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आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव और चिंता आम समस्या बनती जा रही है. ऐसे में दिमाग को शांत रखने के लिए म्यूजिक थेरेपी एक आसान और असरदार तरीका माना जाता है. सिर्फ कुछ मिनट पसंदीदा संगीत सुनने से मन को सुकून और मूड को राहत मिल सकती है.
आज के समय में अनियमित दिनचर्या, काम का बढ़ता दबाव और भागदौड़ भरी जिंदगी का असर सिर्फ शरीर पर ही नहीं बल्कि दिमाग पर भी पड़ता है. ऐसे माहौल में कई लोग तनाव, चिंता, चिड़चिड़ापन, उदासी और घबराहट जैसी मानसिक परेशानियों का सामना करने लगते हैं. धीरे-धीरे ये समस्याएं आम होती जा रही हैं. हालांकि, इनसे राहत पाने के लिए म्यूजिक थेरेपी एक आसान और असरदार तरीका माना जाता है.
मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर रखने के लिए संगीत सुनना एक सरल, मुफ्त और प्रभावी उपाय है. पूरे दिन के काम और थकान के बाद अगर कुछ समय अपने पसंदीदा हल्के और शांत संगीत को सुना जाए तो मन और दिमाग को काफी सुकून मिलता है. नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) भी सलाह देता है कि हर व्यक्ति को रोज थोड़ा समय अपने लिए निकालना चाहिए और अपनी पसंद के गीत-संगीत के जरिए मानसिक तनाव को कम करने की कोशिश करनी चाहिए.
एनएचएम के मुताबिक, संगीत सुनने या बजाने से शरीर में तनाव बढ़ाने वाला हार्मोन कोर्टिसोल कम हो जाता है. वहीं डोपामाइन और सेरोटोनिन जैसे खुशी देने वाले हार्मोन का स्तर बढ़ने लगता है. इसका सीधा असर हमारे मूड पर पड़ता है और व्यक्ति खुद को ज्यादा हल्का और सकारात्मक महसूस करता है. इसके अलावा संगीत भावनाओं को व्यक्त करने का भी एक आसान तरीका बन जाता है. चाहे व्यक्ति दुखी हो या खुश, संगीत के माध्यम से वह अपनी भावनाओं को आसानी से बाहर निकाल सकता है.
म्यूजिक थेरेपी के कई फायदे होते हैं. यह मन को शांत रखने में मदद करती है, याददाश्त को मजबूत बनाती है और नींद की गुणवत्ता भी बेहतर करती है. नियमित रूप से संगीत सुनने से मानसिक तनाव और चिंता कम होती है. इससे सकारात्मक सोच बढ़ती है और नकारात्मक विचार धीरे-धीरे कम होने लगते हैं. साथ ही व्यक्ति का भावनात्मक संतुलन बेहतर होता है और आत्मविश्वास भी बढ़ता है.
विशेषज्ञों का कहना है कि रोज थोड़ा समय निकालकर हल्का और सुकून देने वाला संगीत सुनना चाहिए. जैसे क्लासिकल म्यूजिक, इंस्ट्रुमेंटल, भजन या अपनी पसंद के गाने. यह कोई मुश्किल थेरेपी नहीं बल्कि एक अच्छी आदत है जो दिमाग को शांत रखने में मदद करती है. अगर किसी को ज्यादा तनाव महसूस हो रहा है तो वह म्यूजिक थेरेपी एक्सपर्ट की सलाह भी ले सकता है. हालांकि, संगीत हमेशा धीमी आवाज में सुनना चाहिए और जहां तक हो सके हेडफोन या ईयरफोन का ज्यादा इस्तेमाल करने से बचना चाहिए.
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विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें
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