सिर्फ गुजिया ही नहीं, इस खास मिठाई के बिना भी अधूरी है होली, सालों से चली आ रही परंपरा

Date:

[ad_1]

Last Updated:

होली के मौके पर फर्रुखाबाद के बाजारों में गुलाल और पिचकारियों के साथ-साथ खरपुड़ी (बताशों) की भी जबरदस्त मांग देखने को मिल रही है. 60 से 100 रुपये किलो तक बिक रहे बताशे पूजा और परंपरा से जुड़े होने के कारण खास महत्व रखते हैं, जिसे खरीदने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही है.

फर्रुखाबाद. पूरे देश में होली का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है, बाजार रंग-बिरंगे गुलाल और पिचकारियों से सजे हैं. फर्रुखाबाद में भी बाजार की रौनक देखते ही बन रही है. हर दुकान पर लोगों की भीड़ उमड़ी है, इस बार बाजार में खरपुड़ी की दुकानों पर भी रौनक है. होली पर पूजा में बताशों का विशेष महत्व होता है, इसलिए लोग दुकानों पर जमकर इसकी खरीदारी कर रहे हैं. लोग अपने सगे-संबंधियों को भी खरपुड़ी भेजते हैं, इसलिए इसकी मांग बढ़ जाती है.

दुकानदारों ने बताया कि होली का त्यौहार हर साल आता है और इसकी तैयारी महीनों पहले से शुरू हो जाती है. शक्कर से बनी ये खास मिठाई होली के त्यौहार को और भी खास बना देती है. इस मिठाई के बिना होली का त्यौहार अधूरा सा लगता है. इसी परंपरा को निभाने के लिए लोग होली पर बताशों जरूर खरीदते हैं. बाजार में बताशों की कीमत 60 रुपये से लेकर 100 रुपये किलो तक चल रही है. प्राचीन समय से ही भारत में एक परंपरा रही है कि जब किसी परिवार में किसी व्यक्ति का निधन हो जाता है, तो उसके बाद पहली होली पर उनके रिश्तेदार और करीबी लोग बताशे लेकर जाते हैं. ऐसा माना जाता है कि इससे उस परिवार में दुःख का माहौल कम होता है. यह परंपरा सैकड़ों वर्षों से चली आ रही है.

कैसे तैयार होते हैं बताशे
कारीगरों ने बताया कि बताशों बनाने के लिए भट्टी की जरूरत होती है, जिस पर कढ़ाई में शक्कर की चाशनी तैयार की जाती है. इसे तब तक गर्म किया जाता है जब तक कि यह जमने न लगे. खरपुड़ी को गोल बनाने के लिए लकड़ी के बने फर्मे में चाशनी भरी जाती है. कुछ देर बाद ठंडा होने पर इन फर्मे को खोलकर खरपुड़ी निकाल ली जाती है. ये सरल सामग्री चीनी और पानी से बनते हैं, इसलिए इन्हें सात्त्विक और शुद्ध माना जाता है.  खासकर व्रत, कथा और पूजन में इन्हें आसानी से चढ़ाया जाता है.

About the Author

Monali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें

[ad_2]

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related