पोस्ट मास्टर का बेटा बना अधिकारी, रोजाना 8 घंटे मेहनत से की पढ़ाई, यूपीएससी में लिखी कामयाबी की कहानी

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पोस्ट मास्टर का बेटा बना अधिकारी, रोजाना 8 घंटे मेहनत से की पढ़ाई

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UPSC CSE 2025 Success Story: UPSC CSE 2025 Topper: संघ लोक सेवा आयोग ने सीएसई 2025 का फाइनल रिजल्ट जारी कर दिया है, जिसमें बलिया के एक होनहार ने सफलता हासिल की है. इससे पूरे इलाके में खुशी की लहर है. आइए इस होनहार की सफलता की कहानी जानते हैं.

बलिया: जनपद से एक बड़ी कामयाबी और प्रेरणादायक कहानी सामने आ रही है, जिसने पूरे इलाके का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है. आपको बताते चलें कि बलिया जनपद के दौलतपुर निवासी रवि शेखर सिंह ने सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक UPSC में 176वीं रैंक हासिल कर जिले का नाम रोशन कर दिया है.

फिलहाल उनका परिवार बलिया शहर के परिखरा इलाके में रहता है, जहां इस सफलता के बाद खुशी का माहौल देखने को मिल रहा है. इस दौरान बलिया के प्रसिद्ध बाबा बालेश्वर मंदिर सफलता और खुशी के ढोल नगाड़ों से गूंज पड़ा.

पिता डाक विभाग में असिस्टेंट पोस्ट मास्टर

UPSC पास रवि शेखर सिंह ने कहा कि उनके पिता दिलीप सिंह डाक विभाग में असिस्टेंट पोस्ट मास्टर के पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं और गांव में खेती-किसानी भी है. रवि की शुरुआती पढ़ाई कैस्टल ब्रिज स्कूल बसंतपुर से, जबकि इंटरमीडिएट की पढ़ाई नागा जी सरस्वती विद्या मंदिर माल्देपुर बलिया से संपन्न हुई है. इसके बाद उन्होंने दिल्ली जाकर हंसराज कॉलेज दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और यहीं से बड़े सपनों की उड़ान भर दी.

रोजाना इतने घंटे की पढ़ाई

उन्होंने आगे कहा कि यूपीएससी में यह उनका तीसरा प्रयास था, जबकि इंटरव्यू में वह दूसरी बार पहुंचे थे. दो बार असफल होने के बाद निराशा जरूर हुई, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी, बल्कि लगातार मेहनत करते हुए अपने मजबूत इरादों के दम पर आखिरकार यह बड़ी सफलता हासिल कर ली. रवि रोजाना तय समय के बजाय कम से कम 6 से 8 घंटे गंभीरता से पढ़ाई करना उचित समझते थे. इस सफलता का श्रेय रवि ने अपने माता-पिता, गुरुजन और परिवारवालों को दिया है.

बेटे की सफलता से मां भावुक

रवि की मां पुष्पा देवी बेटे की इस उपलब्धि से बेहद भावुक और गर्व महसूस कर रही हैं. रवि की सफलता की खबर जैसे ही गांव पहुंची, दौलतपुर में खुशी की लहर दौड़ गई है. रवि शेखर सिंह की कहानी यह बताती है कि अगर इरादे मजबूत हों और मेहनत सच्ची हो, तो छोटे गांव से निकलकर भी देश की सबसे बड़ी मंजिल हासिल की जा सकती है. उनकी सफलता अब कई युवाओं के लिए नई प्रेरणा बन गई है. उनका साफ तौर पर कहना है कि असफलता से हार नहीं माननी चाहिए, बल्कि प्रयास जारी रखना चाहिए. हो सके दो बार आप असफल हुए हैं, लेकिन तीसरे पायदान पर सफलता आपका इंतजार कर रही है.

About the Author

आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.

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