखी परंपरा को जीवंत करता है, जहां भक्त और भगवान के बीच रंग और प्रेम का अद्भुत संगम देखने को मिलता है. 4 मार्च को अयोध्या में होली का मुख्य उत्सव मनाया जाएगा, लेकिन उससे पहले ही रामनगरी श्रद्धा और रंगों से सराबोर हो चुकी है.
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