एयर डिफेंस का ब्रह्मास्त्र: 600 KM दूर से ही दुश्मन को करता है खल्लास, भारत को मिलने जा रहा मिसाइलों का महाकाल

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600 KM दूर से ही दुश्मन खत्म, भारत को मिलने जा रहा एयर डिफेंस का ब्रह्मास्त्र

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एस-400 दुनिया के सबसे खतरनाक एयर डिफेंस सिस्टम में गिना जाता है. इसका लॉन्ग रेंज रडार 600 किलोमीटर दूर से ही दुश्मन को डिटेक्ट कर लेता है. यह सिस्टम एक साथ 100 से ज्यादा फ्लाइंग ऑब्जेक्ट्स को ट्रैक कर सकता है. यह 400 किलोमीटर की दूरी तक फाइटर जेट और ड्रोन को मार गिराता है. एस-400 से 400, 250, 120 और 40 किलोमीटर रेंज की चार अलग-अलग मिसाइलें दागी जा सकती हैं.

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रूस से भारत को इसी साल मिलेंगे एस-400 के दो और स्क्वाड्रन. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में पाकिस्तान के खिलाफ एस-400 का कॉम्बैट डेब्यू हुआ. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 300 किलोमीटर दूर पाकिस्तान के एक एयरक्राफ्ट को हिट कर एस-400 ने अब तक का सबसे लंबी दूरी का किल रिकॉर्ड भी बनाया. हालांकि, भारतीय वायुसेना को डील के मुताबिक मिलने वाली 5 स्क्वाड्रन की पूरी डिलीवरी अभी तक नहीं हुई है. फिलहाल, भारतीय वायुसेना के पास सिर्फ 3 स्क्वाड्रन मौजूद हैं, लेकिन बची हुई दो स्क्वाड्रन का इंतजार इसी साल खत्म होने की संभावना है. रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, अगले 2 से 3 महीनों के दौरान चौथी यूनिट मिल सकती है और डील की आखिरी, यानी पांचवीं यूनिट, इस साल के अंत तक मिलने की संभावना है.

भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाने के मकसद से अतिरिक्त एस-400 यूनिट्स की खरीद पर भी चर्चा जारी थी, और इस दिशा में फैसला लेने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. रक्षा सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड ने 5 अतिरिक्त एस-400 यूनिट्स की खरीद को हरी झंडी दे दी है. इसके बाद अब यह प्रस्ताव मंजूरी के लिए डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (डीएसी) के पास भेजा जाएगा. वहीं से एओएन (आवश्यकता की स्वीकृति) मंजूर होने के बाद खरीद प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरू होगी. इसके बाद अंतिम मंजूरी प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) की बैठक में होगा.

इससे पहले ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के ठीक बाद डीएसी ने एस-400 बैटरियों के लिए एनुअल मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट को भी मंजूरी दी थी. आमतौर पर किसी भी सैन्य उपकरण की खरीद में मेंटेनेंस शामिल होता है, लेकिन उस कॉन्ट्रैक्ट को समय-समय पर रिन्यू भी कराया जाता है. भारत ने साल 2018 में एक बड़ा फैसला लेते हुए रूस से लॉन्ग रेंज एयर डिफेंस सिस्टम एस-400 खरीदने का समझौता किया था. रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते इसकी डिलीवरी में कुछ देरी हुई. साल 2024 में रक्षा मंत्री की रूस यात्रा के दौरान भी बची हुई दो स्क्वाड्रन की डिलीवरी को लेकर चर्चा हुई थी.

एस-400 की क्षमता की बात करें तो भारतीय वायुसेना के एस-400 का कॉम्बैट डेब्यू पाकिस्तान के खिलाफ ही हुआ. इसका लॉन्ग रेंज रडार 600 किलोमीटर दूर से आने वाले दुश्मन के हवाई खतरों को डिटेक्ट कर सकता है. यह एक साथ 100 से ज्यादा फ्लाइंग ऑब्जेक्ट्स को ट्रैक करने की क्षमता रखता है. यह स्ट्रैटेजिक बॉम्बर, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर एयरक्राफ्ट, टोही विमान, अर्ली वॉर्निंग एयरक्राफ्ट, फाइटर जेट, आर्म्ड ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल जैसे खतरों को 400 किलोमीटर तक की दूरी से इंटरसेप्ट कर सकता है. एस-400 से 400, 250, 120 और 40 किलोमीटर रेंज की चार अलग-अलग मिसाइलें दागी जा सकती हैं.

भारत ने रूस के साथ साल 2018 में करीब 39,000 करोड़ रुपए में पांच एस-400 सिस्टम खरीदने की डील की थी. पहली स्क्वाड्रन भारत को दिसंबर 2021 में मिली थी, दूसरी अप्रैल 2022 में और तीसरी फरवरी 2023 में डिलीवर हुई. बाकी बची दो स्क्वाड्रन 2024 में मिलने की उम्मीद थी, लेकिन वह टाइमलाइन पूरी नहीं हो सकी. अब नई टाइमलाइन के मुताबिक इस साल दोनों यूनिट्स मिलने की संभावना है.

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Rakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें

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