भारत को अपना देसी बेबी एस-400 मिल गया है. उसने शुक्रवार को ही इसका सफल परीक्षण किया. इससे अब तुर्की के दम पर पाकिस्तान का इतराना उसके लिए काल बन जाएगा. दरअसल, भारत ने शुक्रवार को शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम द वशोराड्स (The VSHORADS) का सफल परीक्षण किया. यह एक मैन पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम है. इसको डीआरडीओ के साथ मिलकर रिसर्च सेंटर इमैरैट (RCI) ने डिजाइन और डेवलप किया है. रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि काफी शॉर्ट रेंज के इस एयर डिफेंस मिसाइल का तीन परीक्षण किया गया जो पूरी तरह सफल रहे.
ये परीक्षण इतने परफेक्ट थे कि आसमान में दुश्मन के हाई-स्पीड हवाई जहाज या ड्रोन जैसी किसी भी चुनौती को चंद सेकंड में नेस्तनाबूद करने की क्षमता साबित हो गई है. रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज, चांदीपुर से ये तीन फ्लाइट-ट्रायल्स 3 फरवरी 2026 को किए गए थे. लेकिन इसकी बाद में हुई. इन परीक्षणों का मुख्य उद्देश्य वशोराड्स की क्षमता को फिर से सत्यापित करना था. वो भी अलग-अलग स्पीड, रेंज और ऊंचाई पर उड़ने वाले हाई-स्पीड एरियल थ्रेट्स के खिलाफ.
ये एक मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम है, यानी सिपाही इसे कंधे पर रखकर आसानी से इस्तेमाल कर सकता है. जैसे पुराने जमाने में स्ट्रिंगर या इगला मिसाइलें होती थीं, लेकिन अब ये पूरी तरह स्वदेशी और आधुनिक है. इसे रिसर्च सेंटर इमारत (RCI), हैदराबाद ने DRDO की अन्य लैब्स और भारतीय इंडस्ट्री पार्टनर्स के साथ मिलकर डेवलप किया है. इसका मतलब इस मिसाइल में न सिर्फ तकनीक भारतीय है बल्कि प्रोडक्शन भी घरेलू होगा.
परीक्षणों में क्या हुआ?
तीनों टेस्ट में मिसाइलों ने हाई-स्पीड टारगेट्स को विभिन्न थ्रेट सिनेरियो में इंटरसेप्ट किया और पूरी तरह नष्ट कर दिया. एक्सट्रीम एंगेजमेंट पॉइंट – यानी सबसे मुश्किल स्थिति को सफलतापूर्वक पार किया गया. खास बात ये रही कि टेस्ट फाइनल डिप्लॉयमेंट कॉन्फ़िगरेशन में हुए, मतलब असली युद्ध जैसे हालात में. फील्ड ऑपरेटर्स ने खुद टारगेट को एक्वायर किया और मिसाइल फायर की. कोई सिमुलेशन नहीं, रियल-टाइम एक्शन! टेस्ट रेंज पर लगे टेलीमेट्री सिस्टम, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल ट्रैकिंग कैमरे और रडार ने हर मोमेंट को कैप्चर किया. डेटा से साफ साबित हुआ कि VSHORADS किसी भी तरह के हवाई खतरे- चाहे वो कम ऊंचाई पर तेज उड़ान भर रहा हो या हाई अल्टीट्यूड पर, सभी को चकमा नहीं दे सकता.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ, भारतीय सेनाओं और इंडस्ट्री पार्टनर्स को बधाई देते हुए कहा कि VSHORADS के तीन लगातार सफल उड़ान परीक्षण एक बड़ी उपलब्धि हैं. ये सिस्टम जल्द ही हमारी सशस्त्र सेनाओं में शामिल हो जाएगा. उन्होंने इसे भारतीय रक्षा क्षमता में एक महत्वपूर्ण कदम बताया, जो देश की सुरक्षा को और मजबूत बनाएगा.
ये सफलता क्यों मायने रखती है?
आज के युद्ध में ड्रोन, लो-फ्लाइंग क्रूज मिसाइल और छोटे हवाई थ्रेट्स सबसे बड़ा खतरा हैं. VSHORADS जैसा सिस्टम इन्फैंट्री, आर्मर्ड यूनिट्स और फॉरवर्ड पोस्ट्स को तुरंत सुरक्षा दे सकता है. ये सिस्टम न सिर्फ भारतीय सेना, बल्कि नेवी और एयर फोर्स के लिए भी उपयोगी होगा. साथ ही, ये ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ का जीता-जागता उदाहरण है. DRDO के वैज्ञानिकों, टेस्ट टीम और इंडस्ट्री पार्टनर्स की मेहनत रंग लाई है. जॉइंट फोर्सेज के प्रतिनिधि भी इन टेस्ट्स में मौजूद थे, जो दिखाता है कि सिस्टम अब इंडक्शन के लिए पूरी तरह तैयार है.
इस परीक्षण का सबसे बड़ा संदेश पाकिस्तान के लिए है. बीते साल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने बड़ी संख्या में तुर्की से मिले सस्ते ड्रोन्स को भारतीय सीमा में हमले के लिए भेजा था. हालांकि इन सभी ड्रोन्स को भारतीय सेना ने समय रहते नष्ट कर दिया लेकिन इससे एक बड़ी सीख मिली थी कि इन सस्ते ड्रोन्स को मार गिराने के लिए बड़ी-बड़ी महंगी मिसाइलों का इस्तेमाल ठीक नहीं है. अब इस VSHORADS भारतीय सेना की इस कमी को पूरी करेगी. यह बेहद हल्के और कंधे पर रखे जा सकने वाली मिसाइलें हैं जो आसानी से कम ऊंचाई पर उड़ने वाले खतरों को नष्ट कर सकती हैं.

