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Barabanki Latest News : बाराबंकी जिले के नानमऊ गांव के अंकुश कुमार ने मछली पालन को अपनाकर सफलता की नई कहानी लिखी है. पंगेशियस प्रजाति की बढ़ती बाजार मांग का लाभ उठाते हुए वह दो तालाबों में पालन कर सालाना 4 से 5 लाख रुपये तक का मुनाफा कमा रहे हैं. उनका मॉडल युवाओं के लिए प्रेरणा बन रहा है.
बाराबंकी : जिले में मछली पालन तेजी से लाभकारी व्यवसाय बनता जा रहा है. बढ़ती प्रोटीन की मांग और बदलते खानपान के कारण बाजार में मछली की खपत बढ़ी है. नानमऊ गांव के युवा किसान अंकुश कुमार ने पंगेशियस मछली पालन शुरू कर सालाना 4 से 5 लाख रुपये तक का मुनाफा कमाकर मिसाल पेश की है.
बढ़ती मांग से बढ़ा व्यवसाय
आज के दौर में मछली की मांग लगातार बढ़ रही है. प्रोटीन युक्त आहार की जरूरत और लोगों की बदलती खानपान की आदतों ने बाजार में मछली की खपत को पहले से ज्यादा कर दिया है. यही वजह है कि मछली पालन किसानों और युवाओं के लिए कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाला व्यवसाय बनकर उभर रहा है. इस व्यवसाय की खास बात यह है कि इसे कम पूंजी और सीमित जगह में भी शुरू किया जा सकता है. तालाब या टैंक के माध्यम से छोटे स्तर पर शुरुआत कर धीरे-धीरे इसे बड़े पैमाने पर बढ़ाया जा सकता है.
नानमऊ के अंकुश बने प्रेरणा
बाराबंकी जिले के नानमऊ गांव के रहने वाले अंकुश कुमार ने मछली पालन को अपने करियर के रूप में चुना. उन्होंने बताया कि वह नाइंथ तक पढ़ाई करने के बाद खेती किसानी की ओर मुड़ गए. इसी दौरान उन्हें मछली पालन के बारे में जानकारी मिली. अंकुश ने एक तालाब से शुरुआत की. शुरुआती सफलता मिलने के बाद उन्होंने इसे बढ़ाया और अब दो तालाबों में पंगेशियस प्रजाति की मछली का पालन कर रहे हैं. बाजार में इसकी मांग अधिक होने के कारण उन्हें अच्छा लाभ मिल रहा है.
लागत और मुनाफे का गणित
अंकुश बताते हैं कि एक तालाब में पंगेशियस मछली पालन की लागत लगभग 2 से ढाई लाख रुपये तक आती है. एक तालाब में करीब 3 से 4 हजार मछली के बच्चे डाले जाते हैं. मछली का दाना थोड़ा महंगा होता है, जिससे खर्च बढ़ जाता है. लेकिन मुनाफे की बात करें तो एक साल में करीब 4 से 5 लाख रुपये तक की आय हो जाती है. पंगेशियस प्रजाति की मछली 5 से 6 महीने में तैयार हो जाती है. इसका सिंगल कांटा होने के कारण बाजार में इसकी मांग ज्यादा रहती है.
युवाओं के लिए बेहतर विकल्प
मछली पालन आज युवाओं के लिए रोजगार का अच्छा माध्यम बन रहा है. कम जमीन और सीमित संसाधनों में भी यह व्यवसाय शुरू किया जा सकता है. सही प्रशिक्षण और बाजार की समझ के साथ किसान बेहतर आमदनी हासिल कर सकते हैं.

