[ad_1]
Last Updated:
UPSC Result 2025: हरदोई के काजीपुर गांव के होनहार योगेंद्र कुमार सिंह ने UPSC 2026 की परीक्षा में 286वीं रैंक हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है. IIT कानपुर से एमटेक और बेंगलुरु की प्रतिष्ठित नौकरी छोड़कर योगेंद्र ने सिविल सेवा को चुना. किसान पिता और शिक्षिका माता के पुत्र योगेंद्र ने अपनी सफलता का श्रेय एकाग्रता और कड़ी मेहनत को दिया है. उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि से पूरे क्षेत्र में जश्न का माहौल है और बधाई देने वालों का तांता लगा है.
किसान के बेटे योगेंद्र सिंह ने पास की UPSC परीक्षा
UPSC Result 2025: कहते हैं कि अगर इरादे फौलादी हों और लक्ष्य के प्रति समर्पण अटूट हो, तो सफलता कदम चूमती ही है. उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के मल्लावां क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले छोटे से गांव काजीपुर के एक होनहार युवक ने इस बात को सच कर दिखाया है. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा 2026 के परिणाम घोषित होते ही पूरे जिले में खुशी की लहर दौड़ गई. काजीपुर निवासी योगेंद्र कुमार सिंह ने इस प्रतिष्ठित परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर 286वीं रैंक हासिल कर न केवल अपने परिवार का, बल्कि पूरे जनपद का नाम रोशन किया है.
आईआईटी कानपुर से पढ़ाई और फिर छोड़ी लाखों की नौकरी
योगेंद्र कुमार सिंह की यह सफलता जितनी गौरवमयी है, उनका सफर उतना ही प्रेरणादायी रहा है. योगेंद्र ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा लखनऊ पब्लिक स्कूल, माधौगंज से पूरी की. इसके बाद उन्होंने वर्ष 2011 में हाईस्कूल और 2013 में इंटरमीडिएट की परीक्षा लखनऊ के प्रतिष्ठित सीएमएस स्कूल से उत्तीर्ण की. शिक्षा के प्रति उनके जुनून ने उन्हें देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान IIT कानपुर तक पहुंचाया, जहां से उन्होंने 2014 में बीटेक और फिर 2019 में एमटेक की डिग्री हासिल की.
प्रतिभाशाली योगेंद्र का चयन बेंगलुरु स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में एक प्रतिष्ठित पद पर हुआ, जहां उन्होंने दो वर्षों तक नौकरी की. लेकिन देश सेवा का जज्बा और प्रशासनिक अधिकारी बनने का सपना उन्हें चैन से बैठने नहीं दे रहा था. अंततः, वर्ष 2023 में उन्होंने अपनी आरामदायक नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और कानपुर लौटकर सिविल सेवा की तैयारी में जुट गए.
किसान पिता और शिक्षिका माता का मिला सहयोग
योगेंद्र एक साधारण और मेहनती परिवार से ताल्लुक रखते हैं. उनके पिता गिरीश कुमार (नरेश पटेल) एक प्रगतिशील किसान हैं, जबकि उनकी माता रामरोशनी उच्च प्राथमिक विद्यालय बघौडा में सहायक अध्यापिका के पद पर तैनात हैं. योगेंद्र की इस सफलता में उनकी माता की प्रेरणा और पिता के संघर्ष का बड़ा योगदान रहा है. उनके बड़े भाई योगेश कुमार (पंकज) कानपुर के डफरिन अस्पताल में लैब टेक्नीशियन (एलटी) के पद पर कार्यरत हैं. परिवार के शिक्षित वातावरण और भाई-बहनों के सहयोग ने योगेंद्र को हर मोड़ पर संबल प्रदान किया.
एकाग्रता और समझ ही सफलता की कुंजी: योगेंद्र
अपनी सफलता का मंत्र साझा करते हुए योगेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा को क्रैक करने के लिए केवल रटना काफी नहीं है. उन्होंने कहा, ‘सफलता के लिए अटूट साहस और एकाग्रता (Focus) अनिवार्य है. छात्रों को विषयों को रटने के बजाय उन्हें गहराई से समझने की कोशिश करनी चाहिए.’ उन्होंने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने गुरुजनों, माता-पिता, भाई और अपने मित्रों (कृष्णपाल सिंह, मनोज कुमार, अनूप कुमार) को दिया है.
गांव से लेकर जिले तक जश्न का माहौल
जैसे ही योगेंद्र के आईएएस (IAS) बनने की खबर गांव पहुंची, बधाई देने वालों का तांता लग गया. परिजनों ने मिठाई खिलाकर अपनी खुशी जाहिर की. योगेंद्र की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष सुधीर गंगवार, सुधीर पटेल, नीरज गुप्ता और खंड शिक्षा अधिकारी संतोष कुमार समेत क्षेत्र के तमाम गणमान्य लोगों ने उनके घर पहुंचकर परिवार को बधाई दी और योगेंद्र के उज्जवल भविष्य की कामना की.
About the Author
राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें
[ad_2]
Source link
