अमेरिका-ईरान जंग से बाजार में भूचाल! सोमवार को गैप-डाउन की आशंका, निफ्टी के 24,000 से नीचे फिसलने का खतरा

Date:

[ad_1]

नई दिल्ली. अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव फिलहाल थमता नहीं दिख रहा है. दुनिया के बड़े बाजार खुलने में अब कम समय बचा है, लेकिन हालात में किसी तरह की नरमी के संकेत नहीं हैं. इस बीच कुवैत, यूएई, सऊदी अरब, इराक और कतर जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों ने अपने कुछ तेल और गैस उत्पादन केंद्रों को आंशिक रूप से बंद करने की पुष्टि की है. इन फैसलों से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है. यही वजह है कि निवेशकों के बीच डर बढ़ गया है और माना जा रहा है कि सोमवार को दुनिया के कई शेयर बाजार दबाव में खुल सकते हैं, जिनमें भारत का बाजार भी शामिल है.

तेल और गैस उत्पादन बंद होने का असर
विशेषज्ञों का कहना है कि तेल और गैस उत्पादन को बंद करना जितना आसान लगता है, उसे फिर से शुरू करना उतना ही कठिन होता है. कई मामलों में उत्पादन दोबारा शुरू करने में 15 से 30 दिन तक का समय लग सकता है. यही कारण है कि बाजार को डर है कि आने वाले दिनों में तेल की सप्लाई सीमित रह सकती है. अगर यह स्थिति बनी रहती है तो ऊर्जा की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है. इसके अलावा कतर से आने वाली दुनिया की करीब 20 फीसदी एलएनजी सप्लाई भी पूरी तरह रुक गई है, जिससे ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और बढ़ गई है.

कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर तक पहुंचने की आशंका
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि मौजूदा हालात में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं. अगर तनाव कम नहीं हुआ तो आने वाले कुछ ही दिनों में ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है. तेल की कीमतों में इतनी तेज बढ़ोतरी का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ता है. खासकर उन देशों पर ज्यादा दबाव आता है जो तेल का बड़ा आयात करते हैं. भारत भी उन देशों में शामिल है, इसलिए यहां महंगाई बढ़ने और बाजार में गिरावट का खतरा ज्यादा माना जा रहा है.

महंगाई और रुपये पर भी बढ़ेगा दबाव
तेल महंगा होने का सीधा असर महंगाई पर पड़ता है. पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें बढ़ने से परिवहन और उत्पादन लागत भी बढ़ जाती है. इससे कई वस्तुओं की कीमतों में इजाफा हो सकता है. विशेषज्ञों के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने से डॉलर मजबूत हो सकता है, जिससे भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ेगा. रुपया कमजोर होने से विदेशी निवेशकों का रुख भी सावधान हो सकता है. हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे माहौल में सोने में निवेश करने वालों के लिए गिरावट पर खरीदारी की रणनीति फायदेमंद हो सकती है.

सोमवार को बाजार में गैप-डाउन की संभावना
मार्केट एनालिस्ट्स के अनुसार सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट के साथ शुरुआत हो सकती है. निफ्टी 50 इंडेक्स अपने मौजूदा सपोर्ट स्तर 24,200 के आसपास आ सकता है. अगर तेल की कीमतें 100 डॉलर के ऊपर टिक जाती हैं तो इस सप्ताह निफ्टी के 24,000 के नीचे फिसलने की संभावना भी जताई जा रही है. इसके अलावा बाजार में भारी वेटेज रखने वाली कंपनियां, खासकर ऊर्जा क्षेत्र की कंपनियां, सूचकांकों पर दबाव बढ़ा सकती हैं.

निफ्टी के लिए 24,000 का स्तर बेहद अहम
विशेषज्ञों का कहना है कि निफ्टी के लिए 24,000 का स्तर बहुत महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जाता है. अगर इंडेक्स इस स्तर के नीचे बंद होता है तो यह बाजार के लिए बड़ा ब्रेकडाउन साबित हो सकता है. ऐसी स्थिति में निफ्टी का अगला मजबूत सपोर्ट करीब 22,500 के आसपास देखा जा सकता है. यदि बाजार कुछ सत्रों तक 24,000 के नीचे बना रहता है तो पूरे महीने शेयर बाजार पर मंदी का दबाव बना रह सकता है. बीच-बीच में हल्की तेजी जरूर आ सकती है, लेकिन कुल मिलाकर बाजार में अस्थिरता और गिरावट का दौर जारी रहने की आशंका जताई जा रही है.

[ad_2]

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related