कानपुर की मशहूर कपड़ा फाड़ होली, गंगा मेला तक जारी रहेगा रंगों का ये उत्सव; देखें तस्वीरें

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Kanpur famous Kapda Phaad Holi: कानपुर में होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि एक जीवंत उत्सव है. मंदिर, घर, मोहल्ले और चौराहे. हर जगह गुलाल और रंगों की बौछार नजर आती है. यहां की मशहूर कपड़ा फाड़ होली देशभर में पहचान रखती है, जहां लोग मस्ती में एक-दूसरे के कपड़े फाड़कर जश्न मनाते हैं. कानपुर में होली एक दिन नहीं, बल्कि पूरे हफ्ते तक चलती है. होली के दिन से शुरू होकर यह उत्सव गंगा मेला तक जारी रहता है. ढोल-नगाड़ों, फगुआ गीतों और आपसी भाईचारे के साथ शहर रंगों में डूब जाता है, जो इसकी सांस्कृतिक पहचान को खास बनाता है.

कानपुर महानगर में इस बार होली का त्योहार आस्था परंपरा और मस्ती के अद्भुत संगम के रूप में दिखाई दिया. शहर के मंदिरों घाटों और मोहल्ले में रंग गुलाल की ऐसी बयार चली की हर चेहरा रंगों से सराबोर नजर आया. कहीं भक्ति गीतों के साथ फूलों की होली खेली गई तो कहीं युवाओं की टोली ने पारंपरिक अंदाज में होली का जश्न मनाया. सुबह से ही शहर के प्रमुख मंदिरों में श्रद्धालुओं के भीड़ उमर पड़ी और हर तरफ रंग बरसे और होली है की गूंज सुनाई देती रही.

कानपुर के परमट स्थित बाबा आनंदेश्वर महादेव मंदिर में होली का खास उत्सव शहर में सबसे बड़ा आकर्षण का केंद्र बना रहा. मंदिर परिसर को रंग-बिरंगे फूलों और अबीर गुलाल से सजाया गया था. भगवान की झांकियां पर श्रद्धालुओं ने पूछा वर्ष की और भक्ति गीतों पर झूमते हुए होली के लिए महादेव के दरबार में पहुंचे. भक्तों ने एक दूसरे को रंग लगाकर त्यौहार की शुभकामनाएं दी. पूरे वातावरण में भक्ति और उत्साह का अद्भुत मेल देखने को मिला.

कानपुर की पारंपरिक कपड़ा फाड़ होली का रंग भीड़ बार खूब देखने को मिला. इसके साथ ही गली मोहल्ला और हर चौराहे पर युवाओं की टोली पारंपरिक अंदाज में रंग खेलती हुई नजर आई. सड़कों पर बॉलीवुड गानों में छिड़कते हुए युवा जमकर अबीर रंग उड़ते हुए नजर आए. कानपुर में हर चौराहे पर एक अलग माहौल एक अलग उत्सव देखने को मिला, इतना ही नहीं कानपुर में यह महोत्सव लगभग 7 दिनों तक ऐसा ही मनाया जाता है.

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कानपुर के आर्य नगर चौराहे पर पारंपरिक रूप से कपड़ा फाड़ होली खेली जाती है. जिसमें कानपुर महानगर के दूर-दूर से लोग यहां पर आते हैं और अपने दोस्तों के साथ अपने परिजनों के साथ खास पारंपरिक अंदाज वाली होली खेलते हैं. यहां पुरानी परंपरा के अनुसार दोस्त और परिचित एक दूसरे के कपड़े फाड़ कर होली की मस्ती में डूब जाते हैं. आपके यहां पर तारों में सिर्फ और सिर्फ कपड़े ही कपड़े लटके हुए नजर आएंगे. ढोल नगाड़ों और डीजे की धुन पर लोग नाचते गाते नजर आते हैं और चारों तरफ रंगों की बारिश होती हुई दिखाई देती है.

इतना ही नहीं कानपुर महानगर के अलग-अलग मोहल्ला और कॉलोनी में भी होली का उत्साह देखने लायक होता है. सोसाइटी और गलियों में लोगों ने सामूहिक रूप से होली मिलन समारोह आयोजित किया. बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने रंग गुलाल लगाकर एक दूसरे को बधाई दी. कई जगहों पर डीजे ढोल और होली गीतों के साथ लोग देर रात तक नाचते गाते रहे. जिससे पूरा माहौल उत्सव में बना रहा.

आपको बता दे कानपुर में होली एक उत्सव के रूप में मनाई जाती है. क्रांति की याद के रूप में मनाई जाती है. यही वजह है कि कानपुर में होली वाले दिन से शुरू होकर गंगा मेला तक खेली जाती है. एक हफ्ते तक चलने वाले इस महोत्सव के दौरान कानपुर के सभी जो बड़े थोक बाजार हैं वह भी बंद रहते हैं. एक हफ्ते तक यहां पर जश्न और उल्लास का एक अलग माहौल देखने को मिलता है.

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