एक साथ 12 टार्गेट पर वार! भारत ने आखिरकार रूस से किया श्तिल मिसाइलों का सौदा, करीबी खतरे होंगे स्वाहा

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एक साथ 12 टार्गेट पर वार! भारत ने आखिरकार रूस से किया श्तिल मिसाइलों का सौदा

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रक्षा मंत्रालय ने रूस की सीएससी रोसोबॉर्नएक्पोर्ट से 2,182 करोड़ रुपये का सौदा मंजूर किया है. यह सौदा भारतीय नौसेना के लिए श्तिल-1 मिसाइलों की खरीद के लिए है. ये शानदार मिसाइलें हैं और भारत की नौसैनिक सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी हैं.

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भारत के पास भी श्तिल जैसी देसी मिसाइलें हैं लेकिन उसकी रेंज कम है.

रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को रूस की सीएससी रोसोबॉर्नएक्पोर्ट (JSC Rosoboronexport) के साथ 2,182 करोड़ रुपये के सौदे मंजूरी दे दी. यह सौदा भारतीय नौसेना के लिए सरफेस टु एयर वर्टिकल लॉन्च श्तिल (Shtil) मिसाइलों और संबंधित मिसाइल होल्डिंग फ्रेम्स की खरीद के लिए है. यह डील भारतीय नौसेना की लेयर्ड एयर डिफेंस को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है. मौजूदा वक्त में बेहद जोखिम वाले समुद्री क्षेत्रों में एंटी-शिप मिसाइल्स, एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर्स से खतरा बढ़ रहा है. ऐसे में इनसे निपटने के लिए श्तिल बेहद कारगर हथियार है.

श्तिल-1 सिस्टम की खासियतें

श्तिल-1 एक मीडियम-रेंज नेवल एयर डिफेंस सिस्टम है, जो रूसी बक मिसाइल फैमिली का वर्टिकल लॉन्च वर्जन है. इसका मुख्य मिसाइल 9M317ME है, जो वर्टिकल लॉन्च सिस्टम (VLS) से फायर होता है. यह सिस्टम ऑल-राउंड प्रोटेक्शन देता है – यानी जहाज के चारों तरफ से आने वाले खतरे को हैंडल कर सकता है.

  • ऑपरेशनल रेंज: 3.5 किमी से 50 किमी.
  • ऑल्टीट्यूड: 5 मीटर (सी-स्किमिंग टार्गेट्स) से 15 किमी तक.
  • टार्गेट स्पीड: 830 मीटर/सेकंड (मैक 2.4 के करीब) तक की स्पीड वाले टार्गेट्स को ट्रैक और हिट कर सकता है.
  • सिमल्टेनियस एंगेजमेंट: एक साथ 12 टार्गेट्स पर वार कर सकता है – यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है.
  • फायर रेट: 2-3 सेकंड के इंटरवल में लॉन्च, रैपिड रिएक्शन के लिए परफेक्ट.
  • ऑल-वेदर कैपेबिलिटी: किसी भी मौसम में काम करता है, दिन-रात ऑपरेशनल.

यह सिस्टम फ्रंटलाइन वॉरशिप्स को एंटी-शिप मिसाइल्स, फाइटर जेट्स, हेलीकॉप्टर्स और क्रूज मिसाइल्स से बचाता है. वर्टिकल लॉन्च होने से जहाज की मैन्यूवरेबिलिटी पर असर नहीं पड़ता और क्विक रिस्पॉन्स मिलता है.

भारतीय नौसेना में रोल और इंटीग्रेशन

भारतीय नौसेना पहले से ही शिवालिक-क्लास और तलवार-क्लास फ्रिगेट्स पर श्तिल-1 सिस्टम का इस्तेमाल कर रही है. ये फ्रिगेट्स इंडो-पैसिफिक में चीन और पाकिस्तान के बढ़ते नेवल थ्रेट्स के खिलाफ महत्वपूर्ण हैं. नई मिसाइलें इन प्लेटफॉर्म्स पर स्टॉक बढ़ाएंगी और पुराने मिसाइल्स की रिप्लेसमेंट/रिफिल करेंगी. यह खरीद नौसेना की लेयर्ड एयर डिफेंस आर्किटेक्चर को मजबूत करती है, जहां शॉर्ट-रेंज सिस्टम्स जैसे VL-SRSAM), मीडियम-रेंज जैसे- श्तिल और लॉन्ग-रेंज जैसे बराक-8 मिलकर कंप्लीट प्रोटेक्शन देते हैं.

भारत का अपना सिस्टम

रूस से श्तिल लेते हुए भारत आत्मनिर्भरता की ओर भी आगे बढ़ा रहा है. DRDO द्वारा विकसित VL-SRSAM (Vertical Launch Short Range Surface to Air Missile) को इंडियन नौसेना में शामिल किया जा रहा है. यह पुराने Barak-1 मिसाइल्स की जगह लेगा. VL-SRSAM ने 2024-2025 में यूजर ट्रायल्स सफलतापूर्वक पूरे किए, जहां सी-स्किमिंग टार्गेट्स को हाई एक्यूरेसी से इंटरसेप्ट किया गया. VL-SRSAM शॉर्ट-रेंज (10-15 किमी) के लिए है, जबकि श्तिल मीडियम-रेंज कवर करता है – दोनों मिलकर परफेक्ट लेयर्ड डिफेंस बनाते हैं.

स्ट्रैटेजिक महत्व और रूस के साथ पार्टनरशिप

यह डील भारत-रूस डिफेंस पार्टनरशिप की मजबूती दिखाती है, भले ही अमेरिका प्रतिबंध की धमकी देता रहा हो. रूस से S-400, AK-203 और अब श्तिल– भारत की रूसी टेक्नोलॉजी पर भरोसा दिखाता है. श्तिल डील नेवी की एयर डिफेंस को सीधे पर मजबूत करेगी. विश्लेषकों का मानना है कि इंडो-पैसिफिक में चीन की ग्रोइंग नेवी और पाकिस्तान के चाइनीज सबमरीन्स/मिसाइल्स के खिलाफ यह डील बहुत जरूरी थी.

About the Author

संतोष कुमार

न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…और पढ़ें

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