Success Story: देवरानी-जेठानी की सोच ने बदल दी तकदीर! घर के कमरे में खड़ा कर दिया ये कारोबार, अब खूब बरस रहे हैं नोट

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Jamshedpur Success Story : संध्या रानी महतो और नीलमणि महतो ने डिगी पंचायत, बोड़ाम में ऑयस्टर मशरूम की खेती से गांव में रहकर ही हजारों रुपये कमाए, जिससे स्थानीय बाजारों में भी मांग बढ़ी है.

जमशेदपुर : अक्सर यह धारणा बनाई जाती है कि अगर अच्छी कमाई करनी है तो गांव छोड़कर शहर जाना ही पड़ेगा, लेकिन जमशेदपुर के बोड़ाम प्रखंड की डिगी पंचायत की रहने वाली एक देवरानी-जेठानी की जोड़ी ने इस सोच को पूरी तरह से गलत साबित कर दिया है. संध्या रानी महतो और नीलमणि महतो ने यह दिखा दिया दिया कि अगर सोच सकारात्मक हो और मेहनत सही दिशा में हो तो गांव में रहकर भी अच्छी-खासी आमदनी की जा सकती है. आइये जानते हैं उनके बिजनेस के बारे में.

घर के कमरे में कर रही हैं बिजनेस

देवरानी-जेठानी इन महिलाओं ने अपने घर के एक खाली 10×12 फीट के कमरे को कमाई का जरिया बना लिया है. इस छोटे से कमरे में वह ऑयस्टर मशरूम की खेती कर रही हैं. न ज्यादा जमीन, न भारी निवेश और न ही दिन-रात की कड़ी मेहनत. बस सही जानकारी और लगन के साथ आज वह हर महीने हजारों रुपये कमा रही हैं. उनके पास फिलहाल करीब 150 बैग मशरूम के हैं, जिनसे प्रति बैग लगभग 2 किलो तक मशरूम निकल जाता है.

घर के काम के साथ संभालती हैं बिजनेस

संध्या और नीलमणि बताती हैं कि ऑयस्टर मशरूम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें मेहनत बहुत कम लगती है. केवल 15 से 20 दिन में एक बार मशीन से हल्की नमी (स्प्रे) देनी पड़ती है. इसके अलावा ज्यादा देखरेख की जरूरत नहीं होती है. इसी वजह से वह घर का काम, खेती-किसानी और परिवार की जिम्मेदारियों के साथ-साथ मशरूम की खेती भी आसानी से संभाल लेती हैं.

जानें इस मशरूम की कीमत

उनके द्वारा उगाए गए मशरूम की क्वालिटी इतनी अच्छी है कि बाजार में इसकी मांग लगातार बनी रहती है. स्थानीय बाजारों के अलावा होटल और ढाबों से भी ऑर्डर मिलने लगे हैं. अच्छी क्वालिटी के कारण मशरूम ₹400 से ₹450 प्रति किलो तक बिक जाता है. कई बार तो शहर से लोग खुद गांव तक आकर खरीदारी करते हैं, जो इस बात का सबूत है कि गांव में उत्पादित चीजें भी शहर के बाजार में अपनी जगह बना सकती हैं. यह सफलता की कहानी जमशेदपुर के ग्रामीण इलाकों, खासकर बोड़ाम प्रखंड और डिगी पंचायत के लोगों के लिए प्रेरणा है. संध्या और नीलमणि का मानना है कि अगर गांव में रहकर वैज्ञानिक तरीके से खेती या स्वरोजगार किया जाए तो शहर जाने की मजबूरी खत्म हो सकती है.

आज जब बड़ी संख्या में लोग रोजगार की तलाश में शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं. ऐसे समय में इस देवरानी-जेठानी की जोड़ी साबित करती है कि गांव में भी अवसरों की कोई कमी नहीं है. जरूरत है तो बस सही सोच, थोड़ी हिम्मत और मेहनत की. यही संदेश उनकी कहानी हर उस व्यक्ति को देती है. जो गांव में रहकर कुछ बड़ा करने का सपना देखता है.

About the Author

Brijendra Pratap Singh

बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में लगभग 4 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटेंट राइटर…और पढ़ें



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