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How To Water Plants: घर की बालकनी हो, छत का छोटा-सा गार्डन या आंगन में लगे गमले हर जगह पौधे लोगों के जीवन में हरियाली और सुकून लाते हैं. लेकिन अक्सर देखा गया है कि लोग पौधे तो बड़े शौक से लगा लेते हैं, मगर उनकी देखभाल के सबसे जरूरी हिस्से यानी पानी देने के सही तरीके को नजरअंदाज कर देते हैं. कई बार पौधे सूखने लगते हैं और हमें लगता है कि शायद खाद कम पड़ गई या धूप ज्यादा हो गई. जबकि असली वजह अक्सर गलत समय पर या गलत तरीके से दिया गया पानी होता है. गार्डनिंग विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पौधों को सही मात्रा और सही समय पर पानी दिया जाए, तो वे लंबे समय तक स्वस्थ रहते हैं और अच्छी बढ़त भी दिखाते हैं. आइए समझते हैं कि पौधों को पानी देने का सही तरीका क्या है.
पौधों की जरूरत को समझना सबसे जरूरी
हर पौधे की पानी पीने की क्षमता अलग-अलग होती है. कुछ पौधे ऐसे होते हैं जिन्हें ज्यादा नमी चाहिए, जबकि कुछ कम पानी में भी आसानी से जीवित रह सकते हैं. उदाहरण के लिए सक्युलेंट और कैक्टस जैसे पौधे अपनी पत्तियों में पानी जमा करके रखते हैं, इसलिए इन्हें बार-बार पानी देने की जरूरत नहीं पड़ती. इसके उलट, कई इनडोर पौधे जैसे मनी प्लांट या स्पाइडर प्लांट को मिट्टी में हल्की नमी बनाए रखना जरूरी होता है. यही कारण है कि पौधा खरीदते समय नर्सरी से उसकी पानी की जरूरत जरूर पूछनी चाहिए.
मिट्टी की नमी जांचना क्यों जरूरी है
पौधों को पानी देने से पहले मिट्टी की नमी जांचना एक सरल लेकिन बेहद असरदार तरीका है. इसके लिए किसी विशेष उपकरण की जरूरत नहीं होती.
उंगली से मिट्टी की जांच
अगर आप गमले की मिट्टी में लगभग 1 से 2 इंच तक उंगली डालते हैं और मिट्टी उंगली से चिपक जाती है, तो इसका मतलब है कि मिट्टी में पहले से नमी मौजूद है और फिलहाल पानी देने की जरूरत नहीं है. वहीं अगर मिट्टी सूखी लगे और उंगली साफ बाहर आ जाए, तो पौधे को पानी दिया जा सकता है.
मॉइश्चर मीटर का इस्तेमाल
गार्डनिंग में रुचि रखने वाले लोग मॉइश्चर मीटर का इस्तेमाल भी करते हैं. यह एक छोटा उपकरण होता है जो मिट्टी में नमी का स्तर बताता है. इससे यह समझना आसान हो जाता है कि पौधे को पानी कब देना चाहिए.
पानी देने का सही तरीका
अक्सर लोग सीधे किसी मग या बाल्टी से पानी डाल देते हैं. इससे मिट्टी कटने लगती है और कई बार पौधे की जड़ें भी बाहर आ सकती हैं.
वाटरिंग कैन का इस्तेमाल
गार्डनिंग एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि पौधों को वाटरिंग कैन से पानी देना चाहिए. इसमें छोटे-छोटे छिद्र होते हैं, जिससे पानी बारिश की बूंदों की तरह धीरे-धीरे गिरता है. इससे मिट्टी सुरक्षित रहती है और पानी जड़ों तक अच्छी तरह पहुंचता है. अगर आपके पास ज्यादा पौधे हैं, तो स्प्रे नोजल वाले पाइप का इस्तेमाल भी किया जा सकता है.
पानी देने का सही समय
पौधों को पानी देने के लिए समय का चुनाव भी बेहद महत्वपूर्ण होता है.
सुबह का समय सबसे बेहतर
सुबह का समय पौधों को पानी देने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है. उस समय मिट्टी ठंडी होती है और पानी धीरे-धीरे जड़ों तक पहुंच जाता है.
शाम को भी दे सकते हैं पानी
गर्मियों में अगर जरूरत हो तो शाम को सूरज ढलने के बाद भी पानी दिया जा सकता है.
हालांकि दोपहर की तेज धूप में पानी देना नुकसानदायक हो सकता है. उस समय मिट्टी बहुत गर्म होती है और पानी जल्दी गर्म होकर पौधों की नाजुक जड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है.
पौधे के बेस में पानी देना क्यों जरूरी है
कई लोग पौधे की पत्तियों पर पानी डाल देते हैं और सोचते हैं कि इससे पौधे को पर्याप्त पानी मिल गया. लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार पौधे को हमेशा जड़ यानी बेस के पास पानी देना चाहिए. क्योंकि असली पानी का अवशोषण जड़ों के जरिए ही होता है. अगर सिर्फ पत्तियों पर पानी डाला जाए, तो मिट्टी तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाता.
डीप वाटरिंग का तरीका
कई बार पौधे को ऊपर से पानी देने के बावजूद जड़ों तक पर्याप्त नमी नहीं पहुंच पाती. ऐसे में डीप वाटरिंग तकनीक काफी कारगर मानी जाती है.
इसमें गमले को एक बड़े टब या बर्तन में रखा जाता है और बर्तन में इतना पानी भरा जाता है कि गमले का निचला हिस्सा पानी में डूब जाए. कुछ समय बाद मिट्टी नीचे से पानी सोख लेती है और पूरे गमले में नमी फैल जाती है. यह तरीका खासकर उन पौधों के लिए उपयोगी है जो नर्सरी से नई मिट्टी के साथ लाए जाते हैं.
मौसम के अनुसार बदलें पानी देने का तरीका
पौधों की पानी की जरूरत मौसम के साथ बदलती रहती है.
-गर्मियों में पौधों को ज्यादा पानी की जरूरत पड़ती है.
-सर्दियों में पानी की मात्रा कम करनी पड़ती है.
-बरसात के मौसम में आउटडोर पौधों को अक्सर अतिरिक्त पानी देने की जरूरत नहीं होती.
इसलिए गार्डनिंग में एक ही नियम हर मौसम में लागू नहीं होता. पौधों की स्थिति और मौसम के अनुसार पानी देना जरूरी होता है.
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