मिठास में घुली परंपरा, सिल्वर पैक गिफ्ट सेवई बनी त्योहार की नई पसंद, गोरखपुर का बाजार बना ईद की पहचान

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Gorakhpur latest news : रमज़ान के आखिरी दिनों में गोरखपुर का रहती चौक सेवइयों की मिठास से महक उठा है. ईद नजदीक आते ही दुकानों पर खरीदारों की भीड़ बढ़ गई है. वाराणसी सेवई, किमामी, जर्दा और देसी हाथ की बनी सेवइयों की मांग सबसे ज्यादा है. बाजार की रौनक त्योहार की खुशियों को और खास बना रही है.

गोरखपुर : रमज़ान का महीना शुरू होते ही गोरखपुर के बाजारों में हलचल बढ़ जाती है. जैसे-जैसे ईद करीब आती है. रहती चौक की रौनक अपने चरम पर पहुंच जाती है. सेवइयों की दुकानों पर सुबह से देर रात तक भीड़ लगी रहती है. यहां मिल रही अलग-अलग वैरायटी लोगों को खासा आकर्षित कर रही हैं.

रमज़ान के साथ बढ़ती बाजार की चहल-पहल
गोरखपुर में रमज़ान का महीना आते ही बाजारों की रफ्तार बदल जाती है. शाम होते ही दुकानों पर रौशनी और रौनक दोनों बढ़ जाती हैं. खासकर रहती चौक इलाके में ईद से पहले खरीदारी का अलग ही माहौल नजर आता है. परिवार के लोग एक साथ बाजार पहुंचते हैं. मिठाइयों और सेवइयों की दुकानों पर खरीदारों की कतारें लग जाती हैं.

सेवइयों की दुकानों पर सुबह से रात तक भीड़
रहती चौक में 10 से ज्यादा वैरायटी की सेवइयां हर समय उपलब्ध रहती हैं. लेकिन ईद और बकरीद के मौके पर कुछ खास किस्मों की मांग अचानक बढ़ जाती है. दुकान लगाने वाले शाहरुख बताते हैं कि रमज़ान के आखिरी दस दिनों में बिक्री कई गुना बढ़ जाती है. लोग पहले से ऑर्डर बुक कराते हैं ताकि त्योहार के दिन कोई कमी न रह जाए.

घर में तैयार और बाहर से मंगाई जाती खास वैरायटी
शाहरुख के मुताबिक कुछ सेवइयां स्थानीय कारीगर घर पर ही तैयार करते हैं. वहीं कुछ खास किस्म की सेवइयां वाराणसी और अन्य शहरों से मंगाई जाती हैं. बाहर से आने वाली सेवइयों की बनावट और स्वाद अलग होता है. इसी वजह से ग्राहकों में उनके प्रति खास उत्साह देखा जाता है. दुकानदार गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देते हैं.

सबसे ज्यादा बिकने वाली सेवइयों की किस्में
ईद के मौके पर वाराणसी सेवई की डिमांड सबसे ज्यादा रहती है. यह पतली और मुलायम होती है. पकने पर इसका टेक्सचर बेहद स्मूद रहता है. लड्डू सेवई मोटी और गोलाई में बनी होती है. इसे मीठे दूध के साथ खास अंदाज में तैयार किया जाता है. भूनी सेवई पहले से हल्की भुनी होने के कारण गहरे स्वाद और खुशबू के लिए जानी जाती है. किमामी सेवई ड्राई फ्रूट और घी के साथ बनती है. इसे ईद की शान माना जाता है. जर्दा सेवई हल्के पीले रंग और मीठे स्वाद के साथ परोसी जाती है. हाथ से बनी देसी सेवई पारंपरिक स्वाद के कारण बुजुर्गों की पहली पसंद बनी हुई है. सिल्वर पैक स्पेशल सेवई गिफ्ट पैकिंग में उपलब्ध होती है. लोग इसे रिश्तेदारों को भेजना पसंद करते हैं.

स्वाद के साथ जुड़ी है परंपरा और रिश्तों की मिठास
ईद पर सेवइयां केवल एक मिठाई नहीं बल्कि परंपरा और अपनापन का प्रतीक हैं. कई ग्राहक सालों से एक ही दुकान से सेवइयां खरीदते आ रहे हैं. कुछ परिवार 4 से 5 किलो तक एक साथ खरीदते हैं. ताकि मेहमानों की खातिरदारी में कोई कमी न रहे. रमज़ान के आखिरी दिनों में रहती चौक की गलियों में मीठी खुशबू तैरती रहती है. अलग-अलग वैरायटी और खास स्वाद के कारण यह बाजार ईद से पहले गोरखपुर की सबसे खास पहचान बन जाता है.



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