बच्चों के संस्कार हों या रसोई, चीन की वर्किंग मॉम्स की सफलता का ‘सीक्रेट’ हैं घर के बुजुर्ग! जानें क्‍या है रिटायर्ड पेरेंटिंग

Date:

[ad_1]

Retired Parenting In Chine: आज के भागदौड़ भरे दौर में जब कामकाजी महिलाओं के लिए घर और करियर के बीच संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती बन गया है, तब पड़ोसी देश चीन से एक दिलचस्प ट्रेंड सामने आ रहा है. इसे नाम दिया गया है ‘रिटायर्ड पैरेंटिंग’ (Retired Parenting). सरल शब्दों में कहें तो, रिटायर्ड पैरेंटिंग का अर्थ है घर के बुजुर्गों (दादा-दादी या नाना-नानी) द्वारा अपने पोते-पोतियों की परवरिश और घर की जिम्मेदारियों को पूरी तरह संभाल लेना, ताकि उनके बच्चे (कामकाजी माता-पिता) बिना किसी तनाव के अपने करियर पर ध्यान दे सकें.

हाल ही में साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट (SCMP) और कई अंतरराष्ट्रीय समाजशास्त्रीय रिपोर्टों में यह बात सामने आई है कि चीन की अर्थव्यवस्था और कामकाजी महिलाओं की सफलता के पीछे वहां के ‘रिटायर्ड पैरेंट्स’ की फौज का बहुत बड़ा हाथ है. दरअसल, चीन में प्रतिस्पर्धा इतनी अधिक है कि महिलाओं के लिए ऑफिस के साथ-साथ घर संभालना लगभग असंभव हो जाता है. ऐसे में घर के बुजुर्ग एक मजबूत ‘सपोर्ट सिस्टम’ के रूप में यहां काम करते हैं:

रसोई और घर मैनेजमेंट सिस्‍टम:
घर के बुजुर्ग सुबह से लेकर रात तक की रसोई संभालते हैं. कामकाजी महिलाओं को ऑफिस से लौटने के बाद गरमा-गरम खाना तैयार मिलता है, जिससे उनकी थकान आधी हो जाती है.

बच्चों को संस्कार देना और उनकी देखभाल करना :
स्कूल छोड़ना, लाना और होमवर्क कराना अब बुजुर्गों की दिनचर्या का हिस्सा है. सबसे बड़ी बात यह है कि बच्चों को आया (Nanny) के भरोसे छोड़ने के बजाय, उन्हें अपनों का प्यार और भारतीय परिवारों की तरह ही नैतिक संस्कार मिलते हैं.

डेटा बताते हैं कि चीन के बड़े शहरों जैसे बीजिंग और शंघाई में करीब 70% से अधिक घरों में बुजुर्ग ही बच्चों की परवरिश कर रहे हैं. समाजशास्त्रियों का मानना है कि अगर यह ‘रिटायर्ड पैरेंटिंग’ न होती, तो चीन में महिला वर्कफोर्स (कामकाजी महिलाओं की संख्या) में भारी गिरावट आ सकती थी. यह बुजुर्ग न केवल परिवार को जोड़कर रखते हैं, बल्कि देश की जीडीपी में भी परोक्ष रूप से योगदान दे रहे हैं.

भारत के लिए क्या है सीख?
भारत में भी संयुक्त परिवार (Joint Family) की परंपरा रही है, लेकिन शहरीकरण के कारण न्यूक्लियर फैमिली का चलन बढ़ा है. ऐसे में चीन का यह ‘रिटायर्ड पैरेंटिंग’ मॉडल हमें फिर से दादा-दादी या नाना-नानी के साथ के महत्‍व को बताती है.

बुजुर्ग बोझ नहीं, शक्ति हैं:
रिटायरमेंट के बाद बुजुर्गों को अकेला छोड़ने के बजाय उन्हें परिवार की मुख्य धारा में शामिल करना दोनों पीढ़ियों के लिए फायदेमंद है.

मानसिक स्वास्थ्य:
जब कामकाजी मां को पता होता है कि उसका बच्चा सुरक्षित हाथों में है, तो उसका मानसिक तनाव कम होता है और कार्यक्षमता बढ़ती है.

‘रिटायर्ड पैरेंटिंग’ महज एक व्यवस्था नहीं, बल्कि प्यार और जिम्मेदारी का वह पुल है जो दो पीढ़ियों को जोड़ता है. चीन की कामकाजी महिलाओं की सफलता यह साबित करती है कि एक मजबूत समाज और सफल करियर के लिए घर की नींव यानी हमारे बुजुर्गों का साथ होना कितना अनिवार्य है.

[ad_2]

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related